मंगलवार, 28 जुलाई 2020

कोरोना_मरीज_की_आपबीती-1

*#कोरोना_मरीज_की_आपबीती-1*

*पोस्टकर्ता : ब्लॉगर और पत्रकार रामकृष्ण डोंगरे*

[[यह पोस्ट इसलिए शेयर की जा रही है कि हम इन कहानियों से सीख सके. सबक ले सकें। या हमारे अंदर जो करोना का डर है, उसे हम खत्म कर सके या जिन लोगों के अंदर डर बिल्कुल नहीं है और वे लापरवाही कर रहे हैं, वे अब संभल जाए।]]

ये कहानी एक महिला पत्रकार की है, जो कि एक दफ्तर में काम करती हैं। उसके दफ्तर में 9 जुलाई 2020 को एक व्यक्ति को कोरोना निकलता है। उसके बाद से महिला घर में ही क्वारंटाइन रहती है। वर्क फॉम होम करती है।

इसके बाद पति पत्नी दोनों, हॉस्पिटल जाकर अपना टेस्ट करवाते हैं. उसमें दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है. घर आने के एक-दो दिन बाद महिला को फीवर आने लगता है. महिला दोबारा हॉस्पिटल जाकर टेस्ट करवाती है. बदकिस्मती से अब उसका टेस्ट 15 जुलाई को पॉजिटिव आ जाता है.

उसने बताया- "उस रात तो 12:00 बजे जैसे ही पता चला उसके बाद आंखों से नींद ही गायब हो गई। सुबह 9:00 बजे से सिर्फ पूछताछ की जा रही थी। एसडीएम, तहसीलदार, थानेदार, सीएमएचओ से लेकर करीब 20 फोन आ चुके थे। लेकिन देर शाम तक इलाज शुरू नहीं हुआ। कोरोना मरीज को ऐसा महसूस होने लगता है जैसे कि उसने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो और एंबुलेंस से जेल में डालने के लिए ले जा रहे हो। इसी तरह की नजरों से लोग देखते हैं।

हॉस्पिटल में एडमिट होने के बाद उसे दवाइयां और डॉक्टरों की तरफ से फिक्स डाइट दी जाती है। इसमें अंडे, सेब, दूध और खाना शामिल होता है।

इसके बाद महिला की रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है। 10 दिन हास्पिटल में रहने के बाद महिला 26 जुलाई 2020 को अपने घर आ जाती है। फिलहाल अभी घर आने के बाद भी क्वारंटाइन ही है। उसे अभी भी कमजोरी और बॉडी पेन रहता है। 10 दिन के बाद घर आने पर कालोनी के लोग छुप छुपकर देखते हैं कि कहीं मिलने ना आ जाए।

महिला ने बताया कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद सबसे ज्यादा टेंशन होती है। पहले 10-20 फोन आते है पूछताछ के लिए सरकारी दफ्तरों से। फिर एंबुलेंस लेने पहुंचती है 8-10 घंटे के बाद.  उसके बाद 8-10 कोरोना पॉजिटिव को पूरे शहर से उठाकर हास्पिटल ले जाया जाता है। इसमें भी 2-3 घंटे लग जाते है। 

यह पूरा घटनाक्रम अपने आपमें डराने वाला होता है। हमारे आत्मविश्वास को कमजोर करता है. इसके बजाय अगर हमारे अपने और पड़ोसी हमारा मनोबल बढ़ाने वाला काम करें तो बेहतर होता।

*पोस्टकर्ता : ब्लॉगर और पत्रकार रामकृष्ण डोंगरे*

आप चाहते है कि आपको या आपके परिवार के लोगों को कोरोना न हो। तो पहले खूब डरें। घर से बाहर कम से कम निकलें। मास्क, फिजिकल डिस्टेंसिंग जैसे उपाय करें। लेकिन फिर भी अगर आप कोरोना के कोई लक्षण नजर आएं तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। और अपना टेस्ट करवाएं। क्योंकि जब ये वायरस आपके फेफड़ों तक पहुंच जाता है तब बहुत मुश्किल हो जाती है।

धन्यवाद

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