शनिवार, 17 अगस्त 2019

हिंदी प्रचारिणी समिति की लाइब्रेरी अब होगी डिजिटल...



छिंदवाड़ा में कॉलेज लाइफ के दौरान शायद ही कोई ऐसा दिन रहा हो, जब लाइब्रेरी नहीं आ पाए हो. 1998 में जब छिंदवाड़ा पहुंचा था, उसके बाद से लेकर 2004 तक लगातार इस लाइब्रेरी में आना होता था.

यहीं आकर कई मित्र भी बने, जो डीडीसी और पीजी कॉलेज से होते हुए आज भी जिनसे रिश्ता बना हुआ है।

इस हिंदी प्रचारिणी समिति लाइब्रेरी को अब डिजिटल किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में जल्द ही ऑनलाइन होने के बाद किताबों की संख्या और फैसिलिटी बढ़ाई जाएगी। इधर कुछ सालों में पहले ही इसका विस्तार किया जा चुका है। फिलहाल करीब 27000 किताबें हैं। इसके अलावा करीब 700 मेंबर्स है, जिसमें साधारण मेंबर्स और लाइफटाइम मेंबर्स भी है.

हिंदी प्रचारिणी समिति छिंदवाड़ा का गौरव है. यहां पर देश के कई ख्यातनाम साहित्यकार आते रहे हैं. जिनकी सूची यहां पर लगी हुई है. देश के तमाम लेखक साहित्यकार के छायाचित्र भी यहां पर है, जिन्हें देखकर आज की पीढ़ी उनसे प्रेरणा लेती है.

छिंदवाड़ा में इस वक्त 3 लाइब्रेरी रेगुलर चल रही है, जिसमें शासकीय ग्रंथालय - गुड़िया घर वाली लाइब्रेरी है, जो कि अब निगम दफ्तर के सामने शुक्ला ग्राउंड में संचालित है। एक अन्य लाइब्रेरी खजरी में sc-st हॉस्टल में संचालित हो रही है।

इसके अलावा दो और नई लाइब्रेरी जल्द ही शुरू होने वाली है। छिंदवाड़ा में पढ़ने का माहौल काफी अच्छा है और इन लाइब्रेरी से कंपटीशन एग्जाम की तैयारी कर रहे युवाओं को काफी मदद मिलती है.

मित्र आशीष जैन के साथ काफी वक्त बिताया। साथ ही पुरानी यादें भी ताजा की। इस परिसर में विद्या निकेतन स्कूल भी हैं। इसके अलावा रविंद्र भवन की इमारत भी है। जहां पर थिएटर और सांस्कृतिक आयोजन होते रहते हैं। इस जगह से भी कई यादें जुड़ी हुई है। कई लोगों से यही पर मुलाकातें हुई है। हिंदी प्रचारिणी के सामने टाउन हॉल की लाइब्रेरी और उस लाइब्रेरी में सुदेश मेहरोलिया सर का लगातार मार्गदर्शन गाइडेंस आज भी यादों में बसा हुआ है।

*रामकृष्ण डोंगरे के फेसबुक वॉल से*


कोई टिप्पणी नहीं: