मंगलवार, 26 मार्च 2019

मिलिए पांढुर्णा से नायब तहसीलदार बनी लविना घागरे से



जिद की और सबके लिए उदाहरण बनी -

"जब मैंने  MPPSC की तैयारी करके प्रशासनिक अधिकारी बनने की बात अपने परिजनों से की तो पापा ने  स्कूटी दिलाने और घर रहकर आराम करने की सलाह दी ,पर मैंने पढाई करके कुछ बनने की बात कही तो उन्हें अच्छा लगा। और समाज वालों को जब मेरी बात पता लगी तो सब मुझपर हँस  रहे थे और अधिकारी बनने को दिवा स्वप्न बता रहे थे। पर मैं भी अपनी जिद पर अड़ गई और पहले प्रयास में ही MPPSC क्लियर करके लोगों को बता दिया कि व्यक्ति यदि ठान ले तो हर काम संभव है। MPPSC में मेरा चयन हुआ तो जो पूर्व में मुझपर हँस रहे थे ,मेरी आलोचना कर रहे थे वे ही सबसे पहले मुझे बधाई देने आये थे।" ये शब्द है कुमारी लवीना घागरे के जो आज नायब तहसीलदार बनकर बेटियों की प्रेरणा स्रोत बनी हुई है।

कु लविना की स्कूली  शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर बिछुआ और पांढुर्ना में हुई, जबकि उच्च शिक्षा बी ई इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक में है। पिता श्री वसंतराम घागरे वेटरनरी डॉक्टर है और माँ श्रीमती नंदा घागरे गृहणी है। भाई मनीष घागरे है।
कु लविना कहती है -मेरा रोल मॉडल मेरी मम्मी है जो मुझे सदैव सपोर्ट करती रहती है। प्रतियोगी परीक्षाओं में किस्मत आजमाने वालों के लिए कु लविना का सन्देश है कि कर्रेंट अफेयर पर ध्यान केंद्रित कर प्रतिदिन ६ से ७ घंटे पढाई करना जरुरी है।

  कु  लविना  कहती हैं MPPSC की  परिणाम सूचि में अपना नाम देखकर मैं बेहद खुश हुई थी। मैं पांढुर्ना से MPPSC  क्लियर करने वाली  पहली उम्मीदवार थी। इसके पूर्व कोई भी इसमें बाजी  नहीं मार पाया था।  मैंने जिद की और सबके लिए उदाहरण बनी

   उनका यह भी कहना है कि लोगों की बातों में न आये। लोग सदैव नकारात्मक बातें करके मनोबल गिराते हैं। अपनी बात पर अडिग रहे और कुछ पाने की जिद मन में पाले तो सफलता निश्चित है। वे कहती है कि मेरे क्षेत्र के लोगों को जब मालुम हुआ कि मैं MPPSC की तैयारी कर रही हूँ तो उनका यही कहना था- होगा ही नहीं। मैंने इसे चुनौती के रूप में लिया और आज मैं सफल हुई। लड़कियों को कु लविना यह कहना चाहती है कि खुद पर विश्वास करो और कुछ बनने की जिद के साथ पढाई करो और खुद को साबित करो।

वल्लभ डोंगरे ,"सुखवाड़ा   सतपुड़ा संस्कृति संस्थान भोपाल


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