शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018

मध्य प्रदेश में कमल के बाद सत्ता कमलनाथ के हाथ

साभार : नवभारत टाइम्स

पीटीआई | Updated Dec 14, 2018, 07:59 AM IST

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से अपना तीसरा बेटा करार दिए गए दिग्गज कांग्रेसी कमलनाथ जब दिल्ली से राहुल गांधी की मंजूरी लेकर भोपाल पहुंचे तो समर्थकों ने उनका स्वागत ‘जय जय कमलनाथ’ के नारे से किया।

हाइलाइट्स
• मोरारजी देसाई सरकार से मुकाबले में मदद करने पर इंदिरा गांधी ने कमलनाथ को बताया था अपना तीसरा बेटा
• छिंदवाड़ा में चुनाव प्रचार के दौरान जनता से अपने तीसरे बेटे को जिताने की इंदिरा ने की थी अपील
• इंदिरा गांधी को मां कहकर संबोधित करते रहे हैं कमलनाथ, परिवार से रहा है बेहद करीबी नाता

भोपाल/नई दिल्ली
मध्य प्रदेश की सत्ता से कमल हटा तो अब कमान कमलनाथ के हाथ में है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ सीएम पद के लिए चल रही रेस में बाजी कमलनाथ के हाथ लगी और अब 15 साल बाद वह सूबे के पहले कांग्रेसी मुख्यमंत्री होंगे। कभी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से अपना 'तीसरा बेटा' करार दिए गए दिग्गज कांग्रेसी कमलनाथ जब दिल्ली से राहुल गांधी की मंजूरी लेकर भोपाल पहुंचे तो समर्थकों ने उनका स्वागत ‘जय जय कमलनाथ’ के नारे से किया।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक बार उन्हें अपना तीसरा बेटा कहा था, जब उन्होंने 1979 में मोरारजी देसाई की सरकार से मुकाबले में मदद की थी। कमलनाथ का इंदिरा गांधी से कितना गहरा नाता था, इसकी तस्दीक उनका 2017 का एक ट्वीट भी करता है। इसमें उन्होंने इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें मां कहा था। कमलनाथ (72) को 39 साल बाद अब इंदिरा के पोते कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नई जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पहले राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में पार्टी द्वारा सरकार गठन के लिए जरूरी संख्याबल जुटा लिए जाने के बाद दो दिनों तक गहन माथापच्ची की। 

पंद्रह साल बाद कांग्रेस राज्य में सत्तासीन होने जा रही है। कमलनाथ के समर्थक उन्हें मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत का श्रेय देते हैं। जनता के बीच ‘मामा’ के रूप में अपनी अच्छी छवि बना चुके एवं मध्य प्रदेश में सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को चौथी बार लगातार सत्ता में आने से रोकने के लिए उन्होंने कड़ी टक्कर दी।


हालांकि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कमलनाथ का दावा चुनौतियों से भरा रहा। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कड़ी चुनौती दी। आखिरकार पार्टी अध्यक्ष को कठोर निर्णय लेना पड़ा। राहुल गांधी ने कहा कि ‘धैर्य और समय दो सबसे शक्तिशाली योद्धा’ होते हैं। इसका अर्थ कमलनाथ के लिए समय और ज्योतिरादित्य के लिए धैर्य से लगाया जा रहा है। 

राहुल के दरबार में आखिरकार अनुभव ही बदलाव की जरूरत को लेकर विजयी हुआ और कमलनाथ को मुख्यमंत्री चुना गया। इसमें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को भी ध्यान में रखा गया। सिंधिया के साथ कमलनाथ ने मध्य प्रदेश में विपक्षी कांग्रेस की किस्मत फिर से पलटने का काम शुरू किया था। राज्य में पार्टी 2003 से ही सत्ता से बाहर है। कमलनाथ का एक विडियो वायरल होने पर बीजेपी ने उन पर हमला बोला था।

जब इंदिरा ने बताया था कमलनाथ को तीसरा बेटा

छिंदवाड़ा के पत्रकार सुनील श्रीवास्तव ने इंदिरा गांधी की चुनावी सभा कवर की थी। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी छिंदवाड़ा लोकसभा सीट के प्रत्याशी कमलनाथ के लिए चुनाव प्रचार करने आई थीं। इंदिरा ने तब मतदाताओं से चुनावी सभा में कहा था कि कमलनाथ उनके तीसरे बेटे हैं। कृपया उन्हें वोट दीजिए। ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह राहुल गांधी ने कमलनाथ को इस साल 26 अप्रैल को मध्य प्रदेश का कांग्रेस अध्यक्ष बनाया।

अध्यक्ष बने तो गुटों को ले आए साथ

कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं सुरेश पचौरी जैसे प्रदेश के सभी दिग्गज नेताओं को एक साथ लाने का काम किया, जिसके चलते इस बार हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी में एकजुटता दिखी। समाज के हर तबके के लिए योजनाओं के कारण चौहान की लोकप्रियता से वाकिफ चुनाव अभियान की शुरूआत में ही कमलनाथ ने बीजेपी पर हमला शुरू कर दिया।

काम कर गया ‘वक्त है बदलाव का’ नारा
अभियान के जोर पकड़ने पर पार्टी की ओर मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए राज्य कांग्रेस ने ‘वक्त है बदलाव का’ नारा दिया। कमलनाथ के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस ने अपने चुनावी अभियान में चौहान के उन वादों पर फोकस किया जिन्हें पूरा नहीं किया जा सका। पार्टी ने चौहान को घोषणावीर बताया जिसके बाद सरकार द्वारा घोषित योजनाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

यूपी के कानपुर में हुआ था जन्म
कमलनाथ का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम महेंद्रनाथ और माता का लीला है। कमलनाथ देहरादून स्थित दून स्कूल के छात्र रहे हैं। कहा जाता है कि दून स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही वह संजय गांधी के संपर्क में आए थे और वहीं से राजनीति में एंट्री की नींव तैयार हुई थी। राजनीति में आने से पहले उन्होंने सेंट जेवियर कॉलेज कोलकाता से स्नातक किया।


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