बुधवार, 19 सितंबर 2018

वरिष्ठ पत्रकार-कवि विष्णु खरे का दिल्ली में निधन



हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि, पत्रकार और हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष विष्णु खरे (78) का निधन हो गया है. उन्हें पिछले सप्ताह ब्रेन स्ट्रोक की वजह से नई दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्हें पिछले बुधवार को ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. बता दें कि खरे मुंबई रह रहे थे, लेकिन दिल्ली हिंदी अकादमी का उपाध्यक्ष बनने के बाद वे दिल्ली में ही रह रहे थे.

*मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 9 फरवरी 1940 को जन्मे विष्णु खरे कवि के साथ ही अनुवादक, फिल्म आलोचक, पटकथा लेखक और पत्रकार भी रहे हैं.* वे मयूर विहार के हिंदुस्तान अपार्टमेंट में किराए के एक कमरे में अकेले रहते थे.

उन्होंने इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में एमए करने के बाद हिंदी पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत की. वे कुछ समय तक 'दैनिक इन्दौर' में उप संपादक रहे और बाद में उन्होंने दिल्ली, लखनऊ और जयपुर में नवभारत टाइम्स के संपादक का काम संभाला.

*सम्मान*

वे हिंदी साहित्य की प्रतिनिधि कविताओं की सबसे अलग और प्रखर आवाज थे. उन्हें हिंदी साहित्य के नाइट ऑफ द व्हाइट रोज सम्मान, हिंदी अकादमी साहित्य सम्मान, शिखर सम्मान, रघुवीर सहाय सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान से सम्मानित किया गया था.

*रचनाएं*

विष्णु खरे को हिंदी साहित्य में विश्व प्रसिद्ध रचनाओं के अनुवादक के रूप में भी याद किया जाता है. उन्होंने श्रीकांत वर्मा तथा भारतभूषण अग्रवाल के पुस्तकाकार अंग्रेजी अनुवाद. समसामयिक हिन्दी कविता के अंग्रेजी अनुवादों का निजी संग्रह 'दि पीपुल एंड दि सैल्फ'. लोठार लुत्से के साथ हिन्दी कविता के जर्मन अनुवाद 'डेअर ओक्सेनकरेन' का संपादन भी किया.
'यह चाकू समय' (आत्तिला योझेफ़), 'हम सपने देखते हैं' (मिक्लोश राद्नोती), 'काले वाला' (फ़िनी राष्ट्रकाव्य), डच उपन्यास 'अगली कहानी' (सेस नोटेबोम), 'हमला' (हरी मूलिश), 'दो नोबल पुरस्कार विजेता कवि' (चेस्वाव मिवोश, विस्वावा शिम्बोरर्स्का) आदि का उल्लेखनीय अनुवाद भी किया.
उनकी प्रमुख कृतियों में टी.एस., एलिअट का अनुवाद 'मरुप्रदेश और अन्य कविताएं (1960), 'विष्णु खरे की कविताएं' नाम से अशोक वाजपेयी द्वारा संपादित पहचान सीरीज की पहली पुस्तिका , ख़ुद अपनी आँख से (1978), सबकी आवाज़ के पर्दे में (1994), पिछला बाक़ी (1998) और काल और अवधि के दरमियान (2003)। विदेशी कविता से हिन्दी तथा हिन्दी से अंग्रेजी में सर्वाधिक अनुवाद कार्य.

विष्णु खरे की निधन की सूचना से साहित्य जगत में शोक है. विष्ण खरे हिंदी साहित्य की प्रतिनिधि कविताओं की सबसे अलग और प्रखर आवाज थे.

*विनम्र श्रद्धांजलि*

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