गुरुवार, 31 मई 2018

पाकिस्तान के बाद माता हिंगलाज का देश में एकमात्र मंदिर अंबाड़ा में



मंदिर के प्रति लोगों की आस्था इस कदर है कि नवरात्र में हर दिन दस हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं

छिंदवाड़ा। माता हिंगलाज का देश में एकमात्र मंदिर छिंदवाड़ा जिले में है। इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक है। माता रानी के प्रति लोगों की आस्था इस कदर है कि नवरात्र में हर दिन दस हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन करने और आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार में लगाई गई हर अर्जी पूरी होती है। ज्ञात हो कि मां हिंगलाज का दूसरा मंदिर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हैं, जिसके प्रति हिन्दुओं के अलावा मुस्लिमों में भी अटूट आस्था है।

भारत में प्राचीन हिंगलाज मंदिर छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर उमरेठ थाना क्षेत्र के अम्बाड़ा में है। क्षेत्र के बुजुर्ग बातते हैं कि हिंगलाज भवानी का एक मंदिर देश में है और दूसरा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में है, जहां हिन्दुओं के अलावा मुस्लिम परिवार भी दर्शन करने पहुंचते हैं।

श्रद्धालुओं की लगती कतार
हिन्दू नव वर्ष और चैत्र व कुवार नवरात्र के दौरान मां हिंगलाज के दर्शन करने अम्बाड़ा में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। महिलाओं और पुरुषों की लम्बी कतार दर्शन करने के लिए लगती है। जानकारी के अनुसार 10 हजार से अधिक श्रद्धालु हर दिन माता हिंगलाज का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।

बेहतर व्यवस्थाएं
मंदिर परिसर में जहां सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात रहने के साथ सीसीटीवी लगे हैं। वहीं परिसर में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूला-चकरी व अन्य खिलौने हैं। परिसर में ही पेजलय की बेहतर व्यवस्था है। प्रवेश द्वार पर करीब एक फीट गहरा और तीन फीट लम्बा व 15 फीट से अधिक चौड़ा सीमेंटेड गड्ढा बनाया गया, जिसमें अनवरत पानी बहता है, उसमें ही श्रद्धालुओं के पैर धुल जाते हैं और फिर वे मंदिर में प्रवेश कर पूजा-अर्चना करते हैं।

गूंजते माता के गीत
नव वर्ष और नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर संगीतमय भजन गूंजते रहते हैं। यहां धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं, जिनमें प्रसिद्ध कलाकारों ने देवी भजनों, गीतों की प्रस्तुति देते हैं। भजन मंडलिया जगराता करती हैं। मंदिर परिसर वृहद व व्यवस्थित होने के कारण कई श्रद्धालु परिवार के साथ पिकनिक मनाते नजर आते हैं।

नवरात्र में लगता मेला
यहां चैत्र और कुवार नवरात्र महोत्सव के दौरान मंदिर में करीब एक हजार से अधिक ज्योति कलश स्थापित किए जाते हैं। नौ दिनों तक भक्तों का माता के दर्शन करने तांता लगा रहता है। मंदिर के समीप ही ग्रामीणों की आवाजाही को देखते हुए घरेलू सामग्री व मनोरंजन की दुकानें लगती हैं।

मंदिर की खासियत
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि राजस्थान के काठियावाड़ इलाके में हिंगलाज देवी की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। हिंगलाज माता को काठियावाड़ के राजा की कुलदेवी माना जा था। प्राचीन काल में राजा के वंशजों को जीविकोपार्जन के लिए छिंदवाड़ा आना पड़ा था। तब वे अपने साथ हिंगलाज माता की प्रतिमा भी ले आए और छिंदवाड़ा में एक कोल माइन के पास इसे स्थापित किया गया। तभी से यहां हिंगलाजा देवी पूजी जाने लगीं।

नहीं हटी थी मूर्ति
बुजुर्ग बताते हैं कि 110 वर्ष पूर्व 1907 में कोलमाइन के अंग्रेज मालिक ने अपने कर्मचारियों को मूर्ती हटाने का काम सौंपा था, लेकिन मजदूरों की तमाम कोशिशों के बावजूद  मूर्ती हिली तक नहीं थी और जब मालिक घर जाकर सो गया। उसे सपने में हिंगलाज माता आई और मूर्ती न हटाने की चेतावनी दी थी। अगली सुबह अंग्रेज ने यह बात मजदूरों को बताई और फिर से मूर्ती हटाने के आदेश दे कर पत्नी के साथ खदान में अंदर घूमने चला गया। इधर, मजदूर मूर्ती हटाने का प्रयास करने लगे और दूसरी ओर जैसे ही अंग्रेज खदान के अंदर गया, खदान में पत्थर धंसका और अंग्रेज खदान में जिंदा दफन हो गया। कहा जाता है कि उस रात वहां तेज विस्फोट हुआ और आग की लपटें निकलीं।

हिंगलाज माता की मूर्ती अपने आप उठकर जंगलों में आकर विराजमान हो गई। कुछ समय बाद लोगों को जंगलों में इमली के पेड़ के नीचे हिंगलाज माता की मूर्ती मिली और फिर यहां उनका मंदिर बनाया गया। अब यह मंदिर छिंदवाड़ा जिले के गुड़ी-अम्बाड़ा के पास स्थित है।

पड़ोसी मुल्क की मां हिंगलाज माता की ख्याति

मां हिंगलाज का दूसरा मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान राज्य में स्थित है। जहां पास में ही हिंगला नदी प्रवाहित होती है। माता का यह मंदिर हिंगलाज देवी शक्तिपीठ के नाम से ख्यात है। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के चक्र से कटकर यहां पर देवी सती का सिर गिरा था। इसलिए यह स्थान चमत्कारी और दिव्य माना जाता है। पाकिस्तान में मुस्लिम देवी हिंगलाज मंदिर को नानी का हज भी कहते हैं। इस स्थान पर पहुंचकर हिंदू और मुसलमान का भेद भाव मिट जाता है। दोनों ही श्रद्धापूर्वक माता की पूजा करते हैं।

हिंगलाज देवी के विषय में ब्रह्मवैवर्त पुराण में जिक्र है कि जो एक बार माता हिंगलाज के दर्शन कर लेता है उसे पूर्वजन्म के कर्मों का दंड नहीं भुगतना पड़ता है। मान्यता है कि परशुराम जी द्वारा 21 बार क्षत्रियों का अंत किए जाने पर बचे हुए क्षत्रियों ने माता हिंगलाज से प्राण रक्षा की प्रार्थना की। माता ने क्षत्रियों को ब्रह्मक्षत्रिय बना दिया, इससे परशुराम से उन्हें अभय दान मिल गया था।

एक मान्यता यह भी है कि रावण के वध के बाद भगवान राम को ब्रह्म हत्या का पाप लगा। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने भी हिंगलाज माता मंदिर की यात्रा की थी। राम ने यहां पर एक यज्ञ भी करवाया था। बलूचिस्तान में माता हिंगलाज माता वैष्णों की तरह एक गुफा में बैठी हैं। अंदर का नजारा देखेंगे तो आप भी कहेंगे अरे हम तो वैष्णो देवी आ गए, यह अहसास ही नहीं होगी इस्लाम देश पाकिस्तान में हैं।

साभार : पत्रिका डॉट कॉम छिंदवाड़ा


कोई टिप्पणी नहीं: