गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

मिलिए 'मजनूं का टीला' वाले जगमोहन साहनी से



मन की बात
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मैं जगमोहन साहनी उम्र 59
वजन 37 और 42 के आस पास
कद 5 फुट से कम
मैं 15 अगस्त 1957 को पूना में पैदा हुआ

पैदा होते ही मुझ पर पहला अटैक डबल निमोनिये नामक बीमारी ने किया जिसमे डॉक्टर्स ने मेरे पिता जी को जवाब दे दिया कि यह बच नहीं पायेगा पिता जी मिलट्री में मैकेनिक थे सो वह मुझे मिलट्री हॉस्पिटल ले गए ! वहाँ के डॉक्टरों ने बताया कि हम इसे बचा तो लेंगे पर इसका शारिरिक विकास नही हो पायेगा माता पिता ने कहा कोई बात नहीं आप इसे ठीक कर दीजिए तो मुझे उन्होंने पेंसलिन के इंजेक्शन लगाए जो कि बहुत गर्म होते है इन इंजेक्शनों के कारण मेरे शरीर का विकास रुक गया ! फिर हम पूना से बरेली आ गए और फिर दिल्ली के मजनूं का टीला जहाँ पिता जी ने 500 ₹ में एक झोपड़ी खरीदी !
पहली कक्षा से लेकर 8वी कक्षा तक ज़िन्दगी सही चल रही थी क्योंकि मजनूं टीले का स्कूल सिर्फ 8वी तक ही था परंतु जब नोंवी कक्षा में हमने लखनऊ रोड जो कि दिल्ली विश्वविद्यालय के पास है वहाँ दाखिला लिया तब मुझे एहसास हुआ कि मुझमें कुछ कमियां है क्योंकि 75% लोग मुझपे हँसते थे और मेरे कमजोर शरीर और छोटे कद का बहुत मजाक उड़ाते थे दुनियां की इस हीन भावना को देखते हुए मैं रातों को बहुत रोया करता था
दुनियां की खिल्ली उड़ाने की वजय से मैं शादी ब्याह में भी नहीं जाता था
धीरे धीरे मुझे यह सहने की आदत पड़ गई अब दुनिया की परवाह तो नही थी परंतु जब कोई अपना रिश्तेदार या दोस्त मुझ पर मेरे शरीर को लेकर कुछ कहता तो बहुत ही आत्मग्लानि होती थी

9 मई1982 को मेरी शादी परमजीत कौर जी से हुई मेरी ज़िंदगी मे इनकी एंट्री लक्की रही और मैंने एक फैसला लिया कि जो दुनियां मुझे देख कर हँसती है उसे क्यूँ न अपने हुनर से हसाया जाय इसलिए मैंने मजनूं टीला में होने वाली रामलीला में बतौर कॉमेडियन का रोल करने की ठान ली और अपने कॉमेडियन उस्ताद लल्ला की देख रेख में कॉमेडी की बरीकिया सीखने लगा  रामलीला में एंट्री मंत्री के रोल से शुरु की धीरे-धीरे धीरे एक कॉमेडियन के रूप में अपने आप को ढाल लिया

लल्ला उस्ताद की डेथ के बाद के मैंने अपना एक कॉमेडी ग्रुप बनाया जिसका नाम था मिज़िया कॉमेडी ग्रुप ! हम सप्रू हाउस में पंजाबी नाटक देखते और वही से कुछ सीख कर रामलीला में पेश कर देते हैं

धीरे धीरे से छोटे से मजनू टीले  में सात रामलीला होने लगी और सभी रामलीला में मैं कॉमेडी दिखाने लगा
आलम यह रहा की आस पास की जगह से भी लोग मुझे देखने के लिए आते थे जब भी रामलीला से बोर होकर पब्लिक अपने घर जाने लगती थी तो माइक में अलाउंस किया जाता था अब आपके सामने जगमोहन साहनी जी आ रहे हैं पब्लिक वहीं बैठ जाती थी रात को रामलीला करते-करते बारह एक बज जाते थे ! उस समय हमारे कॉमेडी ग्रुप की मजनू टीला में वह हैसियत थी जो आजकल अमिताभ बच्चन की पूरे वर्ल्ड में है लोग  हमसे हाथ मिलाने को आतुर रहते थे

इसके बाद हम ने कहा क्यों न अपने आप को और मशहूर किया जाए तो हमने रेडियो पर फरमाइश भेजनी शुरू कर दी रोज के 35 से 40 पोस्टकार्ड आकाशवाणी को जाते थे वह भी भारत की विभिन्न आकाशवाणीयों में उसके अलावा चाइना श्रीलंका में भी हम फरमाइश भेजते थे ! मेरे पेन फ्रेंड इतने थे कि रोज कि मुझे 20 से 25 चिठ्ठीयां आती थी अभी भी वह खत मैंने संभाल कर रखे हुए हैं

एक चिट्ठी में तो एड्रेस ऐसे लिखा था
मिले जगमोहन साहनी जी को (रेडियो स्टार)
मजनूं का टीला (उत्तर प्रदेश )
(प्रिये पोस्टमैन साहब आप इनको जरूर जानते होंगें)

और ज्यादातर खतों में यह लिखा होता तो
जगमोहन साहनी मजनूं का टीला दिल्ली
वह भी खत मुझे मिल जाता था
यहां मैं एक खत का और जिक्र करना चाहता हूं जिसमें यह लिखा था

प्रिय जगमोहन साहनी और पम्मी साहनी
नमस्कार
सालो तुम्हें और कोई काम नही है जब देखो रेडियो  और अखबारों में अपना नाम भेजते रहते हो
यह पढ़कर मैं बहुत हंसा

मैंने पहली बार रेडियो में अपना नाम  पाकीजा फिल्म के गीत  "चलते चलते यूंही कोई मिल गया था" सुना था कार्यक्रम का नाम था संगम जो की विविध भारती के विज्ञापन प्रसारण सेवा से आता था शायद आपने भी मेरा नाम सुना हो मजनूं का टीला से जगमोहन साहनी पम्मी साहनी शंटू और शैली बावा

मेरे तीन बच्चे है दो लड़कियां जो मुझे जान से भी प्यारी है और एक लड़का जो कि श्रवण कुमार  की भूमिका बखूबी निभा रहा है मैं सबकी शादी कर चुका हूं हमारी प्यारी बहु ने हमारी लडकियों की कमी को पूर कर दिया बहुत ही आज्ञाकारी है !

और अब बारी फेसबुक की फेसबुक ने मेरे तमाम गम भुला दिये फेसबुक ने मुझे ऐसे प्यारे प्यारे दोस्त दिए हैं जिनका प्यार पाकर मैं गदगद हो गया मैं आज भी  अपनी रिश्तेदारी से ज्यादा अहमियत अपने दोस्तों को देता हूं जितना प्यार और सम्मान मुझे फेसबुक के जरिए मिला है वह शायद मुझे कहीं से नहीं मिला हूं बस आख़िर में एक बात ही कहना चाहूंगा कृपया उस व्यक्ति का मज़ाक ना उड़ाए जिसके शरीर मे कमियां हैं आप चार आदमी एक बंदे को देख कर हसते हैं तो आप तो चारों खुश हो जाते हैं लेकिन जिस पर आप हंसते हैं उसके दिल पर क्या बीतती है यह मेरे से बेहतर कोई नहीं जानता तो मेरी आप सब से रिक्वेस्ट है कभी भी किसी मजबूर आदमी पर ना हँसे

साभार फेसबुक पोस्ट
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=770526523106739&id=100004481941673

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