रविवार, 5 नवंबर 2017

मेडिकल प्रोफेशन में लूट तंत्र : मौत के सौदागर क्यों बन गए डॉक्टर

गौरव अरोरा

गौरव ने आज ये सोचा.......

# मेडिकल प्रोफेशन में लूट तंत्र #

कल फिर एक मरीज की अनावश्यक सर्जरी, हॉस्पिटल में लूट और मृत्यु पश्चात भी आर्थिक लाभ के लिए वेंटीलेटर पर रख बिल बढ़ाने के खेल की खबर मिली।

सवाल ये के क्यों जिंदगी के रखवाले डॉक्टर अब मौत के सौदागर बनते जा रहे है।

तो गौरव बीरबल अरोरा से जवाब भी लो-

वास्तव में आज के समय में जिस तरह हर प्रोफेशन में बेईमानी मक्कारी झूठ फरेब ठगी का बोलबाला है ....... ठीक उसी तरह मेडिकल प्रोफेशन में भी यह लूटपाट, फरेब और गलत चीज अंदर तक घुस चुकी है जो क्षुब्ध और निराश करती है  ।

जिस तरह हमारे आस पास बहुत कम ही लोग समाज में ईमानदार बचे हैं, ठीक उसी तरह बहुत कम लोग मेडिकल प्रोफेशन में भी ईमानदार बचे हैं ।

मेडिकल प्रोफेशन में मरीज एवं उसके परिजन अर्थात "ग्राहक" कि अज्ञानता का लाभ ग्रुप या सिंडिकेट बनाकर बेईमान डॉक्टर, पैथोलॉजी लैब और दवा कंपनियां उठाती हैं, इनकी सामूहिक लूट को बल मिलता है जान और बीमारी का डर बताकर..... उसके बाद भय एवं डर से अनवरत लूट-खसोट चलती है ।

मेडिकल प्रोफेशन भी हमारे समाज का ही एक हिस्सा है। डॉक्टर्स आकाश से नहीं टपकते बल्कि हमारे और आपके घरों के बच्चे ही डॉक्टर बनते हैं ।

हम व्यापार में बेईमानी करते हैं, टैक्स चोरी करते है,  सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी अपने कर्तव्यों में लापरवाही एवं रिश्वतखोरी करते हैं, प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी टीए-डीए आदि में बेईमानी करते हैं, जिसको जब मौका मिलता है तब वो हेराफेरी-छल-चोरी करता है। नियम तोड़ना शान मानी जाती है, नियमपालन मूर्ख व दब्बूपन का घोतक है।

ईमानदारी अन्ना हज़ारे का शग़ल है। देशप्रेम फैशन है जो सिर्फ नारे लगाने और 15 अगस्त-26 जनवरी की कहानी है। यह बेईमानी, पाखंड, छल, द्वैत व्यवहार हमारे बच्चे देखते हैं और जब यही बच्चे मेडिकल प्रोफेशन में जाते हैं तो यह बेईमानी के संस्कार मेडिकल प्रोफेशन में भी पुष्पित-पल्लवित होते हैं। इसलिए नेता भी भ्रष्ट हैं, डॉक्टर भी और अधिकारी कर्मचारी व्यापारी भी।

हम ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठता, नैतिकता, दया, करुणा आदि दूसरों में देखना चाहते है, लेकिन हम स्वयं अपनी सुविधा चाहते है, नियमो को तोड़-मरोड़ कर अपने हिसाब से चलाना चाहते है।

हम खुद नियम पालन करें, अपने बच्चों को नैतिकता न सिर्फ सिखाएं बल्कि अपने व्यवहार और आचरण से उन्हें उदाहरण भी प्रस्तुत करे, छोटी-छोटी चीजो से शुरू करे जैसे हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना, ट्रैफिक सिग्नल्स को फॉलो करना, सही पार्किंग में सलीके से गाड़ी खड़ी करना, दैनिक जीवन मे झूट न बोलना, मोबाइल पर बहुत व्यापक रूप से बोले जाने वाले झूठ को त्यागना (जैसे घर पर होकर बोलना के अभी बाहर हैं आदि)
लेकिन ये याद रहे कि ये पेड़ लगाने जैसा है-आज का सत्य नैतिक आचरण आज ही फल नही देगा बल्कि इसमे सालों लगेंगे। धैर्य चाहिए इसमे।

बस यही कहानी है......

साभार - गौरव अरोरा के फेसबुक वॉल से

©® लेखक गौरव अरोरा छिंदवाड़ा शहर के जाने माने बिजनेसमैन है। आप सामाजिक गतिविधियां में भी सक्रिय रहते हैं।


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