शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

सती प्रथा : समाज ने स्त्रियों पर जबरन थोपी कुप्रथा

जब इब्नबतूता मप्र के धार में बेहोश हुआ----

फ़िल्म पद्मावती के लिए मच रहे बवाल से मुझे याद आया। मैंने कॉलेज लाइफ में  एक लाइब्रेरी से निकाली किताब में अफ्रीकी मोररको यात्री इब्नबतूता के बारे में पढ़ा था ।कुछ रोचक या दिमाग को झकझोरने वाली बातें दिमाग मे रह जाती है उस इतिहास लेखक ने विदेशी यात्रियों से सम्बंधित इस क़िताब में लिखा था कि इब्नबतूताने भारत यात्रा के दौरान अपनी किताब में सती प्रथा का वर्णन किया है।उसने राजस्थान की यात्रा के समय साथ ही  मध्यप्रदेश के कुछ जिलों जिसमे धार छतरपुर जिलों की यात्रा का वर्णन  किया है।

    अपनी युवावस्था के आरंभिक काल मे इब्नबतूता ने मध्यप्रदेश के धार जिले में जब सती प्रथा को पहली बार अपनी आंखों के सामने देखा कि किस तरह वो महिला जो  सती  होने वाली है वह एक हाथ मे नारियल और एक हाथ में दर्पण पकड़कर  घोड़े पर सवार होकर सती स्थल की ओर बढ़ रही है चारों तरफ ढोल नगाड़ों का बहुत ज्यादा शोर है  वो पूर्ण श्रृंगार में एक हाथ मे थामे दर्पण में अपने रूप को देखते हुए आगे बढ़ रही है सती स्थल के चारों के ओर दस बारह लोग जलती हुई पतली लकड़ी थामे खड़े है उसे आग में झोंकने से पहले उसके शरीर पर कम्बल जैसा मोटा कपड़ा ओढ़ाया गया है।

इब्नबतूता ने वर्णन किया है उस समय वो स्त्री चीखे तो भी उसकी आवाज़ ढोल नगाड़ों शहनाई की आवाज़ में दब जाती है ।

इब्नबतूता ने जब यह दृश्य देखा तो इतना घबरा गया था कि बेहोश होकर गिर पड़ा। उसके मित्र ने उसके चेहरे पर पानी डालकर उसे उठाया था।

इब्नबतूता ने उस वक्त सतीप्रथा के द्वारा यहां के क्रूर  कठोर मानसिकता की आलोचना की है।

मित्रो थोड़ा इस बात पर गौर कीजिए यहां के मुग़ल बादशाह इतने ताकतवर रहे है फिर उन्होंने इस कुप्रथा को रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए सदियों ये प्रथा यहां कायम रही आश्चर्य है!

इसके पीछे ये तर्क मिलता है एक औरत किसी की कुदृष्टि का शिकार न होने पाए इसलिए सतीप्रथा की शुरुआत हुई है।

यहां पर ये तर्क सामने आए कि औरत खुद जाकर सती हो गयी और इस सती होने की क्रिया में उसने व्यवस्था भी ख़ुद की है तो ये मान लिया जाए वो अपने पति से बहुत प्रेम करती थी इसलिए उसने ऐसा किया ये उसकी अपनी मानसिकता है।

लेकिन इस सती प्रक्रिया की तैयारी उस काल में पुरुष वर्ग कर रहा है तो निंदनीय है

क्या उस समय वो इतना कमजोर था कि एक औरत की रक्षा नहीं कर सकता था?

उसके पास एक औरत पर अत्याचार करने के लिए भीड़ जुटाने के लिए ताकत है वहाँ वो कमज़ोर नहीं है आश्चर्य?
यहां मैं तारीफ करूँगी कट्टर कहे जाने वाले मुग़ल बादशाह औरंगजेब की जिसने पहली बार ये कदम उठाया कि सती प्रथा बन्द हो। अगर उस समय मीडिया सशक्त होता तो इस दिशा मे औरंगजेब कामयाब हो जाता ये निश्चित था लेकिन मुग़ल बादशाहों में वो अकेला बादशाह है,
जिसने ये कदम उठाया बहुत बाद  में  राजा राममोहन राय  ने इस दिशा में जो सराहनीय कार्य किया वो प्रशंसनीय है।

अब आगामी फिल्म पद्मावती में संजय लीला भंसाली जी क्या कहने जा रहे है किस उद्देश्य को लेकर उन्होंने फ़िल्म बनाई है ये उसे देखने के बाद ही पता चलेगा।सुनी सुनाई बाते जो आधी झूठ होती है उस पर पहले से कैसे अपनी प्रतिक्रिया दे दे?

साभार फेसबुक : https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1183941068404847&id=100003668967648

गीतांजलि गीत 18-11-2017


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