रविवार, 12 नवंबर 2017

आकाशवाणी छिंदवाड़ा : एनाउंसर गीतांजलि गीत के संस्मरण

फैन तो फैन होते है चाहे वो पुराने हो या नए। रामकृष्णा जी एक श्रोता के रूप में आप उत्कृष्ट श्रोता रहे है। आपके पोस्टकार्ड की लिखावट आज भी मुझे याद है। ओपी जी भी पत्र लिखते थे और उनसे फोन इन कार्यक्रम में भी मेरी बातचीत हुई है। मेरे लिए ये सुखद है कि आज मीडिया के क्षेत्र में आप दोनों सफल है। ओपी जी को तो मैंने उनकी आवाज़ को और तराशने की सलाह दी है क्योंकि कुदरत ने उन्हें भी अच्छी आवाज़ दी है। आप दोनों को असीम शुभकामनाएं।
कवयित्री गीतांजलि गीत जी के साथ ओपी पवार
रामकृष्णा जी,

आपकी बात से मुझे और किस्से याद आ गए, जिसमें से दो किस्से मैं साझा करूँगी। पहला किस्सा लगभग 10 साल पुराना है। आपके एरिया  में किसान वाणी कंपेयर नरेन्द्र शक्रवार जी रिकॉर्डिंग के लिए गए थे। उन्हें लौटते समय बस में एक नेत्रहीन व्यक्ति उमरानाला के पास मिला। वे यात्रियों को गाने सुनाकर भीख मांगकर अपना जीवन यापन किया करते थे। वो रेडियो सुना करते थे। तब उसने नरेंद्र भाई से मेरे बारे में पूछताछ शुरू कर दी और ये बताया कि वो मेरा बहुत ज़्यादा फेन है।

नरेंद्र भाई मुझे किस्सा सुनाते हुए बोलते है  अच्छा हुआ बहना उन्हें मैंने आपके घर का पता नहीं बताया। नहीें तो वे लाठी टेकते हुए आपके घर पहुंच जाते। आपके घर वाले परेशान हो जाते।

एक और किस्सा है जिसे शासकीय शिक्षा विभाग की प्राइमरी स्कूल की प्रधान पाठिका श्रीमती रजनी साहू ने मुझसे शेयर किया। वो अपने किसी परिचिता से मिलने हॉस्पिटल गयी थी। उनकी परिचिता ने एक शिशु को बेटे के रूप में जन्म दिया था। वही सामने एक बेटी को जन्म देने वाली मां का भी पलँग था। उस बेटी के पापा उस बच्ची को गोद मे खिला रहे थे और उसे गीतांजलि  नाम से संबोधित कर रहे थे। तब आवाज़ सुनकर रजनी जी ने कहा अरे वाह आपने इसका नामकरण भी कर दिया तब उन्होंने कहा मैंने इसका पूरा नाम गीतांजलि गीत रखा है। और मैं रेडियो पर बोलने वाली गीतांजलि गीत जी का बहुत बड़ा फैन हूँ। इसलिए इसका नाम भी  यही रखा है।

रजनी जी ने पूछा- क्या आप कभी उनसे मिले हो। उन्होंने कहा-नही मैं उनसे कभी नही मिला हूँ। जब रजनी जी ने मुझसे मिलकर ये किस्सा सुनाया, तब खुद की अहमियत समझ आई  और यही कारण है कि अनजान चेहरों के प्यार स्नेह ने ही मेरी स्क्रिप्ट लेखन को आत्मीयता का रंग दिया।

आप लोग तो प्रत्यक्ष रूप से लिखकर अपनी भावनाएं प्रकट कर लेते थे लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से जिन श्रोताओ का स्नेह साथ रहा और साथ है वो भी यादगर पल है जो सदा साथ रहेंगे।

फैन तो फैन होते है चाहे वो पुराने हो या नए। रामकृष्णा जी एक श्रोता के रूप में आप उत्कृष्ट श्रोता रहे है। आपके पोस्टकार्ड की लिखावट आज भी मुझे याद है। ओपी जी भी पत्र लिखते थे और उनसे फोन इन कार्यक्रम में भी मेरी बातचीत हुई है। मेरे लिए ये सुखद है कि आज मीडिया के क्षेत्र में आप दोनों सफल है। ओपी जी को तो मैंने उनकी आवाज़ को और तराशने की सलाह दी है क्योंकि कुदरत ने उन्हें भी अच्छी आवाज़ दी है। आप दोनों को असीम शुभकामनाएं।


ओपी पवार की फेसबुक पोस्ट 
उस दौर में जब मल्टीमीडिया जैसे साधन नहीं थे... तब रेडियो की आवाज ही मनोरंजन और सूचना का माध्यम हुआ करती थी.... और उसमें भी ऐसी मधुर आवाजें जिनका रोज इंतज़ार रहता था... ऐसी ही एक फ़नकार Geetanjali Geet मैम... आकाशवाणी केंद्र #छिंदवाड़ा से आज भी आपकी आवाज किसी पहचान की मोहताज नहीं है....बचपन में रेडियो कार्यक्रमों के लिए मैं चिट्ठियां लिखा करता था... कई बार तो कौन पढ़ेगा ये भी लिखकर भेजता था ... जिसमें #गीतांजलि #मैम का नाम पहले होता था... इस बार घर आया तो संयोगवश हुई ये मुलाकात हमेशा यादगार रहेगी... आपके अनुभव का पिटारा काफी बड़ा है... मार्गदर्शन और स्नेह हमेशा मिलता रहे.

नोट- 11 नवंबर 2017 को भाई ओमप्रकाश पवार के फेसबुक पोस्ट और उस कमेंट पर आधारित लेख। गीतांजलि गीत जी जानी मानी कवयित्री भी है। लेकिन उनकी पहचान आकाशवाणी छिंदवाड़ा की मशहूर एनाउंसर यानी आरजे से सबसे ज्यादा है। उनकी आवाज के जादू को शब्दों में बयां कर पाना मुमकिन नहीं है।  

2 टिप्‍पणियां:

Omprakash Pawar ने कहा…

बहुत सुंदर भैया आप रिश्ते जताते नहीं निभाते हैं और यही आपकी खासियत भी है... निश्चित ही आपका जिस तरह से आकाशवाणी परिवार से जुड़ाव रहा है वह किसी से छिपा नहीं है... लेकिन ये सच है कि मेरा भी आत्मीय जुड़ाव रहा है आकाशवाणी परिवार से ... इन सब में आज हम सब एक दूसरे से जुड़े ये ज्यादा महत्वपूर्ण है... ये सिलसिला आगे भी जारी रहेगा.. धन्यवाद 😊😊

Chhindwara chhavi ने कहा…

सही कहा ओपी