मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

गौतमी ने किया कमाल, महज 18 साल में बनीं लीडिंग ऑथर



अपने चाचा डॉ. दीपक आचार्य के साथ गौतमी।
छिंदवाड़ा . अभी तक आमतौर पर पीएचडी शोधार्थी द्वारा ही शोधपत्र पढऩा देखने और सुनने में आया होगा, लेकिन छिंदवाड़ा की एक छात्रा ने बगैर पीएचडी शोधार्थी के ऐसा किया है। वह भी उस छात्रा ने अपना शोधपत्र किसी आम साइंस सेमिनार में नहीं बल्कि गुजरात साइंस कांग्रेस में पढ़कर पूरे जिले को गौरवान्वित किया है।
हम बात कर रहे हैं छिंदवाड़ा में पली-बढ़ी गौतमी आचार्य की। बीते वर्ष गौतमी ने विद्या भूमि पब्लिक स्कूल से बायोलॉजी विषय में हायर सेकंडरी प्रथम श्रेणी में पास किया और वर्तमान में गुजरात के अहमदाबाद में लाइफ साइंसेस विषय के साथ अहमदाबाद यूनिवर्सिटी से इंटीग्रेटेड एमएससी का कोर्स कर रही हैं। इस समय वे दूसरे सेमेस्टर में हैं।
पूरी तरह से रिसर्च से जुड़े इस पाठ्यक्रम में गौतमी का चयन राष्ट्रीय चयन प्रतिस्पर्धा से हुआ है। महज 18 वर्ष की आयु में इतने बड़े विज्ञान महोत्सव में गौतमी को वक्तव्य और अपने विषय इरिटेबल बाउल सिंड्रोम पर जानकारी देने का मौका मिला जो समस्त छिंदवाड़ा वासियों के लिए हर्ष और गौरव का विषय है। चार और पांच फरवरी को पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी, गांधीनगर में आयोजित इस कांग्रेस के दौरान प्रकाशित जर्नल में गौतमी के रिसर्च पेपर को भी स्थान दिया गया है। जिसमें वे लीडिंग ऑथर हैं। सामान्यत: इस तरह के शोध प्रकाशन के लिए पीएचडी शोधार्थी होना जरूरी होता है लेकिन गौतमी के शोधकार्य को चयनित किया जाना बड़ी उपलब्धि है।

जिले को नई पहचान दिलाना है उद्देश्य
गौतमी के पिता विजय आचार्य छिंदवाड़ा जिले में शिक्षा विभाग से सम्बद्ध हैं और माता अनामिका आचार्य गृहिणी हैं। गौतमी वैज्ञानिक बनना चाहती है और अपना प्रेरणा स्रोत अपने चाचा डॉ. दीपक आचार्य को मानती हैं और उनके पदचिह्नों पर चलते हुए जिले को नई पहचान दिलाना चाहती है।

कुकिंग की शौकीन गौतमी
गौतमी को गाने सुनना, टीवी पर कुकिंग शो देखना, फैमिली के साथ ट्रेवल और दोस्तों के साथ गपशप करना बहुत पसंद है। ज्यादातर वक्तअपने लैपटॉप पर पढ़ाई लिखाई करते हुए गुजारती है।

2017-02-07, पत्रिका डॉट कॉम

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