गुरुवार, 19 मई 2016

जिद, जज्बा और जुनून से जीती अवध ने आईएएस की जंग

  • यूपीएससी में 657 वीं रैंक लाने वाले बिछुआ के अवध किशोर पवार से साक्षात्कार
  • आठवीं में जिले में टॉप, दसवीं में 85 फीसदी और 12 वीं 82 फीसदी अंक थे मिले
  • शिक्षक पिता शांतिराम पवार और टीचर अब्दुल फरीद खान रहे बड़े मार्गदर्शक
  • भैया डीएसपी कमलेश पवार और तहसीलदार मामा राजेंद्र पवार से मिली प्रेरणा
अवध किशोर पवार, यूपीएससी में 657वीं रैंक
जिद, जज्बा और जुनून अगर किसी शख्स की कार्यशैली में शामिल हो तो बड़े से बड़ा काम भी आसानी से हो जाता है। छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ निवासी युवक अवध किशोर पवार की कहानी कुछ ऐसी ही है। उनके करीबियों में कोई तहसीलदार है, कोई डीएसपी। उन्होंने भी जिद ठान ली कि मुझे हर कीमत पर आईएएस की परीक्षा पास करना है। कई परीक्षाओं में फेल होने के बावजूद उनके जुनून में कमी नहीं आई। आखिरकार उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा में 657 वीं रैंक हासिल कर ली।
बिछुआ में शिक्षक शांतिराम (बिसेन) पवार के बेटे अवध ने बताया कि उन्होंने आठवीं क्लास में जिले में टॉप किया था। दसवीं तक की पढ़ाई गांव में करने के बाद वे साल 2005 में जिला मुख्यालय स्थित उत्कृष्ट स्कूल में बारहवीं की पढ़ाई करने आ गए। उन्होंने दसवीं में 85 फीसदी और बारहवीं में 82 फीसदी अंक हासिल किए थे। इसके बाद उन्होंने भोपाल के एलएनसीटी कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

पिता के मार्गदर्शन से मिला हौसला

अवध किशोर फिलहाल एसएसबी में असिस्टेंट कमांडेट के पद पर तैनात है। उन्हें पांचवें प्रयास में यूपीएससी में कामयाबी मिली है। ग्रामीण परिवेश और शिक्षक पिता के मार्गदर्शन में अवध को हमेशा कुछ नया करने का हौसला मिलता रहा। सिविल सेवा की तैयारी के बारे में पूछे जाने पर अवध ने बताया कि दिल्ली में कोचिंग और सेल्फ पिपरेशन के साथ मैंने चार बार परीक्षा दी। साल 2012 में इसका पहला इंटरव्यू दिया और एसएसबी में असिस्टेंट कमांडेंट चुने गए। इस साल मैंने पांचवीं बार यूपीएससी का इंटरव्यू दिया।

खान सर ने मजबूत किया बेस

अवध का मानना है कि उनकी कामयाबी में उनके स्कूल टीचर अब्दुल फरीद खान का बहुत बड़ा हाथ है। उन्होंने मैथ्स में काफी स्ट्रांग बनाया। खान सर सिर्फ पढ़ाते नहीं थे बल्कि छात्रों की कमजारियों को पहचान कर उसके अनुरूप ट्रेनिंग देते थे। वे क्लास के सबसे कमजोर छात्र को भी अपने मार्गदर्शन में अच्छा स्टूडेंट बना देते थे। उनके बचपन के दोस्त सचिन ठाकरे कहते हैं कि अवध काफी गंभीर और शांतिप्रिय स्वभाव वाले है। उन्होंने आठवीं क्लास में जिले में टॉप किया था। यूपीएससी में चुने जाने पर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है।

असफलता से कभी कमजोर नहीं पड़े

अपनी असफलताओं से हर बार नया सबक लेकर अवध नए जोश और जुनून के साथ तैयारी में जुट जाते थे। उन्होंने कहा कि यह बताने में कोई झिझक नहीं होता है कि मुझे 40 से ज्यादा परीक्षाओं में हार का सामना भी करना पड़ा। इसमें बैंक, गर्वमेंट इंजीनियरिंग एक्जाम, कैट, एआई ट्रिपल ई और आईटीटी और नवोदय स्कूल जैसी परीक्षाएं शामिल थी। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी और यूपीएससी जैसी बड़ी परीक्षा में कामयाबी हासिल की। वे बताते हैं कि उनके भैया डीएसपी कमलेश पवार और मामा जी तहसीलदार राजेंद्र पवार से उन्हें सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा मिली। परिवार के लोगों से प्रोत्साहन और मार्गदर्शन मिलने के बाद वे लगातार परीक्षा की तैयारी में जुटे रहे। अवध किशोर का मानना है कि शिक्षक पिता शांतिराम पवार और उनकी मम्मी की ओर से भी उन्हें पूरा सपोर्ट मिला।
सिविल सेवा जैसे एग्जाम से घबराने की जरूरत नहीं है। जिंदगी में बिना रिस्क लिए कोई बड़ा लक्ष्य पाना मुश्किल है। लगन और सही दिशा में प्रयास करने से सब कुछ पाया जा सकता है।  - अवध किशोर पवार
सिविल सेवा जैसे एग्जाम से घबराएं नहीं

अवध ऐसे समाज से आते हैं जहां ज्यादातर परिवारों में खेती-किसानी ही आय का मुख्य जरिया है। एजुकेशन का माहौल उतना नहीं होता कि यूपीएससी जैसी परीक्षा में सलेक्ट का होने का सपना देख सके। मगर अवध जैसे युवा उस मिथक को भी तोड़ रहे हैं। समाज के युवाओं के लिए मिसाल बने अवध का कहना है कि सिविल सेवा जैसे एग्जाम से घबराने की जरूरत नहीं है। जिंदगी में बिना रिस्क लिए कोई बड़ा लक्ष्य पाना मुश्किल है। लगन और सही दिशा में प्रयास करने से सब कुछ पाया जा सकता है। लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर युवा अफसर ने कहा कि वे सरकार की योजनाओं को आम आदमी तक पहुंचाना चाहते हैं ताकि कमजोर तबके के लोगों को इनका भरपूर लाभ मिल सकें। लोगों से मिले प्रोत्साहन को वे कुशल और प्रभावी रूप से अपने काम में तब्दील करना चाहते हैं।