गुरुवार, 25 जून 2015

फिर ना लगे देश में कभी भी आपातकाल !

छिंदवाड़ा। 25 जून 1975 इस दिन को याद कर ही मीसाबंदी सिहर उठते हैं, इसी दिन जिले में सैकड़ों समाजसेविओं और राजनेताओं को आपातकाल के नाम पर जेलों में ठूंस दिया गया, जिन्हें मीसाबंदी कहा जाता है, 19 महीने मीसाबंदियों ने जेल में ही बिताए। इमरजेंसी के 40 साल पूरे होने पर नवदुनिया की टीम ने मीसाबंदियों से आपातकाल का दौर और वर्तमान परिस्थिति पर राय जानी। मीसाबंदियों के मुताबिक उन्हें नहीं लगता अब देश में दोबारा इमरजेंसी के हालात बनेंगे। हालांकि जेपी आंदोलन के बाद कोई दूसरा बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं होने से मीसाबंदी निराश हैं।

उनका मानना है कि अब लोगों में पहले जैसा जज्बा नहीं रहा। मीसाबंदियों के मुताबिक आजाद देश में अभिव्यक्ति की आजादी के लिए ये सबसे बड़ी लड़ाई थी। 79 वर्षीय मीसाबंदी जयचंद जैन के मुताबिक अब आपातकाल आने जैसी स्थिति नजर नहीं आती, फिर भी यदि ऐसे हालात बने तो वो देश के नाम पर दोबारा जेल जाने को तैयार हैं। उनके मुताबिक भले ही सरकार अब पेंशन देती है। लेकिन जो यातनाएं मीसाबंदी और उनके परिवार वालों ने सही उसका खामियाजा कभी नहीं चुकाया जा सकता।

पूरे परिवार को जेल में डाल दिया
बीजेपी जिला अध्यक्ष रमेश पोफली के मुताबिक उनके पूरे परिवार को जेल में डाल दिया गया। घर में 8 पुरूष सदस्य थे सभी को जेल भेजा गया। उस वक्त उनकी उम्र भी मात्र 16 साल की थी। इस दौर में भी पूरे परिवार ने पूरे हौंसले के साथ परिस्थितियों का सामना किया।

लोगों ने घर आना बंद कर दिया
मीसाबंदियों के मुताबिक आपातकाल के दौरान परिवार के लोगों को भी खासी मुश्किल का सामना करना पड़ा। आपातकाल को लेकर लोगों में इतनी दहशत भर गई थी कि उन्होंने मीसाबंदियों के घर तक जाना छोड़ दिया था। घर में खाने के लाले पड़ गए थे।

इनका कहना है
आडवाणी जी वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन देश में दोबारा इमरजेंसी लगने की आशंका वाले उनके बयान से मैं असहमत हूं, अब देश में लोकतांत्रिक सरकार है। इसलिए ऐसी कोई संभावना नहीं है।
रमेश पोफली, जिलाध्यक्ष, बीजेपी

इमरजेंसी के दौरान हमें इस तरह प्रताड़ित किया गया कि जैसे हम आतंकवादी हों। भगवान करे कि देश को दोबारा ऐसे दिन न देखना पड़े।
जयचंद जैन , मीसाबंदी

रातोंरात सैकड़ों लोगों को जेल में ठूंस दिया गया था। किसी को कुछ नहीं पता था कि क्या हो रहा है। वो दिन भुलाए नहीं भूले जा सकते।
रूपचंद राय, समाजसेवी और मीसाबंदी

साभार- नईदुनिया डॉट कॉम
http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/chhindwara-chhindwara-news-397621

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