बुधवार, 19 मार्च 2014

कमलनाथ के आगे नहीं टिकता कमल

छिंदवाड़ा में मतदान 10 अप्रैल 2014 को 

छिंदवाड़ा देश की उन चुनिंदा लोकसभा सीटों में से है जिन्होंने इक्का-दुक्का अपवादों को छोड़कर हमेशा कांग्रेस को जीत का सेहरा पहनाया है। आज भी छिंदवाड़ा में कमल से ज्यादा चर्चा कमलनाथ की है। 

चुनावी संग्राम में भाजपा देश को गुजरात के विकास मॉडल का सपना दिखा रही है, मगर छिंदवाड़ा के लिए इसका कोई मतलब नही है। कारण कि छिंदवाड़ा के पास विकास का अपना मुकम्मल मॉडल है। देश में यह एक मात्र संसदीय क्षेत्र है जो बड़े उद्योगों के बिना भी विकास के लिए जाना जाता है। यह कभी देश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शुमार होता था, मगर अब इससे होकर तीन राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं और वहां से  दिल्ली के लिए सीधी रेल सेवा है। 

कहना न होगा कि इसका काफी कुछ श्रेय कांग्रेस के नेता कमलनाथ को है। वह पिछले आठ आम चुनावों से छिंदवाड़ा का प्रतिनिधित्व संसद में कर रहे हैं। अभी तक सिर्फ एक उपचुनाव में कांग्रेस को वहां धक्का लगा है। एक और अपवाद 1977 के आम चुनाव का है। हालांकि उस समय के जबर्दस्त कांग्रेस विरोधी दौर में भी वहां से जनता पार्टी का जो शख्स जीता था वह पूर्व के दो आम चुनावों में कांग्रेस की टिकट पर जीतकर वहां का सांसद रह चुका था। 

1998 के उपचुनाव में कांग्रेस की हार छिंदवाड़ा के मतदाताओं की तात्कालिक नाराजगी का इजहार था। दरअसल हवाला कांड में नाम आने के बाद कमलनाथ 1996 का आम चुनाव नहीं लड़ सके थे। ऐसे में उनकी पत्नी अलका कमलनाथ ने चुनाव लड़ा और जीतीं। लेकिन एक साल बाद जब कमलनाथ हवाला मामले से बरी हो गए तब उन्होंने पत्नी से से इस्तीफा दिला दिया और खुद चुनाव लड़े। लेकिन वह भाजपा के सुंदरलाल पटवा से हार गए। यह अब तक का इकलौता मौका रहा जब छिंदवाड़ा में भाजपा का कमल खिला। महाराष्ट्र के नागपुर से छिंदवाड़ा की जीवनरेखा जुड़ी है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। लेकिन छिंदवाड़ा पर संघ की सबसे कमजोर पकड़ है।
 
एक राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के स्थानीय पत्रकार गुणेंद्र दुबे का कहना है कि यहां पर कमलनाथ पार्टी से ऊपर हैं। इस बेहद पिछड़े क्षेत्र में बीते पांच साल में जितना विकास हुआ है, उतना शायद किसी भी जिले में नहीं हुआ होगा। कमलनाथ जिस किसी भी मंत्रलय में रहे हों, उनकी कोई न कोई सौगात छिंदवाड़ा तक जरूर पहुंची है। डेढ़ लाख की आबादी वाले शहर में अगले बीस साल की जरूरत के मुताबिक वाटर प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है।

लोकसभा क्षेत्र का लेखाजोखा
छिंदवाड़ा
  • 1951 में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट अस्तित्व में आया
  • 1956 से 1961 के दौरान दो सदस्यों वाला लोकसभा सीट रहा 
  • 11,815 वर्ग किलोमीटर में फैला छिंदवाड़ा क्षेत्रफल के लिहाज से मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा जिला है
  • 76.90 फीसदी ग्रामीण आबादी, सतपुड़ा के जंगल का इलाका आता है जिले में
  • 5.40 लाख आबादी आदिवासियों की है  
  • 81.46 फीसदी है साक्षरता दर
कब कौन जीता
1951    : रायचंद भाई शाह, कांग्रेस
1957    : भिखूलाल लक्ष्मीचंद चांडक, नारायणराव वाडिवा, दोनों कांग्रेस 
1962    : भिखूलाल लक्ष्मीचंद चांडक, कांग्रेस
1967, 1971: गार्गीशंकर मिश्र, कांग्रेस
1977    : गार्गीशंकर मिश्र, जनता पार्टी
1980, 1984, 1989, 1991, : कमलनाथ, कांग्रेस
1998, 1999, 2004, 2009: कमलनाथ, कांग्रेस
1996: अलका कमलनाथ, कांग्रेस  
1997: सुंदरलाल पटवा, भाजपा

विकास कार्य
  1. 1980 से पहले छिंदवाड़ा महज जिला मुख्यालय के तौर पर जाना जाता था 
  2. परसिया छिंदवाड़ा बड़ी लाइन बनने के बाद छिंदवाड़ा से दिल्ली के लिए सीधी ट्रेनें, छिंदवाड़ा नागपुर रेलवे लाइन भी आमान पर्वितन की प्रक्रिया में
  3. इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना, फुटवियर डिजाइन सेंटर की स्थापना
  4. हिंदुस्तान यूनी लीवर, ब्रिटानिया, रेमंड, भंसाली समेत कई निजी कंपनियों ने जिले में उद्योग लगाए
कमलनाथ
  • 1946 में 18 नवंबर को कानपुर में जन्म। दून स्कूल, देहरादून और कोलकाता में शिक्षा। दून स्कूल में संजय गांधी के दोस्त रहे
  • 14.17 करोड़ संपत्ति बताई थी 2009 के आम चुनाव में 
  • कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है 
  • हवाला केस में नाम आने के कारण मई 1996 के आम चुनाव में कमलनाथ चुनाव नहीं लड़ सके 
  • इस हालत में कांग्रेस ने कमलनाथ की पत्नी अलका कमलनाथ को टिकट दिया जो विजयी रहीं
  • 1997 के फरवरी में हुए उप चुनाव में भाजपा उम्मीदवार और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा से महज 37,680 वोटों से हार गए

पिछले लोकसभा चुनावों के नतीजे
2009
प्रत्याशी            पार्टी     मिले मत    मत प्रतिशत
कमलनाथ          कांग्रेस    4,09,736    49.41
मरोट राव खासवे    भाजपा    2,88,516    34.79 
तुलसीराम सूर्यवंशी    स्वतंत्र    21,211    2.56

2004
प्रत्याशी             पार्टी    मिले मत    मत प्रतिशत
कमलनाथ            कांग्रेस    3,08,563    40.89
प्रहलाद सिंह पटेल      भाजपा    2,44,855    32.45 
मनमोहन शाह भट्टी    स्वतंत्र    85,330    11.31

अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटें
  • पूरा छिंदवाड़ा जिला इस लोकसभा सीट के दायरे में आता है 
  • 07 विधानसभा सीटें हैं 2008 के परिसीमन के बाद
1. जुन्नारदेव
2. अमरवारा 
3. चुराई
4. सौंसार
5. छिंदवाड़ा
6. परसिया 
7. पंधौरा
कुल मतदाता

11,39,537

पुरुष-5,45,477
महिला-5,94,060

साभार- लाइव हिंदुस्तान डॉट कॉम
First Published:14-03-14 04:42 PM
Last Updated:14-03-14 06:30 PM


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