शनिवार, 8 मार्च 2014

छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव- 2014 : क्या चुनाव के 20 दिन बचेंगे तब प्रत्याशी घोषित करोगे?

छिंदवाड़ा में लोकसभा चुनाव 10 अप्रैल को होंगे। पहिले चरण में चुनाव हो जाने से हम लोगो को बाद के दिनो में चुनाव के समय आने वाले अन्य नेताओं के भाषण सुनने को नही मिलेगा। अब उसमें कौन से नेता छिंदवाड़ा आ पायेंगे नहीं पायेंगे देखने वाली बात होगी? लोगों की इच्छा मोदी जी और केजरीवाल के भाषण सुनने में रहेगी।भाजपा तो मोदी आ गयें तो बस उसके बाद कूछनहीं इतने में ही संतुष्ट हो जाएगी, भइया मोदी बस मोदी।वन मेन मोदी क्या इतने में आम जनता खुश होकर वोट दे देगी। यह भी परखने वाली बात होगी। आप पार्टी से उम्मीदवार कौन होगा यह भी देखने वाली बात होगी! अब जब चुनाव 35 दिन दूर है, तब तक छिंदवाड़ा का उम्मीदवार घोषित न हो पाना। चुनाव में पिछड़ जाने के समान होगा। खैर वो भी केजरीवाल जी के भाषण के बाद निशचिंत हो जायेंगे। तब आगे क्या? इस पर फिर आगें बातें करेंगे।
कोई जन प्रतिनिधि यदि अच्छा काम करता है, बिना किसी भेदभाव के जनता के काम करता है तो फिर उसके विरुद्ध वातावरण बनाने क्या अर्थ है? क्या चुनाव का यह अर्थ है कि केवल हम ही हम हो दूसरा कोई न हो। 
पत्रकार गुनेंद्र दुबे

यदि छिंदवाड़ा की बात की जाए तो कमलनाथ ने चुनावी राजनीति में वैसा ही रोल अदा किया है जैसा कि लोकतंत्र की मांग है। नगरपालिका या विधान सभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार कहीं जीते और कहीं हारे परंतु उन्होंने किसी क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया।शहरी विकास मंञालय का मंञी होने के कारण छिंदवाड़ा जिले की हर नगर पालिका की पेयजल व सड़क योजना के लिए करोड़ों रुपयों की स्वीकृति दिलाई है। यदि वे चाहते तो केवल कांग्रेस नेतृत्व वाली नगरपालिका या नगर पंचायत के ही योजनाएँ स्वीकृत करवाकर भाजपा नेतृत्व वाली नगर पालिकाओं को ठेंगा दिखा सकते थे। किंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया। 

मतलब साफ है कि उनकी नीयत में खोट नहीं है। फिर उन्होंने जिले में इतने सारे संस्थान शुरू करवाए है जो सबके लिए है। फिर उनका विरोध करने का क्या औचित्य है? बेहतर होता कि उनके खिलाफ चुनाव में प्रत्याशी उतारने की बजाए भाजपा उनको निर्विरोध निर्वाचन के लिए मार्ग प्रशस्त करती तो छिंदवाड़ा देश को एक नया रास्ता दिखाता। इससे राजनीति में अच्छे लोगो के काम की प्रशंसा होती और एक दूसरे पर बिक जाने का बेबुनियाद आरोप लगाने एक दूसरे को शंका की नजर से देखने का घटिया नजरिया भी बंद होता। 
दोनो प्रमुख दलो में एक दूसरे के असंतुष्ट कार्यकर्ता की जासूसी करने उनको खरीदने जैसे अनावश्यक कसरत करने की कवायद भी बंद हो जाती। भाजपा के लोगो को इस पर विचार करना चाहिए। खामखाह भाजपा के लोग पूरे जिले में कार्यकर्ता सम्मेलन करते हुए घूम रहें है और कार्यकर्ता भी उनसे पूछ है कि भइया बताओ तो लोकसभा के लिए चुनाव घोषित हो गये है 33 दिन बचे है पार्टी का प्रत्याशी घोषित नहीं है। क्या चुनाव के 20 दिन बचेंगे तब प्रत्याशी घोषित करोगे? कोई जबाब नहीं है? भाजपा केवल चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी उतारेगी। तभी उसने छिंदवाड़ा विधायक को पूरे जिले में घुमवाना शुरु कर दिया है।

वरिष्ठ पत्रकार गुनेंद्र दुबे के फेसबुक वॉल से,  8 मार्च 

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