बुधवार, 27 अगस्त 2014

कपिल देव छिंदवाडा में (1993-94)

महान क्रिकेटर कपिल देव के 1993-94 में छिंदवाडा आगमन पर वरिष्ट क्रिकेट खिलाडी स्व.परसराम जी कोल्हे पांढुर्णा में। तस्वीर अनुराग दुबे जी के फेसबुक वॉल से।

शुक्रवार, 25 जुलाई 2014

एमए हिंदी में 82 फीसदी अंकों के साथ उमरानाला के पंकज चौधरी रहे अव्वल

पीजी कॉलेज के एमए हिंदी साहित्य चतुर्थ सेमेस्टर के स्टूडेंट पंकज चौधरी ने 82 प्रतिशत अंक हासिल किए है। उमरानाला निवासी पंकज को उनकी कामयाबी पर बधाई। पंकज कृषक फग्गू चौधरी के पुत्र है। वे सेंट्रल स्कूल छिंदवाड़ा में अंशकालिक शिक्षक के रूप में कार्यरत है।  

पंकज को आप उनके फेसबुक प्रोफाइल पर  जाकर भी बधाई दे सकते हैं।

https://www.facebook.com/pankaj.choudhary.984786


रविवार, 20 अप्रैल 2014

ये जिला छिंदवाड़ा है साहेब

मोहन कुमार नागर
ये जिला छिन्दवाड़ा है साहेब 
जिसके कोयले से 
मध्य प्रदेश की सिगड़ी जलती है 
यहाँ इंसानों से कहीं अधिक चूहे
या यूँ कहें
कि इंसानी शक्ल के चूहे
जो अपना ज्यादातर वक़्त
बिलों में ही बिताते हैं
और केवल अपने
और अपनों के लिए रसद जुटाने
यदा कदा ही बाहर आते हैं --



इनके बिलों के
यहाँ बाकायदा सरकारी नाम हैं
पाथरखेड़ा , अम्बारा , इकलेहरा , जमकुंडा
वगैरा - वगैरा
और बिलों की खुदाई ..
और खुदाई ..
और खुदाई के लिए खातों में दर्ज चूहे

ये जिला छिन्दवाड़ा है साहेब
जो एक तिहाई पोपला है
और दिन दर दिन
इसका पोपलापन बढ़ता ही जा रहा है

यहाँ बिलों की
एक अजीब सी भूल भुलैया है
और एक भी चूहा
इसका मुकम्मल अंत नहीं जानता
कहाँ जाकर होना है
ये तो कतई ही नहीं
हाँ इतना जरूर सुनाई मैं आता है
बस एक हफ्ता और निर्देश मिल जाए
तो क्या इकलेहरा ,
क्या जमकुंडा --
सब एक हो जाएँ

ये जिला छिन्दवाड़ा है साहेब
जहाँ चूहे
व्यवस्थित बिल खोदने का
खानदानी हुनर लेकर जन्मते हैं
ताउम्र बिल खोदते हैं
यहीं खप जाते हैं
पर गिनती में कम नहीं होते
की मरते - मरते
अपने जैसे कुछ और चूहे छोड़ जाते हैं

इन चूहों का हुनर देखना हो
तो आपको
इनके बिलों में उतरना होगा साहेब
जिसके लिए अच्छे खां की दाल
पीली हो जाती है

एक अँधेरी काली सुरंग
जाने किन किन मोड़ों से गुजरती
तीन बाई पांच की पगडण्डी
जो कहीं इससे ज्यादा कहीं कम ,
धुप्प अँधेरा ..
सड़े अंडे सी तीखी गंध
और मुंह पर बफार मारती हम्माम सी भाप
आप १५ मिनट से ज्यादा
यहाँ शायद ही सांस खेंच पायें
उसके बाद शर्तिया ही आपको बाहर आना होगा
कि बिल मैं सांस ले पाना तो
चूहों का हुनर है साहेब
आप इंसानों का यहाँ क्या काम ?

खैर
अब बात छिन्दवाड़ा की चल ही रही है
तो केवल चूहों की ही बात सुनना या पढ़ना
आपको अजीब तो लग ही रहा होगा
कि बका जा रहा हूँ मैं चूहों पर
क्या सोचेंगे छिन्दवाड़ा
और छिन्दवाड़ा के बाहर के लोग
जब सुनेंगे या पढेंगे ये सब
कि छिन्दवाड़ा में
क्या केवल चूहे ही रहते है ?

तो पूरा वक्तव्य ये है साहेब
की छिन्दवाड़ा एक मुकम्मल जिला है
यहाँ इंसानों से ज्यादा चूहे रहते हैं
कुछ मुकम्मल चूहे
कुछ इंसानी शक्ल वाले चूहे
और जहाँ चूहे हों
ये कैसे हो सकता है ?
कि वहां बिल्लियाँ ना हों ...

बिल्लियाँ --
काली धुस्स बिल्लियाँ
अँधेरी , काली खोह
घात लगाये बिल्लियाँ
नज़र चूकी नहीं
कि झपट्टा मारकर
मुंह में ले जाती बिल्लियाँ
बिल खुदवाती बिल्लियाँ
हाजरी लगाती बिल्लियाँ
चूहों के लिए
हर आठ - आठ घंटे पाली का
हूटर बजवाती बिल्लियाँ

ये चूहों का जिला है साहेब

यहां बिल्लियाँ राज़ करती हैं 

(मोहन कुमार नागर की कविता फेसबुक वॉल से) 

मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

मॉडल सिटी को देखने के लिए देश- प्रदेश से लोग छिंदवाड़ा आयेंगे : मुख्यमंत्री

कल मुख्यमंत्री जी छिंदवाड़ा नगर आए थे, उन्होंने बड़ी महत्वपूर्ण बात कहीं कि आगामी पांच सालो में छिंदवाड़ा एक मॉडल सिटी के रुप में विकसित होगा, और इस मॉडल सिटी को देखने के लिए पूरे प्रदेश व देश से लोग छिंदवाड़ा आयेंगे। बिलकुल सही कहाँ मुख्यमंत्री जी ने, ऐसा ही होगा

किंतु इसी के साथ वे इस मॉडल सिटी के निर्माता "कमलनाथ" जी का भी नाम ले लेते तो उनका कद और ऊंचा हो जाता, किंतु भाजपा की प्रचार सभा में वे यह अवसर गँवा गये।

एक बार और आपको बताना चाहता हूं कि कल ही भाजपा ने अपना घोषणा पञ जारी किया कि वह देश में 100 नये शहर बनायेगी अगले पांच वर्षों में (2014-2019) में। और इस विजन को यदि मध्यप्रदेश तथा छिंदवाड़ा के नजरिए से देखे तो आप पायेंगे कि छिंदवाड़ा नगर के आसपास 55 कि.मी. की रिंग रोड के दूसरी ओर या आजूबाजू में एक नये शहर को बसाने या बनवाने का काम कमलनाथ 2009 में ही प्रारंभ कर चुके है। यह है कमलनाथ की दूरदर्शिता और समय से पहिले भविष्य के लिए विकास की योजना का मॉडल। जिसे भाजपा ने ही नही पूरे देश ने स्वीकार कर लिया है।


साभार - वरिष्ठ पत्रकार गुनेंद्र कुमार दुबे के फेसबुक वॉल से

मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

आकाशवाणी छिंदवाडा के हिस्सा रहे शशिकांत व्यास जी इंदौर से रिटायर

श्री शशिकांत व्यास (असि. डायरेक्टर प्रोग्राम आकाशवाणी इन्दौर) कल (31 मार्च, 2014) रिटायर हो गए. आकाशवाणी छिंदवाडा ​के बाकी लोगों की तरह व्यास सर से भी 
मेरा गहरा संपर्क रहा. उनसे मुझे कॅरियर मार्गदर्शन भी मिला. उन्होंने मेरा एक इंटरव्यू भी लिया था. उन्हें अपनी आगे की लाइफ के लिए शुभकामनाएं.
प्रवीण नागदिवे का संस्मरण....

सतत रूप से कई वर्षों तक श्रोताओं के पत्रों का जवाब देने वाले शशिकांत व्यास अब इस कार्यक्रम में सुनायी नहीं देंगे । श्री व्यास अपनी मीठी, सधी हुई आवाज से श्रोताओं की शिकायत को इतने प्यार से पढते थे कि श्रोता स्वयं ही सब कुछ भूल कर अगले कार्यक्रम में प्रशंसा पत्र भेज देता था।

अपने सादगी पूर्ण और मधुर व्यवहार के चलते सारी समस्याओं और लोगों के गुस्से को शिव की तरह पी जाने वाले व्यास जी की कमी आकाशवाणी इन्दौर को बहुत खलेगी। 37 वर्ष के आकाशवाणी के सफर में शायद ही किसी ने उन्हें गुस्सा होते देखा होगा। स्वयं मैने भी उनके साथ कई बार ऐसी कई बातें की होंगी जो कि किसी भी व्यक्ति को उत्तेजित कर दे लेकिन व्यास जी जिस मिट्टी के बने थे उसमें गुस्सा नाम का कण था ही नहीं।

10 नवम्बर 1976 को आकाशवाणी इन्दौर में उद्घोषक के रूप में नियुक्त होने वाले शशिकांत ने आकाशवाणी इन्दौर में कई कार्यक्रमों को लोकप्रिय बनाने में अपनी भूमिका निभाई। श्री व्यास 1988 में यूपीएससी से कार्यक्र्म अधिकारी के रूप में चयनित हुए और ज्वाईन किया आकाशवाणी जयपुर में वहॉं से कार्यक्रम अधिकारी के रूप में वे बाडमेर, छिंदवाडा, इन्दौर, जगदलपुर में अपनी सेवायें देने के बाद वापस इन्दौर पंहुचे इन्दौर में सहायक निदेशक के रूप में पदस्थ होने के बाद आज 31 मार्च 2014 को वे सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

श्री शशिकांत व्यास ने अपने जीवन के शुरूआती दौर में ही प्रसिद्ध सात्त्यिकारों, कलाकारों, गायकों के साथ साक्षात्कार का अनुभव ले लिया था इनमें प्रमुख रूप से शिवमंगलसिंह सुमन व स्वर कोकिला सुश्री लता मंगेशकर जैसी हस्तियॉं शामिल रही हैं।
 
श्री शशिकांत व्यास ने अपने कार्यकाल के उत्तरार्ध में कई महत्वपूर्ण कार्यों में अपनी सहभागिता दी है इसमें 3 नए आकाशवाणी केन्द्रों का शुभारंभ भी शामिल है इसमें से एक आकाशवाणी का उज्जैन केन्द्र हैं वहीं 2 रिले सेंटर रलताम एवं झाबुआ भी शामिल है। इन कार्यों के दौरान ये देखने में आया कि वे 24 घंटे कार्य को तत्पर रहते थे। चाहे देर रात को ही घर लौटे हो और सुबह 6 बजे फिर जाना हो तो भी व्यास जी तैयार मिलते थे।

इन्दौर केन्द्र पर एक लोकसेवा प्रसारक के रूप में वे आकाश्वाणी इन्दौर के आधार स्तंभ श्री रामचंद्र मण्डलोई जिन्हें श्रोता कान्हा जी के नाम से याद करते हैं उनका साक्षात्कार करने सुदूर ग्राम उन में श्रोता अनुसंधान टीम के साथ पंहुच गये थे। इसी तरह श्रोता अनुसंधान के फीडबैक पर लोकप्रिय कवि श्री बालकवि बैरागी का साक्षात्कार, संस्कृत समाचार की पहचान बने श्री बलदेवानंद सागर का साक्षात्कार भी श्री व्यास द्वारा किया गया।
 
श्रोता अनुसंधान टीम के साथ श्री व्यास जी ने ग्रामीण क्षेत्रों में कई श्रोता सम्मेलनों में अपनी शिरकत की है इसमें उन्हेल, आलोट, बडवाह, सनावद, खरगोन, महाराष्ट का शेगांव और यवतमाल भी शामिल हैं यह श्री व्यास की का ही प्रयास है कि आज आकाशवाणी इन्दौर श्रोताओं के बीच फिर से अपनी कुछ पहचान बना पाया है। आकाशवाणी इन्दौर कार्यक्रम प्रभारी के रूप में प्रभारी का नम्बर सदा ही श्रोताओं के लिए उपलब्ध रहा करता था उनकी श्रोताओं के बीच लोकप्रियता का आलम ये हैं कि साल भर पहले प्रभारी का कार्यभार छोड देने के बाद भी श्रोता गाहे बगाहे उसी नम्बर पर कॉल कर लेते हैं। श्री व्यास की कार्यप्रणाली और व्यवहार के चलते उनके इस योगदान की कमी आकाशवाणी इन्दौर में लम्बे समय तक महसूस की जाती रहेगी। 

सेवानिवृत्ति पर प्रसार भारती परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनायें..

श्री शशिकांत व्यासअसि. डायरेक्टर प्रोग्राम को शुभकामनाये देना चाहे तो उनके मोबाईल नम्बर 9575102588 पर उनसे संपर्क किया जा सकता है। 

(प्रवीण नागदिवे)

फेसबुक पेज Akashvani Vividhbharti Listenersclub Indore से साभार
https://www.facebook.com/vividhbharti.indore

बुधवार, 19 मार्च 2014

छिंदवाड़ा के सांसदों की सूची 1951 से अब तक

कमलनाथ के आगे नहीं टिकता कमल

छिंदवाड़ा में मतदान 10 अप्रैल 2014 को 

छिंदवाड़ा देश की उन चुनिंदा लोकसभा सीटों में से है जिन्होंने इक्का-दुक्का अपवादों को छोड़कर हमेशा कांग्रेस को जीत का सेहरा पहनाया है। आज भी छिंदवाड़ा में कमल से ज्यादा चर्चा कमलनाथ की है। 

चुनावी संग्राम में भाजपा देश को गुजरात के विकास मॉडल का सपना दिखा रही है, मगर छिंदवाड़ा के लिए इसका कोई मतलब नही है। कारण कि छिंदवाड़ा के पास विकास का अपना मुकम्मल मॉडल है। देश में यह एक मात्र संसदीय क्षेत्र है जो बड़े उद्योगों के बिना भी विकास के लिए जाना जाता है। यह कभी देश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शुमार होता था, मगर अब इससे होकर तीन राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं और वहां से  दिल्ली के लिए सीधी रेल सेवा है। 

कहना न होगा कि इसका काफी कुछ श्रेय कांग्रेस के नेता कमलनाथ को है। वह पिछले आठ आम चुनावों से छिंदवाड़ा का प्रतिनिधित्व संसद में कर रहे हैं। अभी तक सिर्फ एक उपचुनाव में कांग्रेस को वहां धक्का लगा है। एक और अपवाद 1977 के आम चुनाव का है। हालांकि उस समय के जबर्दस्त कांग्रेस विरोधी दौर में भी वहां से जनता पार्टी का जो शख्स जीता था वह पूर्व के दो आम चुनावों में कांग्रेस की टिकट पर जीतकर वहां का सांसद रह चुका था। 

1998 के उपचुनाव में कांग्रेस की हार छिंदवाड़ा के मतदाताओं की तात्कालिक नाराजगी का इजहार था। दरअसल हवाला कांड में नाम आने के बाद कमलनाथ 1996 का आम चुनाव नहीं लड़ सके थे। ऐसे में उनकी पत्नी अलका कमलनाथ ने चुनाव लड़ा और जीतीं। लेकिन एक साल बाद जब कमलनाथ हवाला मामले से बरी हो गए तब उन्होंने पत्नी से से इस्तीफा दिला दिया और खुद चुनाव लड़े। लेकिन वह भाजपा के सुंदरलाल पटवा से हार गए। यह अब तक का इकलौता मौका रहा जब छिंदवाड़ा में भाजपा का कमल खिला। महाराष्ट्र के नागपुर से छिंदवाड़ा की जीवनरेखा जुड़ी है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। लेकिन छिंदवाड़ा पर संघ की सबसे कमजोर पकड़ है।
 
एक राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के स्थानीय पत्रकार गुणेंद्र दुबे का कहना है कि यहां पर कमलनाथ पार्टी से ऊपर हैं। इस बेहद पिछड़े क्षेत्र में बीते पांच साल में जितना विकास हुआ है, उतना शायद किसी भी जिले में नहीं हुआ होगा। कमलनाथ जिस किसी भी मंत्रलय में रहे हों, उनकी कोई न कोई सौगात छिंदवाड़ा तक जरूर पहुंची है। डेढ़ लाख की आबादी वाले शहर में अगले बीस साल की जरूरत के मुताबिक वाटर प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है।

लोकसभा क्षेत्र का लेखाजोखा
छिंदवाड़ा
  • 1951 में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट अस्तित्व में आया
  • 1956 से 1961 के दौरान दो सदस्यों वाला लोकसभा सीट रहा 
  • 11,815 वर्ग किलोमीटर में फैला छिंदवाड़ा क्षेत्रफल के लिहाज से मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा जिला है
  • 76.90 फीसदी ग्रामीण आबादी, सतपुड़ा के जंगल का इलाका आता है जिले में
  • 5.40 लाख आबादी आदिवासियों की है  
  • 81.46 फीसदी है साक्षरता दर
कब कौन जीता
1951    : रायचंद भाई शाह, कांग्रेस
1957    : भिखूलाल लक्ष्मीचंद चांडक, नारायणराव वाडिवा, दोनों कांग्रेस 
1962    : भिखूलाल लक्ष्मीचंद चांडक, कांग्रेस
1967, 1971: गार्गीशंकर मिश्र, कांग्रेस
1977    : गार्गीशंकर मिश्र, जनता पार्टी
1980, 1984, 1989, 1991, : कमलनाथ, कांग्रेस
1998, 1999, 2004, 2009: कमलनाथ, कांग्रेस
1996: अलका कमलनाथ, कांग्रेस  
1997: सुंदरलाल पटवा, भाजपा

विकास कार्य
  1. 1980 से पहले छिंदवाड़ा महज जिला मुख्यालय के तौर पर जाना जाता था 
  2. परसिया छिंदवाड़ा बड़ी लाइन बनने के बाद छिंदवाड़ा से दिल्ली के लिए सीधी ट्रेनें, छिंदवाड़ा नागपुर रेलवे लाइन भी आमान पर्वितन की प्रक्रिया में
  3. इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना, फुटवियर डिजाइन सेंटर की स्थापना
  4. हिंदुस्तान यूनी लीवर, ब्रिटानिया, रेमंड, भंसाली समेत कई निजी कंपनियों ने जिले में उद्योग लगाए
कमलनाथ
  • 1946 में 18 नवंबर को कानपुर में जन्म। दून स्कूल, देहरादून और कोलकाता में शिक्षा। दून स्कूल में संजय गांधी के दोस्त रहे
  • 14.17 करोड़ संपत्ति बताई थी 2009 के आम चुनाव में 
  • कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है 
  • हवाला केस में नाम आने के कारण मई 1996 के आम चुनाव में कमलनाथ चुनाव नहीं लड़ सके 
  • इस हालत में कांग्रेस ने कमलनाथ की पत्नी अलका कमलनाथ को टिकट दिया जो विजयी रहीं
  • 1997 के फरवरी में हुए उप चुनाव में भाजपा उम्मीदवार और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा से महज 37,680 वोटों से हार गए

पिछले लोकसभा चुनावों के नतीजे
2009
प्रत्याशी            पार्टी     मिले मत    मत प्रतिशत
कमलनाथ          कांग्रेस    4,09,736    49.41
मरोट राव खासवे    भाजपा    2,88,516    34.79 
तुलसीराम सूर्यवंशी    स्वतंत्र    21,211    2.56

2004
प्रत्याशी             पार्टी    मिले मत    मत प्रतिशत
कमलनाथ            कांग्रेस    3,08,563    40.89
प्रहलाद सिंह पटेल      भाजपा    2,44,855    32.45 
मनमोहन शाह भट्टी    स्वतंत्र    85,330    11.31

अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटें
  • पूरा छिंदवाड़ा जिला इस लोकसभा सीट के दायरे में आता है 
  • 07 विधानसभा सीटें हैं 2008 के परिसीमन के बाद
1. जुन्नारदेव
2. अमरवारा 
3. चुराई
4. सौंसार
5. छिंदवाड़ा
6. परसिया 
7. पंधौरा
कुल मतदाता

11,39,537

पुरुष-5,45,477
महिला-5,94,060

साभार- लाइव हिंदुस्तान डॉट कॉम
First Published:14-03-14 04:42 PM
Last Updated:14-03-14 06:30 PM


शनिवार, 8 मार्च 2014

गुनेंद्र दुबे : छिंदवाड़ा में आजादी की रात की यादें

छिंदवाड़ा में देश की आजादी का पर्व 14 अगस्त 1947 को राञि 12 बजे से शुरू हुआ था। नगर के बीचो बीच स्थित मोती बाजार (छोटी बाजार) से महिलाओं का एक विशाल जूलूस श्रीमती दुर्गा बाई मांजरेकर के नेतृत्व में निकला था।

जिसमें एक विशाल तिरंगा ध्वज लहराते हुए लोगों का अभिनंदन किया जा रहा था। यह कोई आयोजित जुलूस नहीं था। बल्कि जनता जनार्दन और वो भी महिलाओं के द्वारा आजादी के एतिहासिक पल को अपनी भावनाओं से भर कर जनता को एहसास कराने के लिए निकाला गया था।तब शहर भी बहुत छोटा सा था। छोटी बाजार से बुधवारी बाजार और वहा से वापस हुआ था जूलूस। क्या नजारा रहा होगा! हर घर में तिरंगा लहरा रहा था और उस रात को जो शहर जागा तो दूसरे दिन 15 अगस्त को हर स्कूल सरकारी कार्यालय में तिरंगा फहराया गया था।

वरिष्ठ पत्रकार गुनेंद्र दुबे के फेसबुक वॉल से 

छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव- 2014 : क्या चुनाव के 20 दिन बचेंगे तब प्रत्याशी घोषित करोगे?

छिंदवाड़ा में लोकसभा चुनाव 10 अप्रैल को होंगे। पहिले चरण में चुनाव हो जाने से हम लोगो को बाद के दिनो में चुनाव के समय आने वाले अन्य नेताओं के भाषण सुनने को नही मिलेगा। अब उसमें कौन से नेता छिंदवाड़ा आ पायेंगे नहीं पायेंगे देखने वाली बात होगी? लोगों की इच्छा मोदी जी और केजरीवाल के भाषण सुनने में रहेगी।भाजपा तो मोदी आ गयें तो बस उसके बाद कूछनहीं इतने में ही संतुष्ट हो जाएगी, भइया मोदी बस मोदी।वन मेन मोदी क्या इतने में आम जनता खुश होकर वोट दे देगी। यह भी परखने वाली बात होगी। आप पार्टी से उम्मीदवार कौन होगा यह भी देखने वाली बात होगी! अब जब चुनाव 35 दिन दूर है, तब तक छिंदवाड़ा का उम्मीदवार घोषित न हो पाना। चुनाव में पिछड़ जाने के समान होगा। खैर वो भी केजरीवाल जी के भाषण के बाद निशचिंत हो जायेंगे। तब आगे क्या? इस पर फिर आगें बातें करेंगे।
कोई जन प्रतिनिधि यदि अच्छा काम करता है, बिना किसी भेदभाव के जनता के काम करता है तो फिर उसके विरुद्ध वातावरण बनाने क्या अर्थ है? क्या चुनाव का यह अर्थ है कि केवल हम ही हम हो दूसरा कोई न हो। 
पत्रकार गुनेंद्र दुबे

यदि छिंदवाड़ा की बात की जाए तो कमलनाथ ने चुनावी राजनीति में वैसा ही रोल अदा किया है जैसा कि लोकतंत्र की मांग है। नगरपालिका या विधान सभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार कहीं जीते और कहीं हारे परंतु उन्होंने किसी क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया।शहरी विकास मंञालय का मंञी होने के कारण छिंदवाड़ा जिले की हर नगर पालिका की पेयजल व सड़क योजना के लिए करोड़ों रुपयों की स्वीकृति दिलाई है। यदि वे चाहते तो केवल कांग्रेस नेतृत्व वाली नगरपालिका या नगर पंचायत के ही योजनाएँ स्वीकृत करवाकर भाजपा नेतृत्व वाली नगर पालिकाओं को ठेंगा दिखा सकते थे। किंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया। 

मतलब साफ है कि उनकी नीयत में खोट नहीं है। फिर उन्होंने जिले में इतने सारे संस्थान शुरू करवाए है जो सबके लिए है। फिर उनका विरोध करने का क्या औचित्य है? बेहतर होता कि उनके खिलाफ चुनाव में प्रत्याशी उतारने की बजाए भाजपा उनको निर्विरोध निर्वाचन के लिए मार्ग प्रशस्त करती तो छिंदवाड़ा देश को एक नया रास्ता दिखाता। इससे राजनीति में अच्छे लोगो के काम की प्रशंसा होती और एक दूसरे पर बिक जाने का बेबुनियाद आरोप लगाने एक दूसरे को शंका की नजर से देखने का घटिया नजरिया भी बंद होता। 
दोनो प्रमुख दलो में एक दूसरे के असंतुष्ट कार्यकर्ता की जासूसी करने उनको खरीदने जैसे अनावश्यक कसरत करने की कवायद भी बंद हो जाती। भाजपा के लोगो को इस पर विचार करना चाहिए। खामखाह भाजपा के लोग पूरे जिले में कार्यकर्ता सम्मेलन करते हुए घूम रहें है और कार्यकर्ता भी उनसे पूछ है कि भइया बताओ तो लोकसभा के लिए चुनाव घोषित हो गये है 33 दिन बचे है पार्टी का प्रत्याशी घोषित नहीं है। क्या चुनाव के 20 दिन बचेंगे तब प्रत्याशी घोषित करोगे? कोई जबाब नहीं है? भाजपा केवल चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी उतारेगी। तभी उसने छिंदवाड़ा विधायक को पूरे जिले में घुमवाना शुरु कर दिया है।

वरिष्ठ पत्रकार गुनेंद्र दुबे के फेसबुक वॉल से,  8 मार्च 

सोमवार, 27 जनवरी 2014

साहित्य और सिनेमा के अंतर्सबंध विषय पर व्याख्यान

























गर्ल्स कॉलेज, रायपुर में 27 जनवरी, 2014 को आयोजित किया गया। इसमें मुख्य वक्ता वरिष्ठ कवि, आलोचक और फिल्म समीक्षक विष्णु खरे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वरंजन ने की। कार्यक्रम में उपन्यासकार संजीव बख्शी व फिल्मकार मनोज वर्मा भी मौजूद थे। साथ ही कॉलेज की छात्राएं, शिक्षिकाएं एवं शहर के नागरिक भी शामिल थे।


शनिवार, 11 जनवरी 2014

22, 23 एवं 24 जनवरी को संगोष्ठी का आयोजन

वरिष्ठ साहित्यकार विष्णु खरे, लीलाधर मंडलोई, राजेश जोशी होंगे शामिल 

छिन्दवाड़ा के अग्रणी पी.जी. महाविद्यालय में 22, 23 एवं 24 जनवरी को समकालीन कविता पर आधारित काव्य संगोष्ठी का आयोजन हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है| जिसमे देश के वरिष्ठ साहित्यकार श्री विष्णु खरे, श्री लीलाधर मंडलोई, श्री राजेश जोशी सहित कई जाने माने साहित्यकारों का आगमन हो रहा है | यह जिले का ऐतिहासिक आयोजन होगा जिसमे काव्य पर चिंतन मनन होगा |इस काव्य गोष्ठी में युवा कवियों के लिए भी विविध प्रतियोगिताओं का संयोजन है |