बुधवार, 13 नवंबर 2013

डोंडिया खेड़ा को परासिया ने दी चुनौती

 जमीन ने उगले चांदी के सिक्के


डोंडिया खेड़ा को परासिया ने दी चुनौती, जमीन ने उगले चांदी के सिक्के
छिंदवाड़ाउन्नाव के डोंडिया खेड़ा की खुदाई में सोना मिलेगा या नहीं, यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन रविवार को परासिया विकासखंड के उमरेठ में जो कुछ हुआ, उसने पूरे शहर में सनसनी फैला दी। यहां एक मकान की खुदाई में 75 चांदी के सिक्कों से भरा घड़ा निकला, जिसमें मुगलकाल के सिक्के भरे हुए थे। सिक्कों को देखते ही यहां काम कर रहे मजूदरों की आंख चौंधियां गईं। तुरंत ही इसकी सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई। अधिकारियों ने सिक्कों को अपने कब्जे में कर लिया है। उमरेठ के वार्ड क्रं. 5 हवेली मोहल्ला में चुन्नीलाल सोनी के मकान में रविवार को जर्जर भवन गिराने का काम चल रहा था।
उर्दू में लिखा मुगलकाल
1880 अंकित  जमीन से निकले चांदी के सिक्कों में उर्दू भाषा में मुगलकालीन काल 1880 लिखा हुआ है। जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि उक्त सिक्के 130 साल पुराने हैं। सभी सिक्कों में एक रुपये अंकित है। बरामद किए गए सभी सिक्कों का वजन 8 से 10 ग्राम है।

bhaskar news | Oct 29, 2013, 07:09AM IST 

छिंदवाड़ा में अजब है इन हजारों सीढ़ियों का तिलिस्म

जो भी उतरा कभी वापस नहीं लौटा


छिंदवाड़ा। ‘प्रदेश के रोचक स्थान नॉलेज पैकेज’ के अंतर्गत आज हम आपको प्रकृति की गोद में बसे एक ऐसे अद्भुत गांव के बारे में बता रहे हैं, जिसके बारे में शायद ही आप जानते हों। किस्सों में आप अक्सर पाताल के बारे में सुनते आए हैं। लेकिन क्या आपने कभी वास्तविक जीवन में पाताल देखा है? नहीं, तो यह जानकर आपको खुशी होगी कि हमारे ही देश में एक ऐसा स्थान है, जो पाताल का दूसरा रूप है। उस अद्भुत स्थान का नाम है - पातालकोट।

नाम से ही स्पष्ट है कि यह पाताल में बसा हुआ है। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा से 78 किमी. दूर स्थित यह स्थान 12 गांवों का समूह है। प्रकृति की गोद में बसा यह पाताललोक सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच 3000 फुट ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं से तीन ओर से घिरा हुआ है। इस अतुलनीय स्थान पर दो-तीन गांव तो ऐसे हैं जहां आज भी जाना नामुमकिन है। ऐसा माना जाता है कि इन गांवों में कभी सवेरा नहीं होता।
पैराणिक कथाओं के अनुसार यह वही स्थान है, जहां से मेघनाथ, भगवान शिव की आराधना कर पाताल लोक में गया था। यही नहीं, यहां के स्थानीय लोग आज भी शहर की चकाचौंध से दूर हैं। उन्हें तो पूरी तरह से यह भी नहीं मालूम की शहर जैसी कोई भी चीज भी है। पातालकोट में ऐसी बेहतरीन जड़ी-बूटियां हैं, जिससे कई जानलेवा बीमारियों का आसानी से इलाज होता है। यहां के स्थानीय लोग इन्हीं जड़ी-बूटियों का प्रयोग करते हैं। पाताल लोक में जाने की इजाजत किसी को नहीं। पाताल लोक के दर्शन करने हैं तो सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है।

http://www.bhaskar.com/article/mp-bpl-patalkot-patallok-madhya-pradesh-bhopal-4400300-pho.html?hf-22=