सोमवार, 26 अगस्त 2013

मैं रविशंकर डोंगरे बोल रहा हूं...


Ravishankar Dongre (13 march, 1982-15 Aug, 2013)
सुनिए , मैं रविशंकर डोंगरे बोल रहा हूं , जी हां! वही रविशंकर जिसने तीन
साल में सर्पमित्र के रूप में अपनी अनूठी पहचान बना ली थी। परिवार के लोग और यार-दोस्त मुझे पप्पू भैया के नाम से भी जानते थे। आप सोच रहे होंगे की मरने के बाद मैं यहां क्या कर रहा हूं?। बस यों ही, सोचा की आज आप लोगों से बात की जाए।

मेरा बचपन-
मेरा जन्म मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के छोटे से कस्बे उमरानाला में हुआ। तारीख थी 13 मार्च, 1982। मेरा पिता का नाम नारायण डोंगरे। उनकी यहां किसी जमाने में बड़ी किराना दुकान हुआ करती ‌थी। नारायण सेठ की दुकान के नाम से लोग जानते थे। बचपन से खेत-खलियान, नदी-नालों के किनारे खेलने मस्ती करना मुझे बहुत ज्यादा पसंद था। मेरा बालपन भी आम बच्चों की तरह ही बिता। आप सोचते होंगे कि मुझे सांपों से इतना ज्यादा प्रेम कैसे हो गया? मैंने बचपन में देखा कि लोग अपने घरों और खेतों में निकलने वाले सांपों को मार देते हैं। मुझे उस वक्त बहुत दुख होता था। मैं सोचता- आखिर इन्हें कैसे बचाऊं। फिर जैसे-2 मैं बड़ा होता गया, मैंने कचुए, केकड़े और छोटे सांप पकड़ना शुरू किया। धीरे-धीरे यह सब मेरे लिए जुनून बन गया और आप सबका प्‍यारा पप्पू सर्पमित्र बन गया।

मुझे और मेरे जैसे स्नेक फ्रेंड को सभी लोग यह कहकर रोकते हैं कि जो सांप पकड़ता है उसकी मौत भी उससे ही होती है। उनके घरवाले और सब उन्हें डराते हैं। पर वहीं लोग उन दोस्तों को बाइक या कार लेकर देते हैं। तो मैं उन लोगों को कहना चाहता हूं कि- जो स्नेक फ्रेंड है। अभी तक शायद सिर्फ कुछ 100 लोग ही मरे होंगे। पर बाइक या कार के एक्सीडेंट से हर साल लाखों लोग मरते हैं। तो वो ये सब चलाना बंद क्यों नहीं कर देते हैं और शराब , गुटखा और अन्य चीजों से भी हर साल लाखों लोग मरते हैं। तो लोग हमें क्यों ताने मारते हैं कि तू भी स्नेक्स बाइट से मरेगा...। इस बारे में कहना तो मैं बहुत चाहता हूं मगर अभी नहीं।

आप यह भी पूछ सकते हैं कि इतने खतरनाक सांपों को पकड़ने के लिए कोई भी ट्रेनिंग ली होगी? तो मेरा जवाब- 'हां है। मैंने भोपाल में रहने वाले पेशेवर सर्पमित्र सलीम खान से कुछ महीने ट्रेनिंग ली थी। साथ में विलास भी था। सलीम साहब को शायद आप लोग कम जानते होंगे। वे पिछले 28 सालों से खतरनाक सांपों को पकड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने अब तक करीब पौने तीन लाख सांपों को बचाया है। वे राजधानी भोपाल में नगर निगम में कार्यरत है। वन विहार से भी सलीम भाई लगातार जुड़े हुए है। वे यहां निकलने वाले सभी स्नेक को पचमढ़ी की पहाड़ियों में छोड़ आते है। आपके लिए यह जानना रोचक होगा कि मेरे साथ जो हादसा हुआ। यानी कोबरा के काटने का। यह उनके साथ भी चार-चार बार हो चुका है। मगर बेहतर इलाज की वजह से वे हरबार मौत के मुंह से निकलकर बाहर आ गया। मगर मैं...। खैंर।

सांपों को बचाने की मुहिम
मैंने पिछले तीन सालों में लगातार सांपों को बचाने की मुहिम जारी रखी। मेरे साथ कुछ मित्र भी आ गए। विलास डोंगरे (29), दीपक , सुनील गौतम (30), निखिल राऊत। विलास ऑटोमोबाइल कंपनी में काम करता है। दीपक की कपड़े की दुकान है। निखिल अभी पढ़ाई कर रहा है। विलास ने मुझे बताया था‌ कि उसके एक मित्र की मौत सांप के काटने से हुई थी। तब से वह परेशान रहता था। मगर एक दिन ऐसा कुछ हुआ कि मेरा जीवन ही बदल गया और भी सर्पमित्र बनकर सांपों को बचाने लगा। विलास को इस बात का पता चल गया था कि सांप वैसे किसी को काटता नहीं है, वह अपनी रक्षा करने के लिए हम पर हमला करते हैं। हमारी टीम ने हजार के करीब सांपों को अब तक बचाया।

हमारी टीम को छिंदवाड़ा के वन विभाग का भी पूरा सपोर्ट मिलता था। जब हम सिल्लेवानी के जंगल में सांपों को छोड़ने जाते थे तब भी कुछ फारेस्ट गार्ड हमारे साथ होते थे।  पिछले साल यानी दिसंबर, 2012 में ही हमारी टीम के बारे में वन‌ विभाग को पता चला था। वनविभाग पहले पैसा लेकर सांप पकड़ने वालों यानी सपेरों की सेवाएं लेते थे। मगर चूंकि हम फ्री में यह काम करते थे। इसलिए हम उन्हें ज्यादा अच्छे लगे। मेरी टीम ने एक साल पूरी तरह प्रोफेशनल होकर काम किया। सोशल साइट फेसबुक के जरिए मेरे कई दोस्त बने। महाराष्ट्र के आकाश जाधव, समीर। कनाडा, अमेरिका के कई शहरों जैसे- लास एंजलिस में भी मेरे कई फ्रेंड है। उनसे मेरी लगातार बात होती थी। मुझे पता है कि मेरी मौत का उन्हें गहरा सदमा लगा है। आकाश और समीर ने कई दिन उदासी में गुजारें।

ऐसे हुई मेरी मौत
अब आप यह भी जानना चाहेंगे मेरी मौत कैसे हुई ? तो उस दिन (15 अगस्त, 2013) का किस्सा यूं है। मैं अपने पास रखें 20-25 सांपों को लेकर सिल्लेवानी के जंगल के लिए निकला। मेरे साथ फारेस्ट के गार्ड और मेरा दोस्त, हमारी टीम का मेंबर विलास डोंगरे भी था। हम लोगों ने पहले सिल्लेवानी के स्कूल में बच्चों को अवेरनेस के लिए सांपों को दिखाया। फिर हम लोग सांपों को छोड़ने जंगल में चले गए। हमारे पास 10-12 कोबरा भी थे। कुछ गांव के लिए और बच्चे भी तमाशा देखने के लिए हमारे साथ आ गए। हमने एक-एक करके जार से सांपों को बाहर निकलना शुरू कर दिया। सभी सांप जंगल की तरफ चले गए। मगर एक कोबरा वहीं रुक गया। लोगों ने कई तरह की बातें की। आखिर मुझे उसे उठाकर जंगल की तरफ ले जाना पड़ा।



इसी बीच उसने मेरी अंगुली पकड़ ली। मैंने तुरंत लोगों को बताया। सिल्लेवानी से हम जल्दी ही उमरानाला पहुंचे। वहां कुछ फौरी इलाज करने के बाद भी मुझे राहत नहीं मिली। उल्टियां शुरू हुई तो दोस्तों ने गाड़ी का इंतजाम करके मुझे छिंदवाड़ा के जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने मुझे बचाने की भरसक कोशिश की मगर वे बचा न सकें और इस तरह मैं हमेशा- हमेशा के लिए आप सब से दूर चला गया। मुझे मेरी मौत का कोई अफसोस नहीं है।

हां! आप लोगों के लिए एक खुशखबरी है कि अब कोई और रव‌ि आपसे दूर नहीं जाएगा। क्योंकि मेरी टीम के मेंबरों ने अस्पताल में ही अबसे कोई भी सांप न पकड़ने का संकल्प ले लिया है। विलास, सुनील, दीपक, निखिल मेरे भाईयों तुम मुझे भुला नहीं पाओगे और मैं तुम्हें। पर मैं हमेशा सांपों के बारे में ही सोचता रहूंगा। मुझे खुशी है कि मैं सर्पमित्र बना। कुछ और बनता तो उतनी खुशी कभी न होती।

दोस्तों, कहने को तो बहुत कुछ है, मगर आज यहीं विराम लेता हूं, आप सभी को एक बार फिर से प्रणाम!

विशेष नोट-
(मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के सर्पमित्र रविशंकर डोंगरे की आपबीती। इससे मैंने उनकी मौत से पहले की गई बातचीत, उनके दोस्तों और फेसबुक वॉल की मदद से तैयार किया है। भाई रविशंकर यानी पप्पू भैया को 15 अगस्त, 2013 को कोबरा के काटने से मौत हो गई। वे सांपों से बहुत प्यार करते थे उनका प्यार यहां तक था कि उन्हें सांप के काटने से अपनी जान जाने का भी डर नहीं लगता था। )

RAVISHANKAR DONGRE FACEBOOK LINK :

https://m.facebook.com/ravishankar.dongre?refid=46

1 टिप्पणी:

jyotiraj kokane ने कहा…

Ramkrishna bhai ... muze bhi Bohot dukh hua pappu bhaiya ke chhod Jane ka...
Bhagwan unki aatma ko shaanti de....
aapne unke liye it a kuchh kiya... Bohot achha laga.. unko sahi shraddhanjali hai ye blog me likhna...
par ek baat Mann ko nahi bhayi...
k unki team ke sarpmitro ne saap na pakadne ka sankalp kiya.. yeh kaha tak thik hai...?
Kya yeh pappu bhai ko sheaddhanjali ho sakti hai...?
Ek cobra ne galati se pappu bhai ko kat liya.. to baaki sabhi saap uske saath me kusurvar ho gaye...? Unhe kaun bachayega...? Kaun pakdega unhe...?
Kya mai sahi hu...?
jyotiraj kokane
latur Maharashtra..
7758099156