मंगलवार, 30 जुलाई 2013

ओमप्रकाश नयन की दो कविताएं

आम आदमी
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आज
आम आदमी
'आम'
नजर आने लगा है,
जो
कुण्ठा, घुटन और संत्रास के
हाथों में आकर
चूसा जाने लगा है।

-------------ओमप्रकाश नयन

तीली
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वक्त ने मेरी जिंदगी के
सीने पर
एक ऐसी तीली
रख दी है,
जिसे सुलगा लेना
मेरी अनिवार्यता
बन गई है।
क्योंकि, इस तीली का
आलोक,
कर सकता है दूर
मन की
घाटियों का
घना अंधेरा।

-------------ओमप्रकाश नयन

कवि का परिचय
युवा रचनाकार श्री ओमप्रकाश नयन का पहला कविता संग्रह 'सच मानो शुकंतला!' शैवाल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। इस संग्रह में शीर्षक कविता के अलावा बची रह सके एक उम्मीद, मेरा चिंतन, जन्म दिवस, अलविदा! बीते वर्ष अलविदा, ओ मेरे अभिमन्यु मन!, सच तो यह है!, काश! यदि ऐसा हो तो, आदि कविताएं शामिल है। 22 अप्रैल, 1962 को मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जन्में नयन जनसंपर्क विभाग में कार्यरत है। वे कविता के अलावा गीत, गजल, लघुकथा आदि भी लिखते हैं। उनकी रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है।

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