शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

छिंदवाड़ा जिले में पत्रकारिता की नई-पुरानी सभी कहानी

  • दैनिक भास्कर को चुनौती देने की तैयारी में लोकमत समाचार
  • राजस्‍थान पत्रिका भी जल्द ही लांच करने वाला है अपना संस्करण
  • 1989 में ब्यूरो कार्यालय बनाने वाले लोकमत पहला अखबार
  • छिंदवाड़ा के लोगों ने देखा था नवभारत नागपुर का स्वर्णिम दौर
कभी यहां नागपुर से प्रकाशित नवभारत अखबार नंबर वन हुआ करता था। पचास साल से ज्यादा समय तक नवभारत का एकछत्र राज रहा। फिर दैनिक भास्कर ने नवभारत के किले को ध्वस्त किया। अब पहुंचा है लोकमत समाचार। जाहिर सी बात है कि सतपुड़ा की वादियों में बसे मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की पत्रकारिता में अब घमासान मचने वाला है। क्योंकि जल्द से यहां से राजस्‍थान पत्रिका भी लांच हो जाएगा।

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से लोकमत समाचार का एडीशन 12 जुलाई, 2013 को लांच हुआ है। यह लोकमत का प्रदेश में पहला स्वतंत्र संस्करण है। बताया जा रहा है सभी मामलों में लोकमत अपने प्रतिद्वंद्वी अखबारों दैनिक भास्कर, नई दुनिया, जबलपुर एक्सप्रेस से आगे निकलने की कोशिश में है। सूत्र बताते हैं कि अभी लोकमत समाचार की छिंदवाड़ा जिले में करीब 22 हजार कॉपियां पहुंच रही है। इसमें से 11 हजार के करीब प्रतियां शहर में बांटी जा रही है। इसके बावजूद नंबर वन बनने के लिए लोकमत को कड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा। कुछ ही महीनों में यहां से पत्रिका का एडीशन शुरू होने वाला है। वरिष्ठ पत्रकार हरमिंदर लूथरा का इसकी कमान सौंपी गई है। भास्कर से पहले सन 2005 तक नवभारत छिंदवाड़ा में नंबर वन अखबार हुआ करता था। गौरतलब है कि इससे पहले लोकमत समूह मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा समेत चार सीमावर्ती जिलों बालाघाट, सिवनी और बैतूल के पाठकों के लिए मध्यांचल संस्करण के द्वारा अपनी पहुंच बना चुका है।

वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र जायसवाल
जिले में अपना ब्यूरो कार्यालय बनाने वाले पहला अखबार लोकमत ही था, जो 1989 में स्‍थापित किया गया था। तब से लगातार यह अखबार अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराता रहा है। जिले के संतराचल यानी रामाकोना, सौंसर, पांढुर्णा में इसकी अच्छी पकड़ रही है। आरंभ से लोकमत समाचार से जुड़े और फिलहाल इसके ब्यूरो चीफ वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र जायसवाल ने कहा कि यह अखबार लोगों की बीच अपनी पकड़ बनाने में कामयाब हो रहा है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ पत्रकार शिवनारायण शर्मा और कमल नयन 'पंकज' जी ने शुरूआत में इसके ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाली। मैंने भी अपने पत्रकारिता कॅरियर की शुरूआत 2003 में लोकमत से ही की थी।

दैनिक भास्कर का 43 वां एडीशन छिंदवाड़ा में साल 2008 में लांच हुआ। इसके संपादक मनमोहन अग्रवाल और लांचिग टीम में प्रमुख थे विकास मिश्र और संजय गौतम। गौतम जी फिलहाल यहां संपादक है। छिंदवाड़ा एडीशन पहले भास्कर के भोपाल ग्रुप के पास था। बंटवारे के बाद यह जबलपुर भास्कर के हाथ में चला गया। फिलहाल जिले में इसकी 33 हजार प्रतियां पहुंच रही है। दैनिक भास्कर की लांचिग टीम का हिस्सा रहे वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्र इन दिनों लोकमत नागपुर के संपादक है। अब उन्हीं की अगुवाई में लोकमत का एडीशन शुरू हुआ है।

छिंदवाड़ा में फिलहाल दैनिक भास्कर, जबलपुर एक्सप्रेस जैसे अखबारों का बोलबाला है। जल्द ही यहां से राजस्‍थान पत्रिका के एडीशन शुरू होने की चर्चा है। भास्कर की बात करें तो मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के कई शहरों की तरह यहां भी यह अखबार लोगों की पहली पसंद बन गया है, लेकिन लोकल खबरों को ज्यादा स्पेस देने की वजह से जबलपुर एक्सप्रेस की भी अपनी पहचान है। इसके अलावा  नवभारत, सतपुड़ा एक्सप्रेस, राज एक्सप्रेस, नई दुनिया, देशबंधु, जनपक्ष जैसे अखबार भी मार्केट में है।

सालों तक पाठकों की पहली पसंद रहा नवभारत नागपुर
अगर अतीत बात की जाए तो नवभारत नागपुर ने यहां अपना स्वर्णिम दौर देखा है। 90 के दशक में नवभारत अपने प्रतिद्वंदी अखबारों जबलपुर एक्सप्रेस, लोकमत, जनपक्ष और स्वतंत्र मत के बीच पाठकों की पहली पसंद रहा। आजादी के पूर्व सन 1937 में नवभारत शुरू हुआ था। तब से नवभारत यहां रेगुलर आता रहा है। इसके संस्‍थापक स्‍व. रामगोपाल माहेश्वरी उर्फ बाबूजी साल में कई बार छिंदवाड़ा आते थे। उमरानाला के वरिष्ठ पत्रकार विट्ठल पटेल ने बताया कि वे 1956 से 2002 तक नवभारत से जुड़े रहे। वे मोहखेड़ और बिछुआ ब्लॉक की खबरें भेजा करते थे। उन्होंने बताया कि माहेश्वरी जी जब भी छिंदवाड़ा आते थे, तो उमरानाला रूककर यहां के मशहूर बड़े जरूर खाया करते थे। उन्हें बड़े बहुत ज्यादा पसंद थे।

1984 में बेस्ट रिपोर्टिंग के अवार्ड से नवाजे गए वरिष्ठ पत्रकार गुणेंद्र दुबे बताते है कि नागपुर से नवभारत अखबार बस-टैक्सी से उसी दिन आ जाता था। जबकि बाकी कई राष्ट्रीय अखबार और मैग्जीन ट्रेन के द्वारा दूसरे दिन पहुंचती थी, जिनमें हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स, आज, टाइम्स ऑफ इंडिया और हैदराबाद से प्रकाशित मैग्जीन 'कल्पना' शामिल थी।

आपको याद दिला दे कि 20 वीं सदी के आखिरी दशक में भोपाल और जबलपुर से प्रकाशित दैनिक भास्कर भी छिंदवाड़ा पहुंचने लगा। जबलपुर एक्सप्रेस यहां से 1991 में लांच हुआ था। 21 वीं सदी के पहले दशक यानी 2000-2010 में कई अखबारों के एडीशन शुरू हुए। 13 फरवरी, 2000 में भोपाल से प्रकाशित दैनिक भास्कर में छिंदवाड़ा के चार पेज निकलना शुरू हुए। इसके बाद 22 मार्च, 2000 को नवभारत का एडीशन शुरू हुआ। जिसका बड़ा-सा आफिस शनिचरा बाजार में बनाया गया। करीब चार-पांच साल में ही इसका दौर लगभग खत्म-सा हो गया।

देखा जाए तो दैनिक भास्कर के आने के पहले तक नवभारत और जबलपुर एक्सप्रेस के अलावा लोकमत अपने मध्यांचल जैसे कुछ पन्नों के पुलआउट के साथ छिंदवाड़ा की जनता के काफी लोकप्रिय रहे हैं। बचपन में हम लोग छिंदवाड़ा-नागपुर रोड पर स्थित उमरानाला, तंसरामाल जैसे कस्बों में नवभारत नागपुर, जबलपुर एक्सप्रेस, नई दुनिया और लोकमत जैसे अखबारों  को ही तलाशा करते थे। इनके परिशिष्ट और वीकली मैग्जीन भी खासी पढ़ी जाती थी। इसमें नवभारत की ग्‍लैमर, सुरुचि, अवकाश और लोकमत की लोकरंग, सखी, मंथन आदि शामिल थी।

जनसंपर्क विभाग में कार्यरत साहित्यकार ओमप्रकाश नयन ने बताया कि 90 के दशक में नवभारत के अलावा जबलपुर से प्रकाशित नवीन दुनिया, देशबंधु भी यहां पढ़े जाते थे। उमरानाला कस्बे में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबारों की बात करें तो 1980-82 के आसपास से ही यहां नवभारत नागपुर और नई दुनिया इंदौर खासे चर्चित रहे। जानकार बताते हैं कि उमरानाला में उस जमाने में नवभारत की करीब 150 और नई दुनिया इंदौर की 25 कॉपियां आती थी।

लोकमत का साहित्य से रहा है गहरा नाता
साहित्यकारों के बीच में लोकमत समाचार काफी पहले से भी लोकप्रिय रहा है। कई साहित्यकारों को लोकमत से नई पहचान मिलीं। बाबा हनुमंत मनगटे को पहली बार मैंने लोकमत में ही पढ़ा था। उसके बाद उनसे मिलने काव्या दूरसंचार, बुधवारी बाजार में पहुंचा था। छिंदवाड़ा के कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले यानी यहां रहने से पहले तक मैंने साहित्य बिरादरी के कम ही लोगों के बारे में सुना था। लोकमत समाचार के साहित्य से जुड़ाव का ही परिणाम रहा कि जब छिंदवाड़ा से लोकमत का शुभारंभ हुआ तो इस मौके पर निकले लोकार्पण विशेष में साहित्य को खासी तवज्जो मिली।

स्पेशल पेज पर वरिष्ठ साहित्यकार बाबा हनुमंत मनगटे का लेख ''आजादी बाद छिंदवाड़ा की साहित्यिक यात्रा '' का प्रकाशन हुआ। साथ ही वरिष्ठ कवि लीलाधर मंडलोई का लेख भी प्रकाशित हुआ, जो छिंदवाड़ा के उन साहित्यकारों पर है ,जो बाहर रहकर अपना सृजनकर्म कर रहे हैं।  इसके अलावा तस्वीरों में- जनवरी 1978 में आयोजित सातवें अखिल भारतीय समांतर कथा लेखक सम्मेलन जिसमें सर्वश्री कमलेश्वर,जितेन्द्र भाटिया,मधुकर सिंह, धूमकेतु, सुभाष पन्त, ओम गोस्वामी, धीरेन्द्र अस्थाना, आलमशाह खान, राजेन्द्र दानी, असगर अली इंजीनियर, दामोदर सदन ,मनीष राय, दया पवार, सतीश कालसेकर, सूर्यभान रणशुम्भे, शौरी राजन और अन्य साहित्यकारों ने शिरकत की थी, इस कार्यक्रम का संयोजन हनुमंत मनगटे ने किया था। दूसरी तस्वीर - म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन, छिंदवाड़ा के एक वार्षिक कार्यक्रम की, छपी है। 

दैविक चाणक्य के संपादक रहे पुण्य प्रसुन वाजपेयी
छिंदवाड़ा में पहला दैनिक अखबार मई 1991 में सनत जैन के संपादन में 'जबलपुर एक्सप्रेस' निकला। वहीं अक्टूबर, 1993 में राजू अरोरा ने दैविक चाणक्य प्रकाशित किया। करीब दो साल तक इसके संपादक थे, आज के मशहूर टेलीविजन पत्रकार, संपादक और सीनियर एंकर पुण्य प्रसुन वाजपेयी। उनके साथी रहे वरिष्ठ पत्रकार कमल नयन 'पंकज' ने बताया कि पुण्य प्रसुन जी उस समय नागपुर में रहा करते थे और लोकमत नागपुर की नौकरी छोड़कर दैविक चाणक्य में आए थे।

छिंदवाड़ा का पहला हिंदी अखबार मध्यप्रांत समाचार पं. गोपीनाथ दीक्षित के संपादन में सन 1921 में प्रकाशित हुआ। इसके बाद सन 1949 को चार पेज का 'साप्ताहिक इंकलाब' प्रकाशित हुआ। इसके संपादक स्‍व. आर. के. हलदुलकर जी थे। पचास से साठ के दशक के बीच रवि दुबे जी के संपादन में सतपुड़ा टाइम्स प्रकाशित हुआ था। इसी समय 'साप्ताहिक जनसेवक' का भी प्रकाशन हुआ था। इसमें साहित्यकार और पत्रकार पं. रामकुमार शर्मा का एक चर्चित कॉलम छपता था।

एक और साप्ताहिक अखबार 'सतपुड़ा के स्वर' भी चर्चा में रहा। इसका प्रकाशन सन 1968 में हुआ, जिसके संपादक थे स्‍व. शैलेंद्र शुक्ला। जिले के वरिष्ठ साहित्यकार स्‍व. बाबा संपतराव धरणीधर ने 1976 में हाशिया नामक समाचार पत्र निकाला था। होली के अवसर पर 1989 से लगातार संतोष जैन 'सरल' हास्य-व्यंग्य पर आधारित वार्षिक बुलेटिन 'हरामखाऊ टाइम्स' निकालते हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार इसकी दो हजार कॉपियां निकली थी। वहीं 2013 में 20 हजार प्रतियां छपी। एक सांध्य दैनिक 'हिंदी हेराल्ड' की भी चर्चा होती है। नवंबर 1996 में प्रकाशित इस समाचार पत्र का संपादन रजत गुप्ता ने किया था। जनवरी, 2010 में विश्वेश चंदेल ने साप्ताहिक मैग्जीन 'किसान अभिकल्पना' निकाली।

छिंदवाड़ा की नई और पुरानी पत्रकार पीढ़ी
छिंदवाड़ा के पत्रकारों की पुरानी पीढ़ी में स्‍व. आर. के हलदुलकर, स्‍व. शैलेंद्र शुक्ला, स्‍व. शिवप्रसाद साहू, स्‍व. प्रकाश पण्डया, स्व. रविंद्र सिंह शक्रवार, नरेंद्र जायसवाल, कैलाश पाटनी, शिवनारायण शर्मा, के. के. हलदुलकर, रवि दुबे, रघुराज पारिख, गोविंद चौरसिया, आर. एस. वर्मा, वनराज जडेजा, गुणेंद्र दुबे, राजेंद्र राही, महेश चांडक, राकेश प्रजापति, सुंदर सिंह शक्रवार आदि का नाम शुमार है।

वर्तमान पीढ़ी के पत्रकारों में रवि वर्मा उजाला, धर्मेंद्र जायसवाल, रत्नेश जैन, सुधीर दुबे, हर्षित दुबे, गिरीश लालवानी, जगदीश पवार, दिनेश लिखितकर, दीप्ति शुक्ला, राजेश करमेले, संतोष गौतम, सचिन श्रीवास्तव, अंशुल जैन जैसे दर्जनों नाम शामिल है।

जिले से बाहर सक्रिय पत्रकारों की श्रेणी में प्रिंट मीडिया से नवभारत टाइम्स दिल्ली के संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार विष्‍णु खरे, आरती पांडे, नेहा घई पंडित, सुमित वर्मा, रामकृष्‍ण डोंगरे, निश्चय बोनिया आदि शामिल है। वहीं टेलीविजन जर्नलिस्ट की लिस्ट में सीनियर एंकर दिनेश गौतम, अमिताभ अरुण दुबे, धर्मेंद्र रघुवंशी, आशीष मिश्रा, शैलेंद्र सिंह, इमरान खान, प्रशांत नेमा, अरुण खोबरे, मनीष शेंडे, हरीश देशमुख आदि नाम है।  

- रामकृष्‍ण डोंगरे

मीडिया वेबसाइट भड़ास4मीडिया से साभार

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