बुधवार, 24 जुलाई 2013

प्रभु नारायण नेमा की यादों में 80 के दशक का मीडिया

वास्तव में 80 के दशक में प्रिंट मीडिया और उनसे जुड़े मित्रों की आज भी याद है। मैं उस समय (1983) सतपुड़ा विधि महाविद्यालय में छात्रसंघ का अध्यक्ष था और प्रेस में समाचार भी मजेदार होते थे। नवभारत में आधा पेज ही छिंदवाड़ा जिले के लिए होता था। शहर के एक या दो समाचार होते थे। बाकी नईदुनिया इंदौर श्री कैलाश पटनी जी, नव भारत नागपुर श्री नरेन्द्र जैसवाल जी, देशबंधु वनराज जडेजा जी, महेश चांडक जी दैनिक जागरण सहित साप्ताहिक समाचार जनपक्ष, सतपुड़ा के स्वर, इन्कलाब सहित समाचार पत्र थे।

खास बात ये थी कि उस समय आप का समाचार छपना बहुत बड़ी चीज थी। हां, प्रेस विज्ञप्ति मित्रों के पास ले जाते थे। वे उस समाचार को प्रेस के समाचार पैड पर फिर से हाथ से लिखते थे और लिफाफा डाक से पोस्ट होता था, जो कि 4 या 5 दिन में कम से कम समाचार पत्र के दफ्तर में जबलपुर, इंदौर, नागपुर, भोपाल में पहुचता था। समाचार कम से कम एक हफ्ते में पढ़ पाते थे और वो ख़ुशी आज भी याद है जब रोक कर मित्र कहते थे आज तुम्हारा संचार आया है।

उस समय समाचार टेलीग्राम से भी जाते रहे पर इसके लिए खास मशक्कत करनी होती थी। प्रेस कार्ड का जलवा भी था, मैं भी प्रभावित हो मालवा समाचार साप्ताहिक का उस समय जिला प्रतिनिधि बन गया। वो भी दिन थे पर दैनिक संस्करण की शुरुआत जबलपुर एक्सप्रेस से हुई और रत्नेश जैन जी उस समय तरुनाई में थे। श्री आर एस वर्मा जी की शुरुआत भी जहां तक वहीं से थी। आज मीडिया के बढ़ते कदम छिंदवाडा शहर को बड़े शहरों की पहचान दे रहा है।

 (लेखक प्रभु नारायण नेमा मध्य प्रदेश विधुत कर्मचारी संघ फेडरेशन (इंटक), छिंदवाड़ा (मप्र) के प्रांतीय उपाध्यक्ष है। इसके अलावा वे 'नेमा दर्पण' के संपादक भी है।)

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