शुक्रवार, 21 जून 2013

स्मरण ....बाबा सं.रा. धरणीधर की गज़लें

खुशी कभी तो ग़म कभी, पी रहे हैं लोग

खुशी कभी तो ग़म कभी, पी रहे हैं लोग
स्व. बाबा संपतराव धरणीधर
किश्त किश्त ज़िन्दगी, जी रहे हैं लोग

पैबन्द अन्धकार के, माँग कर उधार
फटी-फ़टी सी रोशनी, सी रहे हैं लोग

सूखा पडा तो देखिये, प्यास बढ गई
नहरें खुदा के नद्दियाँ, पी रहें हैं लोग

खुशी तो एक शब्द है, खुशी मिली किसे
खुशी की एक लकीर सी,छी रहे हैं लोग

बीमार शाम को हुए ,  रात मर गए
सुबह हुई कि फिर उठे, जी रहे हैं लोग


-किस्त किस्त जिंदगी से--------------------------------- सं. रा. धरणीधर

कन्या से कश्मीर हमारा, पावन कितना है घर सारा
मन्दिर मस्जिद देहरी-देहरी, आँगन आँगन है गुरूद्वारा.

गंगा जमुना दूध पिलाकर, माँ ने हमको समझाया है.
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई, आपस मे हो भाईचारा.

मज़हब तो हैं राहें रब की, लिये रोशनी चलते चलिये
धर्मग्रंथ सब कन्दीले हैं, गीता हो या शबद हजारा.

पंजाबी मदरासी सारे ऊपर की ये पोशाखे हैं.
चाक जिगर करके देखो तो, सुर्ख सभी में खून हमारा.

अमृतसर का पाक सरोवर, जम जम या कृष्णा का पानी
गहरे कोई पैठ तो देखे, एक सभी में अक्स हमारा.


----------------------------------- सं. रा. धरणीधर


लम्बी बहर की कोई, ऎसी ग़ज़ल सुनाएँ
कश्मीर का तराना, कन्या मे गुनगुनाएँ


केरल रदीफ़ मे हो, आसाम काफ़िये में
गुजरात की ज़मी से, मतला कोई उठाएँ


आबे-रवाँ वो गंगा, लफ्ज़ों मे हो रवानी
 चश्मे हिमालया के, संगीत गुनगुनाएँ.


मज़हब की सूफ़ियाना, ख़्यालों मे हो बुलंदी
हिन्दू मुसलमाँ मिल के, पुख्ता गिरह लगाएँ


बंगाल के वज़न पर, पंजाब है सुखन में
हिन्दी हैं हम तख़ल्लुस, मक़्ता सभी सुनाएँ


----------------------------------- सं. रा. धरणीधर


अलविदा हम जा रहे हैं, आज अपने गाँव यारों

आग का दरिया उफ़नता, मोम की है नाव यारों
 अलविदा  हम जा रहे हैं, आज अपने गाँव यारों

तलवार सर लटकी  हुई  है,  एक   कच्चे सूत से
फिर भी हैं हम खुश कि हमको, मिल गई है छाँव यारों

जिस जगह से थे चले हम, आज भी हैं उस जगह
 कौन  अंगद  को  बताए, और  भी  हैं  पाँव यारों

खुशनुमा क्या सिलसिला है, ज़िन्दगी के खेल का
 जीत  होती  है  हमारी,  हार  कर हर  दाँव  यारों

तैर कर सारा समन्दर, ये हमे हासिल हुआ
डूब मरने की जगह ही, था हमारा ठाँव यारों


----------------------------------- सं. रा. धरणीधर
साभार- 'साक्षिता' ब्लॉग
http://sakshita2012.blogspot.in

कोई टिप्पणी नहीं: