सोमवार, 2 अप्रैल 2012

पूर्व केंद्रीय मंत्री एन.के.पी. साल्वे नहीं रहे


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, कट्टर विदर्भवादी व पूर्व केंद्रीय मंत्री एन.के.पी. साल्वे राजनीति में सक्रिय होने के बावजूद कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र से भी सर्मपित रूप से जुडे. थे. सामाजिक कायरें में हिस्सा लेने के लिए वे सदैव तत्पर रहते थे.

पृथक विदर्भ राज्य के निर्माण के लिए जीवनभर सक्रिय रहे. ऐसे में उनके निधन से विदर्भ आंदोलन को बड.ा धक्का पहुंचा है. 18 मार्च को साल्वे ने नागपुर में ही 91वां जन्मदिन मनाया था. उसके बाद कुछ दिनों के लिए वे दिल्ली चले गए थे. वहां उनका स्वास्थ्य बिगड. गया.उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया. रविवार 1 अप्रैल को सुबह पौने छह बजे अस्पताल में ही उनका निधन हो गया.

वे अपने पीछे पुत्र प्रसिद्ध वकील हरीश साल्वे और पुत्री सेंटर प्वाइंट स्कूल की संचालिका अरुणा उपाध्याय, बहू, दामाद, रिश्तेदारों सहित भरापूरा परिवार पीछे छोड. गए हैं. गांधी-नेहरू परिवार पर उनकी असीम o्रद्धा थी. साल्वे ने लगभग 35 साल संसद में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया और विभिन्न पदों को सुशोभित किया. मध्यप्रदेश के छिंदवाड. में 18 मार्च 1921 में उनका जन्म हुआ. फिर भी o्री साल्वे की कर्मभूमि नागपुर थी. बीकॉम के बाद उन्होंने सीए की पढ.ाई की. प्रसिद्ध वकील ननी पालखीवाला की प्रेरणा से राजनीति में आए. 1967 में बैतूल लोकसभा क्षेत्र से विजयी रहे. तब से वे इंदिरा गांधी के सबसे विश्वसनीय नेताओं के रूप में कांग्रेस में पहचाने जाने लगे. आपातकाल के बाद भी उन्होंने इंदिराजी का साथ नहीं छोड।ा। वर्ष 1980 में जब इंदिरा गांधी फिर से सत्ता में आईं तो उसके बाद वर्ष 1982 में o्री साल्वे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिला. तब से काफी समय तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में रहे. उस दौरान उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों में काम किया.

वे राजीव गांधी के विश्‍वसनीय भी रहे. देश में विद्युत क्षेत्र के निजीकरण व विदेशी निवेश को सहूलियत दिलाने में साल्वे का अहम योगदान रहा. दाभोल बिजली परियोजना उनकी ही देन है. देश की बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने विद्युत क्षेत्र के निजीकरण पर बल दिया.

राजनीति में सक्रिय होने के बाद भी उन्हें क्रिकेट से काफी लगाव था. शालेय व कॉलेज जीवन में वे नागपुर के मोदी क्रिकेट क्लब से क्रिकेट खेलते थे. वर्ष 1943 में अंपायरों के पैनल में थे. वर्ष 1982 से 1985 के बीच उन्होंने बीसीसीआई के अध्यक्ष पद को भी विभूषित किया. खास बात यह है कि उनके ही कार्यकाल में भारतीय टीम विश्‍वकप अपने नाम करने में सफल रही थी.

साल्वे को शुरू से ही कट्टर विदर्भवादी के तौर पर पहचाना जाता है. विदर्भ को अलग राज्य के रूप में वे देखना चाहते थे. उसके लिए वे सतत तत्पर रहे. इसके लिए कई बार उन्होंने संसद में भी आवाज बुलंद की. अंतिम समय तक वे विदर्भ को अलग राज्य के रूप में देखना चाहते थे. लेकिन दुर्भाग्य से उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पाई. सक्रिय राजनीति में आने के पहले वे देश के प्रसिद्ध सीए के तौर पर पहचाने जाते थे. वर्ष 1949 से उन्होंने सीए की प्रैक्टिस शुरू की थी. उस दौरान उन्होंने गायिका लता मंगेशकर, अभिनेता दिलीप कुमार जैसी हस्तियों के कर सलाहकार का काम देखा. कर प्रणाली और कर सुधार के मामले में उन्हें काफी अध्ययन था. संसद में संबंधित विषय पर उनके भाषणों को आज भी याद किया जाता है. o्री साल्वे शेरो-शायरी के भी जानकार थे. असंख्य उर्दू शेर उन्हें याद थे. अपनी शेरो-शायरी से भी वे लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते थे.

इंदिरा गांधी के प्रति निष्ठावान
एन.के.पी. साल्वे वर्ष 1967 में पहली बार बैतूल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर आए थे. तब से वे इंदिरा गांधी के प्रति निष्ठावान ही रहे. वे इंदिराजी के नजदीकी माने जाते थे. इंदिराजी का साथ उन्होंने कभी भी नहीं छोड.ा. 1977 में इंदिराजी की राजनीति में वापसी में उनका योगदान रहा.

ठुकराया मुख्यमंत्री पद
गांधी परिवार के नजदीकी o्री साल्वे को इंदिरा गांधी व राजीव गांधी की तरफ से तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उतनी ही विनम्रता से साल्वे ने राज्य का सर्वोच्च पद स्वीकार करने से मना कर दिया था. उनका कहना था कि सरपंच पद पर काम कर चुका व्यक्ति ही राज्य के मुख्यमंत्री का पद योग्य तरीके से संभाल सकता है.

क्रिकेट से असीम प्रेम
श्री साल्वे को क्रिकेट से असीम प्रेम था. शालेय जीवन से ही वे क्रिकेट खेलने लगे थे. वे नागपुर के मोदी क्लब की ओर से क्रिकेट खेलते थे. वर्ष 1982 से 1985 के बीच वे बीसीसीआई के अध्यक्ष भी रहे. वर्ष 1983 में पहली बार एशिया क्रिकेटकाउंसिल में अध्यक्ष के तौर पर उनका चयन हुआ.

अंतिम इच्छा
91वें जन्मदिवस के मौके पर एन.के.पी. साल्वे ने कहा था कि विदर्भ को अलग राज्य का दर्जा मिलना चाहिए. और यही मेरी अंतिम इच्छा भी है. उनका कहना था कि एक बार यदि विकसित क्षेत्र से किसी अविकसित इलाके को जोड. दिया जाए तो विकास विकसित हिस्से का ही होता है. इसकी तुलना में अविकसित हिस्सा और पिछड.ता जाता है. यही इतिहास में भी दर्ज है. पृथक विदर्भ के लिए उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री वसंत साठे के साथ मिलकर आंदोलन चलाने का प्रयास किया, लेकिन बढ.ती उम्र के कारण वे आंदोलन नहीं कर सके.

जीवन यात्रा

नाम : नरेंद्रकुमार प्रसादराव (एनकेपी) साल्वे
जन्म : 18 मार्च 1921
जन्मस्थल : छिंदवाड.ा (मध्यप्रदेश)
पत्नी: डॉ. अम्ब्रिती
पुत्र : हरीश साल्वे
पुत्री : अरुणा उपाध्याय
शिक्षण: बीकॉम, सीए
व्यवसाय : वर्ष 1949 से 1982 के बीच देश के प्रतिष्ठित सीए के रूप में पहचाने गए
बैतूल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व : वर्ष 1967 से 1977 तक.
राज्यसभा सदस्य -1978 से 2002 तक
1980 से 82 तक संसद में कांग्रेस के उपनेता
1982 से 83 तक सूचना व प्रसारण राज्यमंत्री
1982 से 1985 तक बीसीसीआई के अध्यक्ष
1983 से 1984 तक इस्पात व खान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
1984 में संसदीय कार्य राज्यमंत्री
1985 से 90 तक संसद में कांग्रेस के उपनेता
1987 से 1990 तक नौवें वित्त आयोग के अध्यक्ष
1993 से 1996 तक केंद्रीय ऊर्जा मंत्री
लेखन: 'इज इंडिया दी हाईएस्ट टैक्स्ड नेशन', 'स्टोरी ऑफ रिलायंस कप' नामक पुस्तक प्रसिद्ध हैं. इसके अलावा 'कर प्रणाली प्रबंध' लिखा.