सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

छिन्दवाड़ा : अनिल करमेले जी की कविता, भाग- पांच

कोल फील्ड, रेमण्ड्स, हिन्दुस्तान लीवर जैसे बड़े ही नहीं
गोंडवाना के इस जनपद की फसलों पर पलते पचासों उपक्रम
इस जनपद के बाशिंदों को
खलासी और लोडर के अलावा कहाँ कुछ बना पाए ?

मसें भीगते ही लड़के
शामिल होते रहे बेरोज़गारों की भीड़ में
तंबाकू चबाते कभी इस ब्रिगेड
कभी उस ब्रिगेड के हाथों में खेलते
पहुँचाते रहे अपना इस्तेमाल करने वालों को सदनों में