शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

बहुत पसंद हैं मुझे छिंदवाडा के लोग

छिंदवाडा मतलब छिंदवाडा- भाग -2
वो जगह दिल के हमेशा करीब होती है और उस जगह को भी अपनी सफलता का श्रेय जाता है, मगर हम सफलता की चादर से अपनी कमियों को ढकने के बजाए, मिलकर सही दिशा में काम कर सकते हैं.

छिंदवाडा कमलनाथ के नाम से तब तक जोड़ा जाएगा जब तक हम पत्रकारों को नेतागिरी के अलावा कोई ख़ास बात करने का टॉपिक नहीं देंगे. छिंदवाडा बहुत ही शांत और प्यारी जगह है, मुझे यहाँ के लोग बहुत पसंद हैं. कमी लगी तो सिर्फ एक बात की- एमबीशन .

यहाँ पर हम सब बहुत थोड़े में समाधान कर लेते हैं. स्कूल में रट-रटकर अछे नंबर ले आयें तो काफी है, कौनसी डिग्री लेनी है और क्या नौकरी करनी है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता - मगर किस डिग्री के बाद जल्दी से जल्दी ज्यादा पैसा मिलेगा ये मायने रखता है, इत्यादि.

परिवार-पड़ोसियों के प्रपंच, कांग्रेस बीजेपी के मुद्दे, 9 to 5 जॉब और शादियों की तैयारियों से बहार निकलना होगा. ये सोचिये कि जिन शहरों में प्रगति हो रही है, जैसे बम्बई या चेन्नई या कोई भी और मेट्रो. वहां अगर लोग आराम की ज़िन्दगी जिए और छोटे सपनो में समाधान कर लें, तो क्या उन शहरों में प्रगति होगी? फर्क सिर्फ सोच का है. सरकार तो पूरे भारत की झोल है, हम सारा भांडा सरकार के मत्थे नहीं फोड़ सकते!

रही बात उन लोगों कि जो छिंदवाडा में पले बढे हैं, सफल हुए हैं, मगर छिंदवाडा को श्रेय नहीं देते-

कभी गौर फरमाइयेगा कि उन सफल लोगों में काफी लोग दूसरे शहरों में जाकर पढ़ते हैं, दूसरे शहरों में काम भी करते हैं ....भारत बहुत बड़ा देश है और आप किसी भी व्यक्ति की सफलता को एक जगह से नहीं बाँध सकते. श्रेय लूटने के बजाये हमें अपना एमबीशन अपनी महत्वांकांक्षाओं बढाने पर ध्यान देना चाहिए. ये बात बिलकुल सही है कि जहां हमारी शुरुआत हुई थी वो जगह दिल के हमेशा करीब होती है और उस जगह को भी अपनी सफलता का श्रेय जाता है, मगर हम सफलता की चादर से अपनी कमियों को ढकने के बजाए, मिलकर सही दिशा में काम कर सकते हैं.

Sonia Tiwari, Animator
San Francisco (USA)


Email :sonia.emrc@gmail.com

1 टिप्पणी:

संजय भास्कर ने कहा…

sonia ji hum to aaj bhi jab chidwara jate hai.
vahi ki yadoon me kho jaate hai