गुरुवार, 20 जनवरी 2011

छिंदवाड़ा को हमने कुछ नहीं लौटाया

हम यहां 'छिंदवाड़ा मतलब छिंदवाड़ा' सीरिज की पहली कड़ी के रूप में यह अर्टिकल आपके सामने पेश कर रहे हैं। हमें आपके कमेंट, सुझाव और विचारों का इंतजार रहेगा। -
छिंदवाड़ा मतलब छिंदवाड़ा- भाग एक

वास्तव में दोषी हम ही हैं, क्योंकि किसी स्थान की पहचान, वहां रहने वालों से ही होती है और ऐसा नहीं है कि हम असफल है, या हमने कुछ किया ही नहीं है। छिंदवाड़ा के लोगों ने हर क्षेत्र में ना कमाया है और कामयाबी के शिखर तक पहुचे हैं। किंतु उस सफलता का तो छिंदवाड़ा को कभी श्रेय मिला और ही उन व्यक्तियों ने छिंदवाड़ा की ओर पलट कर ही देखा।

भारत की कुछ फीसदी जागरूक जनता जो सम-सामयिक विषयों में रुचि रखती है, वो निश्चित तौर पर छिंदवाड़ा को जानती है, क्योंकि हर लोकसभा चुनावों में छिंदवाड़ा की सीट कई राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल होती है। टीवी न्यूज चैनलों पर चुनाव के एक महीने पहले से ही छिंदवाड़ा में होने वाले संभावित घमासान की चर्चा होती है।
  • क्या छिंदवाड़ा केवल एक व्यक्ति के नाम से ही जाना जाता रहेगा?
  • क्या छिंदवाड़ा की अपनी कोई खूबी नहीं है?
  • क्या छिंदवाड़ा देश के अन्य स्थानों जितना महत्वपूर्ण नहीं है?

इन सवालों को उठाया है छिंदवाड़ा के यूथ अतिशय ने। जवाब जानने के लिए पढि़ए उनका यह अर्टिकल।

मध्य प्रदेश में रहने वाले छिंदवाड़ा को अच्छी तरह से जानते हैं, पर मध्य प्रदेश के बाहर छिंदवाड़ा की अपनी कोई विशेष पहचान नहीं है। भारत की कुछ फीसदी जागरूक जनता जो सम-सामयिक विषयों में रुचि रखती है, वो निश्चित तौर पर छिंदवाड़ा को जानती है, क्योंकि हर लोकसभा चुनावों में छिंदवाड़ा की सीट कई राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल होती है। टीवी न्यूज चैनलों पर चुनाव के एक महीने पहले से ही छिंदवाड़ा में होने वाले संभावित घमासान की चर्चा होती है और इसी बीच जनता जिन शब्दों या व्यक्तियों के नाम सुन लेती है, उन्हें लंबे समय तक याद रखती है। हर पांच वर्षों में ये शब्द और व्यक्तियों के नाम छिंदवाड़ा के नाम के साथ उनके मस्तिष्क में तरो ताज़ा होते रहते हैं।

छिंदवाड़ा की अपनी पहचान को लेकर कुछ सवाल यहां उठाए जा सकते हैं-

क्या छिंदवाड़ा केवल एक व्यक्ति के नाम से ही जाना जाता रहेगा?
क्या छिंदवाड़ा की अपनी कोई खूबी नहीं है?
क्या छिंदवाड़ा भारत के अन्य स्थानों जितना महत्वपूर्ण नहीं है?

गहराई से चिंतन किया जाए तो ऐसा कुछ भी नहीं है,

- बस हम छिंदवाड़ा वासियों ने ही कभी इसे इतनी तवज्जो नहीं दी
- हमने अपनी सफलताओं में छिंदवाड़ा के योगदान को नहीं समझा, और
- छिंदवाड़ा से बहुत कुछ लेने के बाद भी इसे कुछ नहीं लौटाया

वास्तव में दोषी हम ही हैं, क्योंकि किसी स्थान की पहचान, वहां रहने वालों से ही होती है और ऐसा नहीं है कि हम असफल है, या हमने कुछ किया ही नहीं है। छिंदवाड़ा के लोगों ने हर क्षेत्र में नाम कमाया है और कामयाबी के शिखर तक पहुचे हैं। किंतु उस सफलता का न तो छिंदवाड़ा को कभी श्रेय मिला और न ही उन व्यक्तियों ने छिंदवाड़ा की ओर पलट कर ही देखा।

पर 'जब जागे तभी सवेरा' हम अभी भी छिंदवाड़ा को इसकी पहचान दिलाने के लिए प्रयास कर सकते है।

वास्तव में, छिंदवाड़ा की अपनी एक अलग निराली बात है, बस हमें इसे समझना होगा और तभी हम दुनिया के सामने छिंदवाड़ा को इसकी अलग पहचान के साथ पेश कर पाएंगे।

- अतिशय
atishaybio@gmail.com

4 टिप्‍पणियां:

Love is Life ने कहा…

hi i m very nuch impress to your atitute dear.this is really true.

Arshad Ali

Sonia ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Sonia ने कहा…

छिंदवाडा कमलनाथ के नाम से तबतक जोड़ा जाएगा जबतक हम पत्रकारों को नेतागिरी के अलावा कोई ख़ास बात करने का topic नहीं देंगे. छिंदवाडा बोहोत ही शांत और प्यारी जगह है, मुझे यहाँ के लोग बोहोत पसंद हैं. कमी लगी तो सिर्फ एक बात की - ambition. यहाँ पर हम सब बोहोत थोड़े में समाधान कर लेते हैं. स्कूल में रट-रटकर अछे नंबर ले आयें तो काफी है, कौनसी डिग्री लेनी है और क्या नौकरी करनी है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता - मगर किस डिग्री के बाद जल्दी से जल्दी ज्यादा पैसा मिलेगा ये माईने रखता है, इत्यादि. परिवार-पड़ोसियों के प्रपंच, कांग्रेस बीजेपी के मुद्दे, 9 to 5 job और शादियों की तैयारियों से बहार निकलना होगा. ये सोचिये कि जिन शहरों में प्रगति हो रही है, जैसे बम्बई या चेन्नई या कोई भी और मेट्रो - वहां अगर लोग आराम की ज़िन्दगी जिए और छोटे सपनो में समाधान कर लें, तो क्या उन शहरों में प्रगति होगी? फर्क सिर्फ सोच का है. सरकार तो पूरे भारत की झोल है, हम सारा भांडा सरकार के मत्थे नहीं फोड़ सकते!

रही बात उन लोगों कि जो छिंदवाडा में पले बढे हैं, सफल हुए हैं, मगर छिंदवाडा को श्रेय नहीं देते - कभी गौर फरमाइयेगा कि उन सफल लोगों में काफी लोग दूसरे शहरों में जाकर पढ़ते हैं, दूसरे शेहरो में काम भी करते हैं ....भारत बोहोत बड़ा देश है और आप किसी भी व्यक्ति की सफलता को एक जगह से नहीं बाँध सकते. श्रेय लूटने के बजाये हमें अपना ambition अपनी महत्व्कान्शाएं बढाने पर ध्यान देना चाहिए. ये बात बिलकुल सही है कि जहां हमारी शुरुआत हुई थी वो जगह दिल के हमेशा करीब होती है और उस जगह को भी अपनी सफलता का श्रेय जाता है, मगर हम सफलता की चादर से अपनी कमियों को ढकने के बजाए, मिलकर सही दिशा में काम कर सकते हैं.

संजय भास्कर ने कहा…

छिंदवाडा बोहोत ही शांत और प्यारी जगह है, मुझे यहाँ के लोग बोहोत पसंद हैं