शुक्रवार, 28 मई 2010

अवधेश तिवारी



दुश्मन

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तुम मुझे
नज़र उठाकर देखना नहीं चाहते
पर,
जिधर मेरी नजरें उठती हैं
क्यों देखते हो तुम उसी ओर?

तुम
मेरी बातें सुनना नहीं चाहते
पर, मैं जिन बातों को सुनता हूं
क्यों सुनते हो तुम वहीं बातें?

तुम
मेरे साथ, रोना-हंसना नहीं चाहते
पर, जहां मैं रोता हूं, हंसता हूं
क्यों वहीं तुम भी रोने-हंसने लगते हो?

शायद
मैं केवल दुश्मन नहीं
दुश्मन से कुछ अधिक हूं।
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अवधेश तिवारी
वरिष्ठ उदघोषक , आकाशवाणी छिंदवाड़ा
07162-238238

3 टिप्‍पणियां:

राजेन्द्र मीणा ने कहा…

बहुत सुन्दर ,,,गहरा विचार

संजय भास्कर ने कहा…

तुम मुझे
नज़र उठाकर देखना नहीं चाहते
पर,
जिधर मेरी नजरें उठती हैं
क्यों देखते हो तुम उसी ओर?

शीर्षक है जो यहाँ तक खींच लाया .सुन्दर कविता.

संजय भास्कर ने कहा…

dhanyawaad ram krishan ji avdesh tiwari ji se milwane ke liye
aapka bahut bahut dhanyawaad