सोमवार, 3 मई 2010

'ये है मुंबई मेरी जान'


मुंबई लाइफ के साथ .... अरशद अली


आप अगर हार्डवर्क को सागर की गहराई तक देखना चाहते है तो यहां आपको इस बात की हकीकत पता चल जाएगी कि लोग किस हद तक मेहनत रूपी सोने के गहनों को रोज पसीने की बूंदों से चमका रहे है। ... और वो चमक कभी फीकी नहीं पड़ती। जिस तरह समुंदर अथाह, शांत, शिथिल होता है वैसे ही यहां के लोग मेहनती है।



मुंबई... लोग यहां अपनी पूरी जिंदगी लो ट्रेक से फास्ट ट्रेक तक लाने में लगा देते हैं, पर किसकी किस्मत कब बदल जाएंगी, ये कोई नहीं जानता।



''यहां राग है, यहां पाग है, यहां दिल में बस प्यार है, यहां दोस्ती, यहां दुश्मनी, दुश्मन यहां चार है"



मुंबई... अगर पूरे भारत के लोगों या उनके रहन-सहन, जीने का अंदाज जानना हो तो इससे अच्छी जगह नहीं हो सकती। हर कोई सोचता होगा कि यहां दिखावा है, ढोंग है, और तरह-तरह की बातें, क्योंकि इसे मायानगरी कहा जाता है। कुछ हद तक ये जायज भी है। क्योंकि यहां हर वर्ग, हर सोच के लोग रहते हैं। हर एक का जीने का अंदाज अलग अलग है। हर कोई अपने हिसाब से जीने पर साहस भी रखता है। परन्तु इससे अलग या इससे हट कर इस जगह का दूसरा पहलू है। अगर यहां दिखावा है तो साथ ही हार्डवर्क भी है।



आप अगर हार्डवर्क को सागर की गहराई तक देखना चाहते है तो यहां आपको इस बात की हकीकत पता चल जाएगी कि लोग किस हद तक मेहनत रूपी सोने के गहनों को रोज पसीने की बूंदों से चमका रहे है। ... और वो चमक कभी फीकी नहीं पड़ती। जिस तरह समुंदर अथाह, शांत, शिथिल होता है वैसे ही यहां के लोग मेहनती है।


मुंबई... यहां हर मजहब, हर कौम, हर प्रांत से आए हुए तरह-तरह के लोग अपना आशियाना बना लेते है। जिस तरह छोटी-छोटी नदियां समुंदर में आकर समा जाती है। और इस चमक-दमक भरी नगरी में अपनी एक अलग पहचान बनाने केलिए लगातार कोशिशें करते हुए इंसान। यहां पर हम इस तरह के कई वर्गों में बांट सकते हैं; मेहनत का स्तंभ यहां पर आपको जरूर दिखेगा। यहां रोज की भागती-दौड़ती जिंदगी में हर एक शख्स बहुत से अरमान लिए उड़ता है। यहां शायद कोई किसी से इसलिए जुड़ा नहीं है, जैसे आम लोगों की सोच है। क्योंकि अगर वो इस दौड़ भरे खेल में पीछे रह जाएंगे, और हो सकता है हार भी जाएं। इसलिए हर कोई अपने आप से भी चुप है। और हर जगह, हर सोच में अपने आप को देखता है।



कोई यहां एक्टर, एक्ट्रेस बनने के सपने को लेकर आता है, कोई जीवन रूपी मंदिर को सजाने आता है, कोई समाज से या खुद से धोखा खाया आता है। यहां सबकी अलग-अलग कहानी है। यहां भिखारी, मोची से लेकर हर इंसान की एक अलग दुनिया है। यहां सांसे चलती नहीं दौड़ती है, ट्रेनें खुद का ही पीछा करती है। इमारतें आकाश को छूना चाहती है, मंजिलें सिमट कर रह गई है, वाकई ऐसी मिसाल शायद और कहीं न मिले। अलगाव इस रूप में नहीं है कि हम सभी या यहां कोई एकजुट नहीं है। कभी खामोशी या अशांति के दीवाने अपने बेबुनियाद इरादों को लेकर आते हैं, तो सभी मिल कर 'जय हो' के नारे से जुड़े है।


समय शायद धोखा खाता होगा कि काश मैं २४ घंटों से ज्यादा का बना होता, यहां का जीवन समुद्र की तरह चारों ओर ख्वाबों से घिरा है। किसी के पूरे हो जाते है, किसी के अधूरे रह जाते हैं। कोई टूटते तारों की तलाश में है, तो कोई आसमान से भी पार है। पर सभी एक ख्वाब रूपी आसमान में उस सुकून भरी बूंदों के लिए बेताब रहते है, जो शायद अपने ही पसीनों के साथ रोज मिल जाता है। हमें अहसास भी नहीं होता। ठोकर खाते हैं तो लगता है, अरे ये पत्थर तो मैंने ही उठाया था। रास्तों में भी शायद मेरी वजह से आया है।



यहां जिंदगी की हर रंगत, सेलेब्रेशन एक अलग ही अंदाज में सेलेबे्रट किया जाता है। क्योंकि यहां की अपनी एक अलग ही सोच है। 'जीयो और जीने दो' जो हमारे पास आज वक्त है तो हमारा है, और हम उसे पूरी तरह जीएंगे। हम जैसे लाखों लोगों की भी यही कहानी है। बस इसी आस से जीते चले जाते है कि कभी तो...


" Give me some sunshine


Gibe me some rain


Give me another chance


I want to grow up once again "

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