सोमवार, 9 मार्च 2009

आकाशवाणी छिन्दवाड़ा : धर्म टेकड़ी के माथे पर जैसे मुकुट


आकाशवाणी छिन्दवाड़ा का 7 मार्च को स्थापना दिवस होता है। बाबा की डायरी में उन यादों को बखूबी संजोया गया है, जब रेडियो स्टेशन का शुभांरभ होने वाला था। इसका शुभांरभ 7 मार्च, 1992 को तत्कालीन पर्यावरण राज्य मंत्री कमलनाथ जी ने किया था।

बाबा की डायरी से -
दिनांक 6-3-92

गिरीश वर्मा ने आज भोपाल के लिये एक इंटरव्यू लिया। आकाशवाणी परिसर पहली दफा देखा। काफी विशाल क्षेत्र में निर्माण कार्य हुआ है। धर्म टेकड़ी के माथे पर जैसे मुकुट। नीचे के चारों दिशाओं में दृष्टि गोचर होने वाले दृश्य बड़े रमणीय लगे। कभी डोंगरगढ़ की बोमलाई मंदिर में जाने का अवसर मिला था, कुछ कुछ इसकी छबि आज अनायास छिन्दवाड़ा में देखने को मिली।

क्या कारण है कि हम जितना ऊपर से देखें नीचे की सुन्दरता बढ़ती जाती है शायद इसलिये कि जो हमसे दूर होता जाता है वह अधिक प्रिय बनता है। यही प्रेम और प्रीत फिर सौंदर्य में बदल जाती होगी। ऊंचाई पर खड़े होकर सब कुछ सुंदर हो जाता है और जब सब कुछ सुंदर लगने लगे तो समझिये आदमी का मन और उसकी आत्मा किसी फरिश्ते के श्वेत पंख बांध कर स्वर्ग में सैर करने लगती है। सौंदर्य की पवन का अहसास होते ही हम किसी आत्मिक आनंद की नीली झील में कमल पुष्प के समान हिलोरे लेने लगते हैं।

पहाड़ों पर रहने वाले, हिमालय की तराई और काश्मीर जैसे स्थानों पर निवास करने वाली वहां की अमीर गरीब जनता में शायद इसी कारण हम लोगों से अधिक मस्ती, उत्साह और साफ-गोई होती है। पहाड़ों पर बसने वाले आदिवासी अनपढ़ गंवार तो अपनी सादगी और ईमानदारी के लिये मशहूर है ही। दुनिया की हर जगह देखा गया है कि मंदिर, चर्च और दूसरे धार्मिक स्थल अक्सर ऊंचाई पर बने है। जैन, बौध्द और हिन्दू पूजा स्थल पहाड़ों पर अधिक है। अपने आराध्य से मिलने के लिये आनंद की गंगा में स्नान आवश्यक है। आंतरिक उत्स की भेंट ही पहली शर्त है, जिसको प्रियतम की देहरी पर अर्पित किया जा सकता है।

आज पहली मर्तबा देख पाया कि छिन्दवाड़ा नगर उसके चारों ओर का दृश्य कितना सुन्दर है। आधुनिक यंत्रों से सुसज्जित इमारतें तो अभी पूरी तरह से खुल भी नहीं पाई हैं। आज रंग रोगन और सौंदयीर्करण समाप्त हो रहा है। कल सुबह 7 तारीख (7 मार्च, 1992) को 10.30 पर पर्यावरण राज्य मंत्री कमलनाथ जी इसका शुभांरभ कर रहे हैं। मुख्य समारोह स्टेडियम में होगा।

अपना इंटरव्यू रिकार्ड करा कर आ गया हूँ। साथ ही गोवर्धन यादव है, उनकी भी कविता भोपाल के लिये रिकार्ड की गई है। प्रेस आकर पता लगा कि नगरपालिका भवन में आज कुछ देर बाद मेरा सम्मान कमलनाथजी करने वाले है और वहां जाना है। इसके पूर्व कोई सूचना नहीं थी। आकाशवाणी वालों ने पहुंचा दिया। मनगटे, जलील, सलीम, राजेन्द्र राही सभी हैं।

सम्मान समारोह सतपुड़ा आंचलिक पत्रकार संघ के अधिवेशन अवसर पर किया गया। रवि दुबे, हलदुलकर, पांडे, रवि ज्वाला, शंकर साहू का भी सम्मान हुआ। थोड़े इंतजार के बाद कमलनाथजी पहुँच पाये। छ: जिलों से कोई दो सौ के करीब पत्रकार इकत्र हुये थे। समारोह के अंत में साकेत में डिनर था, मैं नहीं गया।

बाबा की डायरी से - दिनांक 6-3-92

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