मंगलवार, 7 अक्तूबर 2008

विजया दशमी पर शुभकामनाएं, बाबा धरणीधर की चिंताएं,

आप सभी को दशहरा और दीपावली की शुभकामनाएं।
आज हम बाबा की डायरी का अंश आपके सामने रख रहे हैं। इस पर क्या लिखा जाए। बाबा की चिंताएं.... आतंकवाद, अलगाववाद, फिजूलखर्ची, चाटुकारिता और धर्म की आड़ में मनमानी आज भी जारी है।

उम्मीद है बाबा धरणीधर को पढ़कर आपको अच्छा लगेगा।


बाबा धरणीधर की डायरी से------

आज पूरे भारत में यह रुग्ण मानसिकता काम कर रही है। धर्म की आड़ लेकर जबरन चंदा वसूली से लेकर आठ दस दिन तक अराजकता गुंडागिरी सब कुछ हो जाता है। फिर यही धार्मिक तथाकथित आस्था, साम्प्रदायिकता बनकर गंभीर परिस्थितियां निर्माण करती है। हर शांतिप्रिय और सफल नागरिक पूरे महोत्सव के दिनों भयभीत रहता है। लाऊंड स्पीकरों का विकराल संगीत नींद हराम तो कर ही देता है। शासन और प्रशासन अलग परेशान कि कहीं कुछ हो न जाये।

साक्षिता-2
बाबा धरणीधर की डायरी
प्रधान संपादक - हनुमंत मनगटे

संपादक- पं. राजेन्द्र राही मिश्रा
प्रकाशक- म.प्र. हिन्दी साहित्य सम्मलेन छिन्दवाड़ा
बाबा स्व. संपतराव धरणीधर की डायरी के अंश

दिनांक 18-10-91 विजया दशमी
आज प्रेस से आ रहा हूं। मशीन की पूजा हर साल के मुताबिक विशेष नहीं। विशेष यह कि महाराष्ट्रीय पंचांग वालों ने पूरे बड़बन और विवेकानंद कॉलोनी वालों ने कल 17 को यह पर्व मना लिया। मोटे रूप में उत्तर भारत वाले आज विजयादशमी का पूजन कर रहे हैं। उत्तर भारत में कल रुद्रपुर गांव में खूनी दशहरा हुआ। किसी रामलीला केदर्शकों के बीच दो जगह बम विस्फोट हुआ 46 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। कहते हैं विजयादशमी मुहूर्त में किया गया कार्य शुभ होता है कौन कहेगा कि आतंकवादियों का यह दुभाग्यापूर्ण काम शुभ है? लगता है सारे देश में आतंक और अलगाववाद ने अपनी जड़ें काफी मजबूत कर ली हैं। कोई ऐसी सूरत नजर नहीं आती जो निकट भविष्य में इसका खात्मा कर दे।

नवाब शरीफ और नृसिंहराव हरारे में आपसी मेल जोल की बात कर रहे हैं और यहां दिनों दिन उग्रवादियों की गतिविधियां बढ़ रही है। आज दिन भर शारजांह में मैच चला। भारत विजयादशमी के दिन भी भारत विजय हुई थी।

शाम को शफक और जलील आये थे दशहरे की मुबारकबाद लेकर। आज कल छिन्दवाड़ा का दुर्गा उत्सव रात्रि में न होकर दूसरे दिन विसर्जन जुलूस बनता है। इसमें धर्म की या आस्था भक्त की उतनी चिंता नहीं जितनी अपने अपने मंडल और मोहल्ले की शान और प्रतिष्ठा की बात है। गंज वालों ने अपनी दुगाü और उसके डेकोरेशन पर साठ सत्तर हजार रुपयों का खर्च किया बताते हैं। प्रतिस्पर्धा अर्थ-प्रदर्शन और उथले आडम्बर के सिवाय यहां कुछ भी नहीं। यह शुरुआत भी वहीं से हुई जहां से दुर्गा स्थापना इतिहास शुरु होता है।

बंगाल में अंग्रेजों ने जब अपना वर्चस्व कायम कर आम बंगाली पर अपने सामंती प्रवत्ति की छाप डालना शुरु की तो धार्मिक और सांस्कृतिक कर्मकांड पर अंग्रेजों को प्रसन्न करने के लिये होने लगे। बड़े बड़े बंगाली जमींदार और पूंजीपतियों, व्यापारियों ने अपने दुर्गा मंडपों में अंग्रेज प्रभुओं को आमंत्रित कर उनके कर कमलों से देवी की पूजा करवाना शुरू किया। अंग्रेजों की मेमों को खुश करने के लिये देवियों के चहरे तक उन मेमों के चेहरों से मिलते जुलते बनवाये जाने लगे।

सम्राज्ञी विक्टोरिया जैसे दिखने वाली दुर्गा मूर्तियां बड़ी लोकप्रिय होती गई। अंग्रेजों ने भी बंगाल की इस रुग्ण मानसिकता का फायदा उठाकर नवदुर्गा के अवसर पर बंगाल को कई सहूलियते दी। पूजा हॉलीडे से तो बंगाल अभिभूत हो गया। आज पूरे भारत में यह रुग्ण मानसिकता काम कर रही है। धर्म की आड़ लेकर जबरन चंदा वसूली से लेकर आठ दस दिन तक अराजकता गुंडागिरी सब कुछ हो जाता है। फिर यही धार्मिक तथाकथित आस्था, साम्प्रदायिकता बनकर गंभीर परिस्थितियां निर्माण करती है। हर शांतिप्रिय और सफल नागरिक पूरे महोत्सव के दिनों भयभीत रहता है। लाऊंड स्पीकरों का विकराल संगीत नींद हराम तो कर ही देता है। शासन और प्रशासन अलग परेशान कि कहीं कुछ हो न जाये।

आपका ही
रामकृष्ण डोंगरे

गुरुवार, 2 अक्तूबर 2008

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छिन्दवाड़ा शहर के आकर्षण

मुख्य व्यापारिक केन्द्र

गोलगंज, गांधीगंज, छोटा बाजार, शनिचरा बाजार और मानसरोवर काम्पलेक्स

धार्मिक स्थल

गोलगंज में काँच जैन मंदिर, पातालेश्वर में स्थित शिव मन्दिर, छोटी बाज़ार में राम मंदिर, नागपुर रोड पर हनुमान मंदिर, मेन रोड पर पुरानी जामा मस्जिद, सत्कार चौराहा पर प्रसिद्ध दरगाह, खजरी रोड पर कैथोलिक चर्च, विवेकानंद कॉलोनी में साई मंदिर, स्टेशन रोड पर पुराना गुरुद्वारा

स्पोर्ट्स स्टेडियम

पुलिस ग्राउंड, शुक्ला ग्राउंड, पोला ग्राउंड और मेन स्टेडियम। एक पुरानी और प्रसिद्ध जिमनैजियम (सर्वोत्तम हेल्थ क्लब) भी है।

शहर की पहचान बनीं प्रतिमाये ....

फव्वारा चौक पर महात्मा गांधी की मूर्ति, ईएलसी चौक पर शिवाजी महाराज की प्रतिमा , इंदिरा चौक पर इंदिरा गाँधी की मूर्ति , ओल्ड पावर हाउस पर प्रतुल चन्द द्विवेदी की प्रतिमा और सत्कार चौराहा पर भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति ।

विद्या निकेतन स्कूल परिसर में हिन्दी प्रचारणी समिति की पुरानी लायबेरी । नई- पुरानी हजारों पुस्तकों का संग्रह है, नवीनतम पत्रिकाओं और हिन्दी, अंग्रेजी समाचार पत्रों का संग्रह भी.

देखने के लिए अन्य अच्छी जगह

चार अच्छे सिनेमा हॉल, बीएसएनएल कार्यालय, नया बस स्टेशन और मानसरोवर कॉंम्प्लेक्स