गुरुवार, 14 अगस्त 2008

मुझे फांसी पे लटका दो

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस विशेष पोस्ट ....

मुझे फांसी पे लटका दो


पत्रकार एवं साहित्यकार बाबा स्व. श्री संपतराव धरणीधर एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी जाने जाते रहे .

यहाँ हम उनके इसी रूप को याद कर रहे है . पेश है यह कविता ---

मुझे फांसी पे लटका दो .


मैं ईमान से कहता हूँ कि मैं देशद्रोही हूँ


मुझे फांसी पे लटका दो
कि मैं भी एक बागी हूँ .


ये कैसा बाग़ है जिसमे गुलों पर सांप लहराते
ये कैसा राग है जिसमें सुरों से ताल घबराते


तुम्हारी ये बज्म कैसी जहाँ गुलज़ार हैं सपने
तुम्हारे दीप ये कैसे , लगे जो शाम से बुझने


ऐसे अधजले दीपक जलाना भी मनाही है
तो मैं ईमान से कहता हूँ कि
मैं देशद्रोही हूँ .


मुझे फांसी पे लटका दो
कि मैं भी एक बागी हूँ .


( पत्रकार एवं साहित्यकार बाबा स्व. श्री संपतराव धरणीधर एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी जाने जाते रहे . यहाँ हम उनके इसी रूप को याद कर रहे है . पेश है यह कविता --- मुझे फांसी पे लटका दो . १९४६ मैं नागपुर केंदीय जेल में जेलर एवं जेल कर्मचारियों को तंगाने के लिए यह रचना बाबा एवं उनके ७०० साथी जोर -जोर से गाते थे . )


बाबा स्व. श्री संपतराव धरणीधर


जन्म १० मार्च , १९२४ और निधन १५ मई , २००२
रचनाए- गजल संग्रह " किस्त किस्त जिंदगी "

कविता और लोकगीतों का संग्रह " महुआ केशर "

कविता संग्रह - नहीं है मरण पर्व

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