शनिवार, 28 जून 2008

लीलाधर मंडलोई


Leeladhar Mandloi, Hindi-Poet


लीलाधर मंडलोई


[ हिन्दी कविता के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर और दूरदर्शन के उप महानिदेशक लीलाधर मंडलोई कविता के अतिरिक्त गद्य लेखन के लिए भी जाने जाते हैं। ]


जन्म स्थान ग्राम-गुढ़ी, जिला-छिन्दवाड़ा, मध्यप्रदेश, भारत

कुछ प्रमुख कृतियां
घर-घर घूमा, रात-बिरात,

मगर एक आवाज(कविता संग्रह),
ये बदमस्ती तो होगी,
देखा पहली दफ़ा अदेखा(काव्य पुस्तिका),

अंदमान-निकोबार की लोक कथाएँ,
पहाड़ और परी का सपना(लोक कथाएँ),
चाँद पर धब्बा, पेड़ बोलते हैं ( बालकहानी संग्रह),
इसके अतिरिक्त गद्य की विभिन्न विधाओं में लेखन प्रकाशन।
विविध चेखव की कथा पर फिल्म एवं प्रख्यात कथाकार ज्ञानरंजन पर वृत्तचित्रका निर्देशन।
घर -घर घूमा कविता संग्रह पर मध्यप्रदेश साहित्य परिषद केरामविलास शर्मा सम्मान से पुरस्कृत,
रात-बिरात कविता संग्रह मध्य प्रदेश साहित्य सम्मेलन के वागेश्वरी पुरस्कार तथा मध्य प्रदेश कला परिषद के रज़ा सम्मान से सम्मानित। कई देशों की यात्रायें।


लीलाधर मंडलोई की एक कविता

बहुत कुछ बीच-बाज़ार

कुछ पेड़ हैं वहाँ कि इतने कम
एक कुत्ता है कोठी में भागता-भौंकता
बकरियाँ व्यस्त हैं इतनी कि मुश्किल से
ढूँढ पातीं घास के हरे तिनके कि उगे कहीं-कहीं

सड़क जो पेड़ों के पीछे बिछी उस पर
कारों के दौड़ने के दृश्य ख़ूब
और एक साइकिलवाला है चेन उतारने-चढ़ाने में मशगूल
इधर कमरे में जो बैठा हूँ देखता
निचाट अकेलेपन की स्थिर हवा का शिकार

पुरानी पड़ चुकी ट्यूबलाइट से रोशनी इतनी कम
कि उदास होने के अहसास में डूबी चीजें
कहीं कोई हड़बडी नहीं कि बदलती है सदी
एक मेरी अनुपस्थिति की हाज़िरी के बग़ैर
बाज़ार में बढ़ती ललक है हस्बमामूल

दुकानों का उजाला चौंधता बंद आँखों में इस हद
कि बची-ख़ुची रेजगारी उछलती हाथों से
रोकता मैं कि आख़िरी दिन है तिस पर
देखता कि लुट रहा है बहुत कुछ बीच-बाजार


('मगर एक आवाज़' से)

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

आभार लीलाधर का परिचय और रचना प्रस्तुत करने के लिए.