बुधवार, 18 जून 2008

प्रकृति में पुराण- पचमढी

प्रकृति में पुराण- पचमढी


पातालकोट, हांडी खोह, धूपगढ, कैथलिक चर्च और क्राइस्ट चर्च भी दर्शनीय स्थान

उत्तर भारत के पर्वतीय स्थलों से हटकर किसी और दिशा में घूमने निकलना हो तो आप मध्य प्रदेश के सबसे ऊंचे स्थान पचमढी पहुंच जाएं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह आदर्श पर्यटन स्थल है। सतपुडा की पहाडियों से घिरा स्थल मध्य प्रदेश के हरे नगीने के समान है। इसे प्रकृति ने बडी तन्मयता से संवारा है। यहां की प्राणदायक शुद्ध वायु सैलानियों में नए जोश का संचार कर देती है। यहां आकर पता चलता है कि नियमित जीवन की आपाधापी से कुछ दिन का अवकाश कितना जरूरी है।

पचमढी में चाहें तो वहां की साफ-सुथरी शांत सडकों पर घूमते रहें या फिर चारों दिशाओं में फैले मोहक स्थानों की सैर कर आएं। यहां मौजूद कई धार्मिक स्थल इस सैरगाह को आस्था से भरपूर एक अलग ही गौरव प्रदान करते हैं, जबकि झरने शीतलता तो देते ही हैं, इसका प्राकृतिक गौरव भी बढाते हैं। शैलाश्रयों में प्राचीन शैलचित्र उत्सुकता जगाते हैं और जंगल प्रकृति के संसर्ग में भटकने को आमंत्रित करते हैं।

पचमढी के देवालय : जटाशंकर एक पवित्र गुफा के रूप में ऊंची-ऊंची चट्टानों के मध्य स्थित है। यहां की रॉक फॉर्मेशन ऐसी है मानो शिव की जटाएं फैली हों। कहते हैं भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव ने यहीं आश्रय लिया था। यहां पावन शिवलिंग के दर्शन होते हैं। महादेव एक 35 फुट लंबी गुफा में स्थित शिवालय है। यहां निरंतर जल टपकता रहता है। यह शिव भक्तों की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। हर महाशिवरात्रि पर यहां भव्य मेला लगता है। इसके पास ही छोटा महादेव एवं गुप्त महादेव भी पवित्र स्थल हैं। चौरागढ पहाडी का मार्ग पैदल ही तय करना पडता है। करीब चार किलोमीटर का यह पहाडी मार्ग हरियाली से घिरा है। इस पहाडी पर भी एक शिव मंदिर है। जहां त्रिशूल चढाने की परंपरा है। पचमढी को यह नाम पांडव गुफाओं से मिला था, जिन्हें पचमढी यानी पांच कुटी कहा जाता था। मान्यता है कि अपने वनवास के दौरान पांडव कुछ समय इन गुफाओं में रहे थे।

मनमोहक झरने : पचमढी में कई सुंदर झरने है, जिन्हें देखने के लिए घने वृक्षों के मध्य होकर जाना होता है। इनमें बी-फाल, डचफाल और सिल्वर फॉल प्रमुख हैं। ये झरने ऐसे चमकते हैं मानो चांदी पिघल रही हो। इनके पास ही अप्सरा विहार तथा सुंदर कुंड नामक स्थान पर सुंदर जलाशय भी सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

अन्य स्थान : प्रियदर्शनी एक ऐसा व्यू पॉइंट है जहां से प्रकृति के दिलकश नजारे देखने को मिलते हैं। इसके अलावा हांडी खोह, धूपगढ, पातालकोट, कैथलिक चर्च और क्राइस्ट चर्च भी दर्शनीय स्थान हैं। इस तरह देखा जाए तो पचमढी की शांत फिजाओं में 4-5 दिन आराम से बिताए जा सकते हैं।

20 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

आभार इस पोस्ट के लिए. ऐसे ही घुमवाईये छिंदवाड़ा के चारों तरफ. कभी पांडुरना वगैरह पर भी लिखें.

प्रभाकर पाण्डेय ने कहा…

सुंदर, सामयिक और ज्ञानवर्धक प्रस्तुति के लिए आभार। लिखते रहें हम पढ़ते रहेंगे।

RAVI MANKAR ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
RAVI MANKAR ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
RAVI MANKAR ने कहा…
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RAVI MANKAR ने कहा…

सुर्यपुत्री माँ ताप्ती का उदगम स्थल मुलताई बैतूल-बारह ज्योतिर्लिंग बैतूल

RAVI MANKAR ने कहा…

धन्य है वो पचमढी निवासी जिन्होने भोलेनाथ की नगरी मे जन्म लिया

ravindra mankar ने कहा…
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kamdeo davande ने कहा…

जय महाकाल_गुप्तेश्वर शिव मन्दिर आठनेर

माँ शेरोवाली दुर्गा का बेटा_रविन्द मानकर ने कहा…

jai mahakal

माँ शेरोवाली दुर्गा का बेटा_रविन्द मानकर ने कहा…

माँ भगवती सती के 52 शक्तिपीठ जो भारतीय उपमहाद्विप मे है|

माँ शेरोवाली दुर्गा का बेटा_रविन्द मानकर ने कहा…

माँ ताप्ती का जन्म सुर्य देवता के तेज को कम करने के लिए हुआ था| माँ सुर्यपुत्री ताप्ती संसार की सबसे पहली नदी है| जब तक सुरज चाँद रहेंगे_तब तक माँ ताप्ती तेरा नाम रहेंगा|

mahakal bhakt-ravindra mankar ने कहा…

छोटा महादेव बैतुल_जब भस्मासुर गुप्तेश्वर आठनेर पहुच चुका था तब भगवान शिव मठारदेव बाबा अर्थात भोपाली पहुचे थे| यहाँ पर प्रतिवर्ष शिवरात्री को मेला लगता है| भोपाली मे रूकने के पश्चात पचमढी गये थे|

mahakal bhakt-ravindra mankar ने कहा…

Gupteshwar shiv mandir athner_betul

mahakal bhakt-ravindra mankar ने कहा…

अम्बा माँ धाम आठनेर_सारबरडी महाराष्ट्र बाडर बैतूल म.प्र.

mahakal bhakt-ravindra mankar ने कहा…

Shiv Mandir sawangi_athner_betul{बैतुल जिले का एक भक्ति ग्राम है जिसमे शिव भक्ति सबसे ज्यादा की जाती_जय महाकाल}

mahakal bhakt-ravindra mankar ने कहा…

makkeshwar shivling{मक्का मे वर्तमान मे जो हजे अस्वद है वो मक्केश्वर शिवलिंग है पहले वहाँ काबा सनातन शिव मन्दिर था |मक्का हिन्दुओ का प्राचिन तीर्थ स्थल था|}

mahakal bhakt-ravindra mankar ने कहा…

रामकिशोर डोंगरे जी मै महाकाल भक्त आपसे अनुरोध कर रहा कि आप ने जो लिखा है वो बहुत ही अच्छा और देखने लायक है परन्तु आप चौरागढ ,धुपगढ,पातालकोट और भगवान शिव के दार्शनिक स्थानो की अधिक से अधिक फोटो नेट पर जोडे_जय महाकाल

RAVI MANKAR ने कहा…

कहे जाते हैं। सतपुड़ांचल की हरी-
भरी वादियों में बसे मठों के मठाधीश बाबा मठार
देव के चमत्कार जग जाहिर हैं। बैतूल जिले
का प्रमुख औद्योगिक नगर सारनी देश-प्रदेश
में सतपुड़ा ताप बिजली घर के रूप में
जाना जाता है। यह नगर सतपुड़ा की हरी-
भरी वादियों के बीच इटारसी-नागपुर रेल मार्ग
के घोड़ाडोंगरी रेल्वे स्टेशन से 18
किमी की दूरी तथा राष्टï्रीय राजमार्ग
की मुख्य सड़क के बरेठा ग्राम से 32
किमी की दूरी पर स्थित है। इस
सतपुड़ा की सुरम्य पर्वत माला में 3028 फीट
की ऊंचाई पर श्री-श्री 1008 बाबा मठारदेव
महाराज का मंदिर बना है। किदवंती कथाओं के
अनुसार समूचे मध्यप्रदेश एवं महाराष्टï्र के
असंख्य श्रद्घालू भक्तों की आस्था के
प्रतीक श्री श्री 1008 बाबा मठारदेव ने 300
वर्ष पूर्व इस शिखर पर तप किया था।
ऐसी मान्यता है कि तीन शताब्दी पूर्व
बरेठा बाबा, बागदेव बाबा तथा मठारदेव
बाबा नामक तीन चमत्कारी संत पुरूष भगवान
शिव के उपासक के रूप में प्रसिद्घ थे।
बाबा मठारदेव के तप बल के प्रताप से ही बीते
कई सालों से क्षेत्र के लोगों का जीवन
खुशहाल एवं संपन्न है। बाबा की पहाड़ी के नीचे
कल-कल कर बहती तवा नदी के किनारे
बना सारनी ताप बिजली घर एवं प्रचुर मात्रा में
जमीन के गर्भ में छुपी पाथाखेड़ा की 8
कोयला खदानों में से निकलने
वाला कोयला बाबा के चमत्कार की देन है।
मौजूदा दौर में सारनी ताप बिजली घर में
बिजली का विपुल कीर्तिमान उत्पादन और
पाथाखेड़ा की खदानों को मिलने वाले पुरूस्कार
बाबा के आशिर्वाद का प्रसाद मानते हैं।
बाबा के चमत्कार के कारण उनके
अनुयायी विभिन्न धर्म, संप्रदाय
तथा आचार-विचार के बाद भी बाबा के दरबार
में अपनी मुराद के लिए दौड़े चले आते हैं।
मनचाही मुराद पूरी होने पर बाबा के स्थान पर
बकरे, मुर्गे की बलि देते हैं। बाबा के चमत्कार के
बारे में सारनी ताप बिजली घर के
कर्मचारी बताते हैं कि बाबा के मंदिर में 1966 में
तत्कालिक सतपुड़ा ताप बिजली घर के
प्रोजेक्ट आफिसर डीएस तिवारी ने पहली बार
बिजली पहुंचाई जो आज तक जल रही है।
कहा जाता है कि 1966 से सारनी ताप
बिजली घर में दुर्घटनाएं तथा अकाल मौत में
कमी आई है। एक बार बाबा के मंदिर में लाईट
नहीं जली तो 31 मार्च 83 को 12 लोग जल गए।
जिसमें 6 की जीवन लीला समाप्त हो गई।
इसी तरह एक बार फिर मंदिर की बिजली गुल
हो गई तो 14 लोगों को ले जा रही नाव राजडोह
में डूब गई। जिसमें एक भी जीवित नहीं बचा। 93
में बंकर की क्षति के पीछे भी मंदिर
का अंधेरा बताया जाता है। लोग शाम होते
ही बाबा की लाईट देखकर ताप बिजली घर
की तथा आम जन मानस
की खुशहाली की कामना करते हैं। बाबा

RAVI MANKAR ने कहा…
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