गुरुवार, 31 मई 2018

पाकिस्तान के बाद माता हिंगलाज का देश में एकमात्र मंदिर अंबाड़ा में



मंदिर के प्रति लोगों की आस्था इस कदर है कि नवरात्र में हर दिन दस हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं

छिंदवाड़ा। माता हिंगलाज का देश में एकमात्र मंदिर छिंदवाड़ा जिले में है। इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक है। माता रानी के प्रति लोगों की आस्था इस कदर है कि नवरात्र में हर दिन दस हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन करने और आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार में लगाई गई हर अर्जी पूरी होती है। ज्ञात हो कि मां हिंगलाज का दूसरा मंदिर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हैं, जिसके प्रति हिन्दुओं के अलावा मुस्लिमों में भी अटूट आस्था है।

भारत में प्राचीन हिंगलाज मंदिर छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर उमरेठ थाना क्षेत्र के अम्बाड़ा में है। क्षेत्र के बुजुर्ग बातते हैं कि हिंगलाज भवानी का एक मंदिर देश में है और दूसरा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में है, जहां हिन्दुओं के अलावा मुस्लिम परिवार भी दर्शन करने पहुंचते हैं।

श्रद्धालुओं की लगती कतार
हिन्दू नव वर्ष और चैत्र व कुवार नवरात्र के दौरान मां हिंगलाज के दर्शन करने अम्बाड़ा में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। महिलाओं और पुरुषों की लम्बी कतार दर्शन करने के लिए लगती है। जानकारी के अनुसार 10 हजार से अधिक श्रद्धालु हर दिन माता हिंगलाज का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।

बेहतर व्यवस्थाएं
मंदिर परिसर में जहां सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात रहने के साथ सीसीटीवी लगे हैं। वहीं परिसर में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूला-चकरी व अन्य खिलौने हैं। परिसर में ही पेजलय की बेहतर व्यवस्था है। प्रवेश द्वार पर करीब एक फीट गहरा और तीन फीट लम्बा व 15 फीट से अधिक चौड़ा सीमेंटेड गड्ढा बनाया गया, जिसमें अनवरत पानी बहता है, उसमें ही श्रद्धालुओं के पैर धुल जाते हैं और फिर वे मंदिर में प्रवेश कर पूजा-अर्चना करते हैं।

गूंजते माता के गीत
नव वर्ष और नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर संगीतमय भजन गूंजते रहते हैं। यहां धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं, जिनमें प्रसिद्ध कलाकारों ने देवी भजनों, गीतों की प्रस्तुति देते हैं। भजन मंडलिया जगराता करती हैं। मंदिर परिसर वृहद व व्यवस्थित होने के कारण कई श्रद्धालु परिवार के साथ पिकनिक मनाते नजर आते हैं।

नवरात्र में लगता मेला
यहां चैत्र और कुवार नवरात्र महोत्सव के दौरान मंदिर में करीब एक हजार से अधिक ज्योति कलश स्थापित किए जाते हैं। नौ दिनों तक भक्तों का माता के दर्शन करने तांता लगा रहता है। मंदिर के समीप ही ग्रामीणों की आवाजाही को देखते हुए घरेलू सामग्री व मनोरंजन की दुकानें लगती हैं।

मंदिर की खासियत
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि राजस्थान के काठियावाड़ इलाके में हिंगलाज देवी की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। हिंगलाज माता को काठियावाड़ के राजा की कुलदेवी माना जा था। प्राचीन काल में राजा के वंशजों को जीविकोपार्जन के लिए छिंदवाड़ा आना पड़ा था। तब वे अपने साथ हिंगलाज माता की प्रतिमा भी ले आए और छिंदवाड़ा में एक कोल माइन के पास इसे स्थापित किया गया। तभी से यहां हिंगलाजा देवी पूजी जाने लगीं।

नहीं हटी थी मूर्ति
बुजुर्ग बताते हैं कि 110 वर्ष पूर्व 1907 में कोलमाइन के अंग्रेज मालिक ने अपने कर्मचारियों को मूर्ती हटाने का काम सौंपा था, लेकिन मजदूरों की तमाम कोशिशों के बावजूद  मूर्ती हिली तक नहीं थी और जब मालिक घर जाकर सो गया। उसे सपने में हिंगलाज माता आई और मूर्ती न हटाने की चेतावनी दी थी। अगली सुबह अंग्रेज ने यह बात मजदूरों को बताई और फिर से मूर्ती हटाने के आदेश दे कर पत्नी के साथ खदान में अंदर घूमने चला गया। इधर, मजदूर मूर्ती हटाने का प्रयास करने लगे और दूसरी ओर जैसे ही अंग्रेज खदान के अंदर गया, खदान में पत्थर धंसका और अंग्रेज खदान में जिंदा दफन हो गया। कहा जाता है कि उस रात वहां तेज विस्फोट हुआ और आग की लपटें निकलीं।

हिंगलाज माता की मूर्ती अपने आप उठकर जंगलों में आकर विराजमान हो गई। कुछ समय बाद लोगों को जंगलों में इमली के पेड़ के नीचे हिंगलाज माता की मूर्ती मिली और फिर यहां उनका मंदिर बनाया गया। अब यह मंदिर छिंदवाड़ा जिले के गुड़ी-अम्बाड़ा के पास स्थित है।

पड़ोसी मुल्क की मां हिंगलाज माता की ख्याति

मां हिंगलाज का दूसरा मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान राज्य में स्थित है। जहां पास में ही हिंगला नदी प्रवाहित होती है। माता का यह मंदिर हिंगलाज देवी शक्तिपीठ के नाम से ख्यात है। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के चक्र से कटकर यहां पर देवी सती का सिर गिरा था। इसलिए यह स्थान चमत्कारी और दिव्य माना जाता है। पाकिस्तान में मुस्लिम देवी हिंगलाज मंदिर को नानी का हज भी कहते हैं। इस स्थान पर पहुंचकर हिंदू और मुसलमान का भेद भाव मिट जाता है। दोनों ही श्रद्धापूर्वक माता की पूजा करते हैं।

हिंगलाज देवी के विषय में ब्रह्मवैवर्त पुराण में जिक्र है कि जो एक बार माता हिंगलाज के दर्शन कर लेता है उसे पूर्वजन्म के कर्मों का दंड नहीं भुगतना पड़ता है। मान्यता है कि परशुराम जी द्वारा 21 बार क्षत्रियों का अंत किए जाने पर बचे हुए क्षत्रियों ने माता हिंगलाज से प्राण रक्षा की प्रार्थना की। माता ने क्षत्रियों को ब्रह्मक्षत्रिय बना दिया, इससे परशुराम से उन्हें अभय दान मिल गया था।

एक मान्यता यह भी है कि रावण के वध के बाद भगवान राम को ब्रह्म हत्या का पाप लगा। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने भी हिंगलाज माता मंदिर की यात्रा की थी। राम ने यहां पर एक यज्ञ भी करवाया था। बलूचिस्तान में माता हिंगलाज माता वैष्णों की तरह एक गुफा में बैठी हैं। अंदर का नजारा देखेंगे तो आप भी कहेंगे अरे हम तो वैष्णो देवी आ गए, यह अहसास ही नहीं होगी इस्लाम देश पाकिस्तान में हैं।

साभार : पत्रिका डॉट कॉम छिंदवाड़ा


शुक्रवार, 18 मई 2018

टॉपर शिवानी के घर पहुंचे पवार समाज के पदाधिकारी

टॉपर शिवानी को बधाई देने पहुंचे जिला क्षत्रिय पवार समाज संगठन छिंदवाड़ा के पदाधिकारी

हर प्रतिभावान को ऐसे ही मिले सम्मान और अपनों का साथ

श्री वल्लभ डोंगरे जी के वॉल से

पवार जंगल में उगे पेड़ की तरह पलते हैं-
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कृष्ण के घर सुदामा का जाना नहीं,अपितु शबरी के घर राम का जाना लोक जीवन में मायने रखता हैं। ऐसा ही कुछ तब घटित हुआ जब जिला क्षत्रिय पवार समाज संगठन छिंदवाड़ा के पदाधिकारी गण, कुछ गण मान्य समाज सदस्यों के साथ शिवानी के घर उसे बधाई देने और सम्बल प्रदान करने पहुँचें।

उल्लेखनीय है कि  छिंदवाड़ा जिले के छोटे से गांव बीचकवाड़ा में रहने वाली कु  शिवानी पवार ने 12वीं के कला संकाय की मेरिट सूची में मध्यप्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। उसकी इस उपलब्धि के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा भी कु शिवानी पवार को सम्मानित किया जा चूका है।

इस अवसर पर कु शिवानी पवार पिता श्री  दिनेश पवार* के घर पहुंचकर माननीय जिला अध्यक्ष श्नी एन,आर.डोंगरे,जिला सचिव महेश डोंगरे,राजा भोज प्रतिमा अनाव़रन के जिला अध्यक्ष श्री हेमराज पवार ,युवा जिला अधयक्ष देवीलाल जी पाठे,रामचन्द्र पवार,सुताराम शेरके सतीश चन्द्र पवार,उमेश माटे,रामदास पवार सारोठ,दीपक गाडरे पालाखेड ,मधु पवार,गजानद पवार मंगल पवार,मदन पवार,रामकृष्ना पवार रामप्रसाद पवार ,गुरूप्रसाद बोबडे ,हरिप्रसादजी बोबड़े,पन्नालालजी डोंगरे,दिनेश जी पाठे ,बनवारी जी पवार आदि द्वारा भव्य स्वागत किया गया और उसकी हर संभव सहायता का आश्वाशन दिया गया।

उल्लेखनीय है कि पवार बगीचे में नहीं जंगल में उगे पेड़ की तरह पलते बढ़ते हैं। जंगल में पेड़ स्वयं संघर्ष करके पलता -बढ़ता है। बगीचे में पौधे रोपे जाते हैं। उन्हें खाद पानी दिया जाता है। माली उनकी देखरेख करता है। परन्तु पवारों के भाग्य में न बगीचा होता है और न माली। जैसे किसी जंगल में पेड़ अपने आप उगते और पलते बढ़ते हैं वैसे अधिकांश पवार संघर्ष में ही जीते और पलते बढ़ते हैं। वे बगीचे और माली के लिए तरसने के स्थान पर जंगल में संघर्ष के लिए तैयार रहते हैं। जंगल में पौधे स्वयं अपना सृजन करते हैं स्वयं अपना निर्माण करते हैं। कु शिवानी भी इसी तरह जंगल में उगे पेड़ का प्रतिनिधित्व करती है और बिना माली के पल्ल्वित और पुष्पित होने का प्रतिनिधित्व करती है। उसकी संघर्षशीलता और उसके जोश जूनून और जज्बे को नमन।   

चित्र - सौजन्य :श्री हेमराज पवार पाला चौरई

-सुखवाड़ा ,सतपुड़ा संस्कृति संस्थान ,भोपाल


बुधवार, 16 मई 2018

छिंदवाड़ा जिले का एक सरकारी स्कूल, जिसकी कहानी पढ़कर आप भी गर्व करेंगे

*छिंदवाड़ा जिले का एक सरकारी स्कूल, जिसकी कहानी पढ़कर आप भी गर्व करेंगे*

पंडित विशंभर नाथ पांडे के सपने को साकार करने में जुटा उमरेठ का हायर सेकंडरी स्कूल...

✔ इसी स्कूल में 12वीं आर्ट्स की छात्रा शिवानी पवार ने इस साल स्टेट में किया टॉप।

✔ यहां की एक छात्रा करुणा यादव ने ही मेरिट में सातवां स्थान प्राप्त किया है।

✔ यहां से पढ़ने वाले कई प्रतिभाशाली छात्र और छात्राओं ने बड़ा नाम कमाया है।

✔ रेसलर शिवानी पवार भी इसी स्कूल की छात्रा रही है, उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं।

✔ इससे पहले 1993 में उमरेठ स्कूल से ही ऊषा खापरे प्रदेश में टॉपर रही थी।

‌छिंदवाड़ा जिले में परासिया से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है उमरेठ। इस गांव की एक पहचान स्वतंत्रता सेनानी और बड़े राजनेता स्व. पंडित विशंभर नाथ पांडे के नाम से भी है. उनका जन्म 23 दिसंबर 1906 को उमरेठ ग्राम में हुआ था. उन्हें 1976 में पद्मश्री की उपाधि से सम्मानित किया गया था. वह उड़ीसा के राज्यपाल भी रहे. उनका निधन 1 जून 1998 में हुआ।

वह इतिहासकार भी थे। उन्होंने कई चर्चित किताबें लिखी है.
जानकार बताते हैं कि उमरेठ का मौजूदा स्कूल पंडित विशंभर नाथ पांडे की ही देन है। उन्होंने खुद की जमीन पर इस स्कूल की इमारत को खड़ा किया और बाद में गवर्नमेंट को दे दिया।

उमरेठ के आसपास मौजूद 2 दर्जन से ज्यादा गांव के बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं। यहां के शिक्षक इन बच्चों पर काफी मेहनत करते हैं। यह स्कूल कठोर अनुशासन और अच्छी गतिविधियों के लिए पहचाना जाता है.

उमरेठ स्कूल में आप जाएंगे तो आपको स्कूल की दीवारों पर प्रतिभावान छात्रों के नाम और नंबर सबसे पहले नजर आएंगे. इस स्कूल से लगातार बच्चे जिले की मेरिट लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराते रहे हैं. इसके साथ ही प्रदेश की मेरिट लिस्ट में भी आते रहे हैं।

इस साल 2018 में जहां 12वीं कला संकाय की मेरिट लिस्ट में इस स्कूल की छात्रा शिवानी पवार ने मध्यप्रदेश में टॉप किया है। वहीं करुणा यादव ने भी मेरिट में 7 वां स्थान हासिल किया है.

इन छात्रों की अभूतपूर्व सफलता में यहां के प्राचार्य और शिक्षकों का बड़ा योगदान है। ये सभी मिलकर पद्मश्री पं. विशंभर नाथ पांडे जी के सपनों को साकार करने में लगे हैं।

नोट- अगर आप भी इस स्कूल से या उमरेठ ग्राम से जुड़े हुए हैं तो प्लीज अपने संस्मरण, अपनी यादें और तस्वीरें शेयर कीजिए.

अगर आप इस स्कूल के छात्र रहे हैं या यहां के शिक्षक हैं तो अपने अनुभव बताइए।


सोमवार, 14 मई 2018

शिवानी पवार बनीं 12 वीं कला संकाय में स्टेट टॉपर

शिवानी पवार को सम्मानित करते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। 
*मुश्किलें कम न थीं, कभी एक वक्त खाए बिना सोई,* 
*आज कड़ी मेहनत से शिवानी पवार बनी 12वीं की स्टेट टॉपर*

*छिंदवाड़ा. छिंदवाड़ा जिले के छोटे से गांव बीचकवाड़ा में रहने वाली शिवानी पवार ने 12वीं के कला संकाय की मेरिट में पहला स्थान प्राप्त किया। 
शिवानी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, उमरेठ की छात्रा है। हर दिन उन्हें 10 किमी का सफर तय कर स्कूल जाना पड़ता था, जिसमें से 5 किमी कच्चे रास्ते पर पैदल चलना पड़ता था। 
शिवानी के पिता दिनेश पवार मजदूरी करते हैं। शिवानी ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल, उमरेठ में पढ़ाई की और 12वीं बोर्ड की कला संकाय में 476 (500) अंक हासिल किए। 

*शिवानी पवार ने हार नहीं मानी*
-कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिवानी ने हार नहीं मानी। हर रोज सुबह 4 बजे उठकर हर दिन 10 घंटे तक पढ़ाई करती थी। आस-पास के लोगों ने भी उसे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और आज शिवानी ने एमपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में प्रदेश में टॉप कर छिंदवाड़ा और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
*ताकि शिक्षा अासानी से मिल सके*  
-शिवानी का सपना शिक्षक बनना है, जिससे वह समाज के कमजोर तबके के बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकें और उनकी जिंदगी को बेहतर बना सकें। शिवानी कहती हैं कि बच्चे उसकी तरह मुश्किल परिस्थितियों में नहीं, बल्कि अच्छे से पढ़े और आगे चलकर अपने माता-पिता और गांव का नाम रोशन करे।

*साभार : दैनिक भास्कर डॉट कॉम*

गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

मिलिए 'मजनूं का टीला' वाले जगमोहन साहनी से



मन की बात
इस पोस्ट को पूरा पढ़ना

मैं जगमोहन साहनी उम्र 59
वजन 37 और 42 के आस पास
कद 5 फुट से कम
मैं 15 अगस्त 1957 को पूना में पैदा हुआ

पैदा होते ही मुझ पर पहला अटैक डबल निमोनिये नामक बीमारी ने किया जिसमे डॉक्टर्स ने मेरे पिता जी को जवाब दे दिया कि यह बच नहीं पायेगा पिता जी मिलट्री में मैकेनिक थे सो वह मुझे मिलट्री हॉस्पिटल ले गए ! वहाँ के डॉक्टरों ने बताया कि हम इसे बचा तो लेंगे पर इसका शारिरिक विकास नही हो पायेगा माता पिता ने कहा कोई बात नहीं आप इसे ठीक कर दीजिए तो मुझे उन्होंने पेंसलिन के इंजेक्शन लगाए जो कि बहुत गर्म होते है इन इंजेक्शनों के कारण मेरे शरीर का विकास रुक गया ! फिर हम पूना से बरेली आ गए और फिर दिल्ली के मजनूं का टीला जहाँ पिता जी ने 500 ₹ में एक झोपड़ी खरीदी !
पहली कक्षा से लेकर 8वी कक्षा तक ज़िन्दगी सही चल रही थी क्योंकि मजनूं टीले का स्कूल सिर्फ 8वी तक ही था परंतु जब नोंवी कक्षा में हमने लखनऊ रोड जो कि दिल्ली विश्वविद्यालय के पास है वहाँ दाखिला लिया तब मुझे एहसास हुआ कि मुझमें कुछ कमियां है क्योंकि 75% लोग मुझपे हँसते थे और मेरे कमजोर शरीर और छोटे कद का बहुत मजाक उड़ाते थे दुनियां की इस हीन भावना को देखते हुए मैं रातों को बहुत रोया करता था
दुनियां की खिल्ली उड़ाने की वजय से मैं शादी ब्याह में भी नहीं जाता था
धीरे धीरे मुझे यह सहने की आदत पड़ गई अब दुनिया की परवाह तो नही थी परंतु जब कोई अपना रिश्तेदार या दोस्त मुझ पर मेरे शरीर को लेकर कुछ कहता तो बहुत ही आत्मग्लानि होती थी

9 मई1982 को मेरी शादी परमजीत कौर जी से हुई मेरी ज़िंदगी मे इनकी एंट्री लक्की रही और मैंने एक फैसला लिया कि जो दुनियां मुझे देख कर हँसती है उसे क्यूँ न अपने हुनर से हसाया जाय इसलिए मैंने मजनूं टीला में होने वाली रामलीला में बतौर कॉमेडियन का रोल करने की ठान ली और अपने कॉमेडियन उस्ताद लल्ला की देख रेख में कॉमेडी की बरीकिया सीखने लगा  रामलीला में एंट्री मंत्री के रोल से शुरु की धीरे-धीरे धीरे एक कॉमेडियन के रूप में अपने आप को ढाल लिया

लल्ला उस्ताद की डेथ के बाद के मैंने अपना एक कॉमेडी ग्रुप बनाया जिसका नाम था मिज़िया कॉमेडी ग्रुप ! हम सप्रू हाउस में पंजाबी नाटक देखते और वही से कुछ सीख कर रामलीला में पेश कर देते हैं

धीरे धीरे से छोटे से मजनू टीले  में सात रामलीला होने लगी और सभी रामलीला में मैं कॉमेडी दिखाने लगा
आलम यह रहा की आस पास की जगह से भी लोग मुझे देखने के लिए आते थे जब भी रामलीला से बोर होकर पब्लिक अपने घर जाने लगती थी तो माइक में अलाउंस किया जाता था अब आपके सामने जगमोहन साहनी जी आ रहे हैं पब्लिक वहीं बैठ जाती थी रात को रामलीला करते-करते बारह एक बज जाते थे ! उस समय हमारे कॉमेडी ग्रुप की मजनू टीला में वह हैसियत थी जो आजकल अमिताभ बच्चन की पूरे वर्ल्ड में है लोग  हमसे हाथ मिलाने को आतुर रहते थे

इसके बाद हम ने कहा क्यों न अपने आप को और मशहूर किया जाए तो हमने रेडियो पर फरमाइश भेजनी शुरू कर दी रोज के 35 से 40 पोस्टकार्ड आकाशवाणी को जाते थे वह भी भारत की विभिन्न आकाशवाणीयों में उसके अलावा चाइना श्रीलंका में भी हम फरमाइश भेजते थे ! मेरे पेन फ्रेंड इतने थे कि रोज कि मुझे 20 से 25 चिठ्ठीयां आती थी अभी भी वह खत मैंने संभाल कर रखे हुए हैं

एक चिट्ठी में तो एड्रेस ऐसे लिखा था
मिले जगमोहन साहनी जी को (रेडियो स्टार)
मजनूं का टीला (उत्तर प्रदेश )
(प्रिये पोस्टमैन साहब आप इनको जरूर जानते होंगें)

और ज्यादातर खतों में यह लिखा होता तो
जगमोहन साहनी मजनूं का टीला दिल्ली
वह भी खत मुझे मिल जाता था
यहां मैं एक खत का और जिक्र करना चाहता हूं जिसमें यह लिखा था

प्रिय जगमोहन साहनी और पम्मी साहनी
नमस्कार
सालो तुम्हें और कोई काम नही है जब देखो रेडियो  और अखबारों में अपना नाम भेजते रहते हो
यह पढ़कर मैं बहुत हंसा

मैंने पहली बार रेडियो में अपना नाम  पाकीजा फिल्म के गीत  "चलते चलते यूंही कोई मिल गया था" सुना था कार्यक्रम का नाम था संगम जो की विविध भारती के विज्ञापन प्रसारण सेवा से आता था शायद आपने भी मेरा नाम सुना हो मजनूं का टीला से जगमोहन साहनी पम्मी साहनी शंटू और शैली बावा

मेरे तीन बच्चे है दो लड़कियां जो मुझे जान से भी प्यारी है और एक लड़का जो कि श्रवण कुमार  की भूमिका बखूबी निभा रहा है मैं सबकी शादी कर चुका हूं हमारी प्यारी बहु ने हमारी लडकियों की कमी को पूर कर दिया बहुत ही आज्ञाकारी है !

और अब बारी फेसबुक की फेसबुक ने मेरे तमाम गम भुला दिये फेसबुक ने मुझे ऐसे प्यारे प्यारे दोस्त दिए हैं जिनका प्यार पाकर मैं गदगद हो गया मैं आज भी  अपनी रिश्तेदारी से ज्यादा अहमियत अपने दोस्तों को देता हूं जितना प्यार और सम्मान मुझे फेसबुक के जरिए मिला है वह शायद मुझे कहीं से नहीं मिला हूं बस आख़िर में एक बात ही कहना चाहूंगा कृपया उस व्यक्ति का मज़ाक ना उड़ाए जिसके शरीर मे कमियां हैं आप चार आदमी एक बंदे को देख कर हसते हैं तो आप तो चारों खुश हो जाते हैं लेकिन जिस पर आप हंसते हैं उसके दिल पर क्या बीतती है यह मेरे से बेहतर कोई नहीं जानता तो मेरी आप सब से रिक्वेस्ट है कभी भी किसी मजबूर आदमी पर ना हँसे

साभार फेसबुक पोस्ट
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=770526523106739&id=100004481941673