Post Office Square, Chhindwara MP

Post Office Square, Chhindwara MP
LARGE STATUE OF LORD HANUMAN, Post Office Square & Kamania Gate..entry to Main Market Chhindwara MP

शुक्रवार, १६ अक्तूबर २००९

हैप्पी दिवाली

मेरे साथियों को दिवाली की बहुत -बहुत शुभ कामनाए

हैप्पी दिवाली

१३ ओक्टुबर से
छिंदवाड़ा के लिए एक्सप्रेस ट्रेन शुरू हो गई है .... छिंदवाड़ा-झांसी एक्सप्रेस 1103,
और झाँसी - छिंदवाड़ा एक्सप्रेस 1104

इसलिए मजा लीजिये इस ट्रेन का ....

आपका
रामकृष्ण डोंगरे

शनिवार, ५ सितम्बर २००९

Harnessing India's healing traditions for public health

Harnessing India's healing traditions for public health

Ahmedabad, Aug 9 (IANS) Ravaged by chronic renal failure, Radha Gulale looked more like a bloated 60 kg woman than the 10-year-old she was. Doctors had given her only a few months to live when her distressed parents approached a tribal healer in Gujarat, who gave her the proverbial new lease of life in what experts say is an affirmation of the healing tradition.

Sharebroker R.K. Patel, 47, has a similar tale. He spent hundreds of thousands of rupees for treatment of his 18-year problem of piles but it was not until he went to a tribal healer in Chhindwara, Madhya Pradesh, that he was cured. It took six doses of a herbal concoction for the cure he terms 'miraculous'.

The two examples are some of the many documented by Ahmedabad-based microbiologist and ethno-botanist Deepak Acharya to highlight the efficacy of India's amazing healing traditions perfected by tribal healers for practically every known illness and infection through centuries of observation and experimentation and rooted in a thorough grasp of plant lore.

What they have nurtured and preserved through oral tradition, making India a global repository of such trusted remedies, is in very real danger of perishing with the present generation shying away from the calling.

Acharya, 34, who has also been featured on the covers of The Wall Street Journal, hopes to make a difference with his company, Abhumka Herbals, founded here in 2007 with a modest capital of Rs।40 lakh (Rs.4 million). It is based on an entrepreneurial model of tribal cooperation and empowerment, besides profit sharing.


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http://in.news.yahoo.com/43/20090809/1537/tls-harnessing-india-s-healing-tradition.html


शनिवार, २९ अगस्त २००९

मैं और मेरी लाइफ के कुछ लम्हें ...

मैं और मेरी लाइफ के कुछ लम्हें ...

मैं जो कुछ भी लिख रहा हूं, हो सकता है कि मैं अपने अनुभवों के साथ सही नहीं हूं। या हर एक के साथ वैसा नहीं हुआ है, पर मेरे साथ तो वैसा ही है...

मैंने जो आंखों से देखा है जो महसूस किया है, मैं उन पलों को लिख रहा हूं। मैं समझता हूं, हर एक कामयाब इंसान के पीछे उसकी पर्सनल लाइफ से किए हुए समझौते होते हैं जो वे अपनी पूरी जिंदगी में बहुत कुछ खोकर हासिल करता है। कभी अपनी पर्सनल इच्छाओं को मारकर, कभी अपनी फैमिली से दूर होकर, कभी तकलीफें उठाकर, न जाने कितने समझौते करता है। पर जब हम उस इंसान को देखते हैं तो वो ऑलवेज हैप्पी नजर आता है। और कामयाबियों की सीढ़ी चढ़ता नजर आता है। दरअसल आप जो देख रहे हैं असल तो उसके चेहरे के पीछे छुपी हुई, उसकी दी हुई कुर्बानिया की दास्तां है। इसीलिए जिसने भी कहा है, क्या खूब कहा है...


कुछ खोकर पाना है, कुछ पाकर खोना है। जीवन का यही मतलब है, आना और जाना है

हर सक्सेसफुल पर्सन मेरे नजरिए से बहुत इमोशनल होता है। मेरी पर्सनल लाइफ में मुझे यह सीखने को मिला और उस समय मेरी ऐज कम थी, वैसा सभी के साथ नहीं होता। वे बहुत कम खुशनसीब होते है जो जिंदगी की अच्छाई को जल्द ही सामने देख लेते हैं। ये सब खुदा की दी हुई दौलत है। जब वो किसी को दी हुई जिंदगी की असलियत दिखाना चाहे तो वैसे ही दिखाता है।

मेरे साथ जिंदगी में हुए कुछ अनुभव सारी हकीकत को सामने लाकर रख देते है। जिस एक्सपेरियंस को मैं लिखने जा रहा हूँ, उसका टाईटल मैं "वॉट इज लाइफं" दे रहा हूँ ।

अगर हम इस सवाल "वॉट इज लाइफं" का जवाब किसी भी नॉर्मल पर्सन से पूछे तो वो इसका जवाब शायद ही सही दे पाए। क्योंकि इस सवाल के जवाब को हम शब्दों में नहीं समेट सकते। पर मैं इस सवाल केजवाब को सच्चे उदाहरण के जरिए देने की कोशिश कर रहा हूं।

ये उस समय की बात है जब मैं मुंबई पहली बार गया था। मेरे एक प्रेरणा स्त्रोत जिनकी वजह से मुझे सफलता मिली, वो मेरी ही कंपनी में सीनियर जनरल मैंनेजर के रूप में काम करते थे। बहुत ही परपेक्ट पर्सनॉलिटी, स्मार्ट, अटरेक्टिव पर्सन, कॉपरेटिव नेचर, कंपनी में सबसे अच्छी पोजिशन। शॉट में कहें तो बहुमुखी प्रतिभा केधनी आदमी। जिन्हें मैंने हमेशा मुस्कुराता और मस्ती करते हुए देखा था। और सबसे खास क्वजियो और जीने दों जैसी प्रतिभा के धनी उस महान इंसान की आंखों में मैंने कभी नमी नहीं देखी थी। वैसे इंसान को देखकर कोई भी यही कह सकता है कि इन्हें सब मिल गया पर...

हम यह कभी नहीं सोचते कि उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए, इन सब कामयाबियों को हासिल करने केलिए कितनी कुबाüनियां दी है... इस बात का अंदाजा कोई नार्मल सोच वाला नहीं लगा सकता है। उनके साथ मेरी छह या सात मुलाकात एक साल में बस दुआ-सलाम तक ही सीमित रही। जब उन्होंने कंपनी से रीजाइन दिया और मैं लास्ट डे उनसे मिलने उनके केबिन में गया और बात की। तो उन्होंने कहा, "कहो आज मैं जा रहा हूं" मेरी जुबान से वर्ड नहीं निकल रहे थे। मैंने कहा, सर मैं आप जैसा बनना चाहता हूं, यू आर माई आइडल पर्सन एंड आल्सो आई एम वेरी मच इम्प्रेस टू यूअर एटीट्यूट एंड सो ऑन।

उनकी आंखों से आंसू झलक पड़े और उन्होंने कहा, बेटा वॉट इज दिस। (हम जैसे आम इंसान की सोच यहां आकर खत्म हो जाती है) कि इतने अच्छे इंसान की आंखों में आंसू, जिसने अपनी पूरी जिंदगी खुलकर जिया है, जिसके जैसा बनने की मुझ जैसे छोटे इंसान की तमन्ना थी। उन्होंने कहा, मुझ जैसा कभी मत बनना। मैंने कहा, सॉरी सर मैंने आपके दिल को तकलीफ दी है।

... बेटा मेरे जैसा इंसान बनने तक आदमी बहुत कुछ खो देता है और इतना दूर निकल जाता है कि वापस आने का रास्ता ही नहीं सूझता और दिखाई देता।

उन्होंने कहा, बेटा बेस्ट ऑफ लक, मैं खुदा से तुम्हारे लिए दुआ करूंगा कि तुम एक बेहतरीन इंसान बनो और गले लगा लिया। बस मैं उस पल को छोड़कर जब घर आया तो इतना दुखी हुआ कि रात भर सो न सका, सोचता रहा कि मैंने बहुत ही इमोशनल इंसान का दिल दुखाया है।

हम लोग बस यहीं तक सोच सकते हैं पर जिंदगी की हकीकत यही है। जिंदगी हमेशा कुछ खोकर पाने का नाम है।

" जीने के लिए सोचा ही नहीं दर्द सँभालने होंगे, मुस्कुराए तो मुस्कुराने के कर्ज उतारने होंगे, मुस्कुराए तो कभी लगता है, जैसे होंठों पे कर्ज रक्खा रखा है।

मैंने इन सभी बातों से बहुत कुछ सीखा, हमें सिर्फ एक अच्छा इंसान बनना है, हमें अच्छे काम करना है ताकि दुनिया हमें हमारे ही नाम से जा सके।

अपने दर्द को छुपा लो, तुमने जो खोया है उसे दबा ले और आगे बढ़ जाओ ताकि तुम्हारे नक्शे कदम पर भी कोई चलने की प्रेरणा ले, तुम भी किसी केलिए आइडल बनो।

वो इंसान कल भी मेरे लिए आइडल थे, आज भी है और हमेशा रहेंगे और मैं उन जैसा बनने की पूरी कोशिश करूंगा...

आपका असद अली

सोमवार, २७ जुलाई २००९

Dr Deepak Acharya, Founder, Abhumka Herbal Pvt Ltd

Dr Deepak Acharya, Founder, Abhumka Herbal Pvt Ltd


The knowledge of the ancients is being revived by a man of great vision and innovative thinking…India has imparted Yoga, Ayurveda, the zero and many such innovations to the world and is on the verge of yet another gift. Dr Deepak Acharya and Abhumka Herbal Private Limited (http://www.abhumka.com/) are deeply engrossed in formulizing the indigenous knowledge after validation and value addition of potential herbal practices of tribals of Patalkot (http://www.patalkot.com/), Dangs and Aravallis in India. Traditional medicine (TM) occupies a central place among rural communities of developing countries for the provision of health care in the absence of an efficient primary health care system. The good doctor says “India is one of the oldest civilizations and it has an encyclopedia of tried, tested and trusted medicinal plants and also a vast bunch of traditional medicinal practices and Traditional Knowledge (TK) which, still is unwritten and passed through the word of mouth from generation to generation. Our indigenous peoples are experts in herbal knowledge and the modern world knows it as Indigenous Knowledge (IK). Tribals and indigenous people in India are a real power house of traditional herbal knowledge. “ ... Read more

http://www.yourstory.in/news/1063-frontpage/2288-dr-deepak-acharya-founder-abhumka-herbal-pvt-ltd

सोमवार, २७ अप्रैल २००९

Arshad Ali


Arshad Ali
E-mail: arshad.fanaa@gmail.com
Mobile no : +91- 9870651575
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  • Name: Arshad Ali
  • Father: Syed Daud Ali
  • Date Of Birth: 08th October 1985
  • Education: B.Sc (Computer Application), University Dr.Hari Singh Sagar (M.P)
  • Advance Courses: Ccna,Mcse,Linux From Hyderabad, Vb And Asp Dot Net From Mumbai
  • Job Profile: It Office In Pharmaceutical Company At Mumbai
  • Hobbies: Singing, Acting, Dancing
  • Marital status: Bachelor
  • Language Known: Hindi, English, Urdu, Marathi.
  • Contact No: +91- 9870651575
  • About Chhindwara: I Love It And I Want To Do Something For Our Society
  • Permanent Address : Mohgaon Haveli Th- Sausar Dist – Chhindwara 480105
  • Current Address: 1027, New Mhb Colony,Borivali(W), Mumbai 400091
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Faulado se zyada sakt hai ye zamana,
Zis par hamari zindagi me tumhara aana
Yaaro se puchha to hamne hai jaana,
Agar na hoti mohbbat to kya tay tha hamara mil jaana
Agar na aati wo saam to kya jaan pata zamana,
Rahe kar alag hame hai nibhana wo reshta purana,
Dard hamne hai sahe liya ,
Ek ho kar hai unko dikhana.
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Arshad Ali

गुरुवार, २६ मार्च २००९

कमलनाथ की राह हुई आसान

कमलनाथ की राह हुई आसान

भोपाल [ऋषि पांडे]। कांग्रेस के हाई प्रोफाइल नेता कमलनाथ के खिलाफ भाजपा ने मारोतीराव खबसे को उम्मीदवारी दे कर उनकी राह आसान कर दी है।

राजनीतिक पंडितों के पल्ले यह नहीं पड़ रहा कि कहां टीवी स्टार स्मृति ईरानी, मध्य प्रदेश के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नामों की चर्चा और कहां खबसे जैसे लो प्रोफाइल और स्थानीय नेता का चयन। खबसे का एक मात्र परिचय यह है कि वह छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत एक विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक रह चुके हैं।

कमलनाथ जैसे शक्तिशाली नेता के मुकाबले उम्मीदवार चयन करते वक्त भाजपा ने न तो जातिगत और न ही राजनीतिक पकड़ की कसौटी का ध्यान रखा। पिछले तीन लोकसभा चुनावों में यह जानते हुए कि नाथ को हरा पाना टेढ़ी खीर है।

भाजपा ने उनके मुकाबले ऐसे उम्मीदवार जरूर दिए थे कि वे क्षेत्र में ही उलझ कर रह जाएं। दो बार सुंदरलाल पटवा और एक बार प्रहलाद पटेल ने उन्हें टक्कर दी थी। पटवा के हाथों तो नाथ को एक बार पराजय का भी सामना करना पड़ा था। इस बार उम्मीदवारों के पैनल में खबसे का नाम दूर-दूर तक नहीं था। विजयवर्गीय ने तो खुद चुनाव लड़ने की पेशकश की थी।

एक अन्य मंत्री गौरीशंक र बिसेन के भी छिंदवाड़ा से लड़ने की चर्चा थी, पर चुनाव आयोग द्वारा पत्रकारों को तोहफे बांटने के मामले में उनकी भ‌र्त्सना करने के बाद पार्टी ने उनके नाम पर विचार करना छोड़ दिया।

नाथ की नजर भी भाजपा उम्मीदवार की घोषणा पर टिकी हुई थी। उनके कैंप को भय लगा कि इस बार भी कहीं प्रहलाद पटेल मुकाबले में न आ जाएं। पटेल ने पिछली बार नाथ की जीत की अंतर 188928 से घटा कर महज 63000 पर ला दिया था।

हाल में ही हुए विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाली सातों विधानसभा सीटों पर भाजपा की स्थिति काफी अच्छी थी। चार पर तो वह विजयी रही थी।

पूरे संसदीय क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस को मिले मतों के अंतर को देखें तो कांग्रेस के मुकाबले भाजपा साढ़े तीन हजार मत आगे थी। इसलिए कमलनाथ कैंप को चिंता थी कि यदि भाजपा ने कोई मजबूत उम्मीदवार दे दिया तो मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_5339455/

कमलनाथ को दहेज में मिली छिंदवाड़ा सीट

कमलनाथ को दहेज में मिली छिंदवाड़ा सीट


ऐसे कहा तो यह भी जाता है कि भाजपा ने कमलनाथ को यह सीट शुरु से ही दहेज में दे रखी है। कमलनाथ के श्वसुर किसी जमाने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रह चुके हैं और उनके भाजपा के शीर्ष नेताओं से लेकर संघ के प्रमुख पदाधिकारियों तक से अच्छे संबंध हैं। कमलनाथ दून स्कूल में राजीव गाँधी के साथ पढ़े हुए हैं और इन्दिराजी ने उन्हें अपना छोटा बेटा मानकर राजनीति में आने को कहा था।

केंद्रीय उद्योग मंत्री कमल नाथ के चुनाव क्षेत्र छिंदवाड़ा में पिछले दो दशक से कमल ही जीतता आ रहा है। कभी यह कमल कमल 'नाथ' के रूप में तो फिर कभी कमल के 'फूल' के रूप में।

अब भाजपा ने छिंदवाड़ा के विधायक मारोतराव खवसे को मुकाबले में उतारा है जो एक बेहद कमजोर उम्मीदवार हैं। इसके पहले कमलनाथ को टक्कर देने के लिए दो बार सुंदरलाल पटवा और एक बार प्रहलाद पटेल को मैदान में उतारा था। कमलनाथ एक बार पटवा से हार भी चुके हैं।

प्रह्लाद पटेल ने पिछले चुनाव में अंतर 188928 से घटा कर महज 63000 पर ला दिया था और अगर प्रह्लाद पटेल बाजपा से लड़ते तो वे कमलनाथ को अच्ची टक्कर दे सकते थे। पिछले विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाली सात विधानसभा सीटों में से चार पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इसमें भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले लगभग चार हजार मत ज्यादा मिले थे।

ऐसे कहा तो यह भी जाता है कि भाजपा ने कमलनाथ को यह सीट शुरु से ही दहेज में दे रखी है। कमलनाथ के श्वसुर किसी जमाने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रह चुके हैं और उनके भाजपा के शीर्ष नेताओं से लेकर संघ के प्रमुख पदाधिकारियों तक से अच्छे संबंध हैं। कमलनाथ दून स्कूल में राजीव गाँधी के साथ पढ़े हुए हैं और इन्दिराजी ने उन्हें अपना छोटा बेटा मानकर राजनीति में आने को कहा था।

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