शुक्रवार, 16 मार्च 2012

रेल बजट: छिंदवाड़ा ने मारी बाजी

रेल बजट: छिंदवाड़ा ने मारी बाजी

सबसे आशचर्यजनक पहलू यह सामने आया है कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमल नाथ के संसदीय क्षेत्र वाले सिंगल रेल लाईन वाले आमला छिंदवाड़ा रेल खण्ड के विद्युतीकरण को वर्ष 2012 - 2013 में विद्युतीकृत होने वाली दस परियोजनाओं में शामिल किया गया है।

यानी अब छिंदवाड़ा तक बिजली वाली रेल लाइन होगी । दिल्ली या अन्य दूसरे शहरों से छिंदवाड़ा जाना आसान हो जाएगा।

बृहस्पतिवार, 23 फरवरी 2012

छिंदवाड़ा की बात बड़ी है : प्रभुदयाल श्रीवास्तव

छिंदवाड़ा की बात बड़ी है

टिक टिक चलती तेज घड़ी है
छिंदवाड़ा की बात बड़ी है |

साफ और सुथरी सड़कें हैं
गलियों में भी नहीं गंदगी
यातायात व्यवस्थित नियमित
नदियों जैसी बहे जिंदगी

लोग यहां के निर्मल कोमल
नहीं लड़ाई झगड़े होते
हिंदु मुस्लिम सिख ईसाई
आपस में मिलजुलकर रहते

रातें होती ठंडी ठंडी
दिन में होती धूप कड़ी है

छिंदवाड़ा की बात बड़ी है|

वैसे तो नगरी छोटी है
लगता जैसे महानगर हो
कार मोटरें चलती इतनी
जैसे कोई बड़ा शहर हो

यहां मंत्रियों नेताओं ने
काया कल्प किया मनभावन
बिजली के रंगीन नज़ारे
शहर हो गया लोक लुभावन

भोर भोर सोने की रंगत
चांदी जैसी शाम जड़ी है

छिंदवाड़ा की बात बड़ी है|

घने घने पर्वत जंगल हैं
धवल नवल नदियों की धारा
दिख जाता पातालकोट सा
दिव्य मनोहर भव्य नज़ारा

बैगा और‌ गोंड़ दिख जाते
अपने कंधे गठरी लादे
कितने भोले कितने निर्मल
निष्कलंक हैं सीधे साधे

ईश्वर के पथ पर जाने को
निर्मल मन ही प्रथम कड़ी है

छिंदवाड़ा की बात बड़ी है|

पर सेवा का भाव यहां के
जनमानस में भरा पड़ा है
भले साधना साधन कम हों
लोगों का दिल बहुत बड़ा है

नहीं धर्म आपस में लड़ते
जात पांत में नहीं लड़ाई
हिंदु मुस्लिम सिख ईसाई
गाते मिलकर गीत बधाई

दीवाली से गले मिलन को
ईद राह में मिली खड़ी है

छिंदवाड़ा की बात बड़ी है |

यहां प्रगति का पहिया हरदम
काल समय से आगे चलता
जिसको जो भी यथा योग्य हो
अपनी महनत फल से मिलता

सब्जी गेहूं गन्ना सोया
यहां कृषक भरपूर उगाते
दूर दूर तक जातीं जिन्सें
धन दौलत सब खूब कमाते

खनिज संपदा और वन उपज
बहुतायत से भरी पड़ी है


छिंदवाड़ा की बात बड़ी है|

नये नये निर्माण हो रहे
बसी नईं आवास बस्तियां
बड़े बड़े दिग्गज आते हैं
आती रहतीं बड़ी हस्तियां

राष्ट्र पथों का संगम होगा
रेलों का एक बड़ा जंक्शन
अलग और बेजोड़ दिखेगा
साफ स्वच्छ माँडल स्टेशन

यत्र तत्र सर्वत्र यहां पर
नव विकास की झड़ी लगी है

छिंदवाड़ा की बात बड़ी है|


लेखक परिचय

लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|

sabhar- parvakta

शनिवार, 4 फरवरी 2012

कमलनाथ और छिंदवाड़ा एक दूसरे के पर्याय

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
शहरी विकास मंत्री कमलनाथ और छिंदवाड़ा एक दूसरे के पर्याय हैं। छिंदवाड़ा आज जो भी अस्तित्व है उसका एक बड़ा स्तंभ कमलनाथ जी हैं। आज से तीस बरस पहले तक छिंदवाड़ा महज जिला मुख्यालय के रूप में ही जाना जाता था किंतु 1980 के बाद जब से कमलनाथ ने ...

http://www.pravakta.com/kamal-nath-chhindwara-synonymous-to-each-other

शनिवार, 7 जनवरी 2012

छिंदवाड़ा में इंजीनियर के घर 10 करोड़ की संपत्ति

इंदौर : मध्यप्रदेश में एक सहायक इंजीनियर के इंदौर और छिंदवाड़ा जिले में घरों पर लोकायुक्त पुलिस के छापे में भारी नकदी और सोने के अलावा करीब 10 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता चला है। अधिकारियों ने बताया कि भारी संपत्ति, भूखंडों और नकदी के बारे में मिली शिकायतों के बाद आज लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह की अगुवाई में अलग-अलग टीम ने सहायक इंजीनियर रामलखन के इंदौर और छिंदवाड़ा में आवासों पर छापे मारे।

उन्होंने बताया कि अब तक दो बड़े आवासों, इंदौर में चार भूखंडों और मुरैना जिले में एक भूखंड का पता चला है जिसकी कीमत 9-10 करोड़ रुपए आंकी गई है। शहर में उनके दो आवासों से नकद 88 लाख रुपए, एक लाख का सोना, फिक्स्ड डिपोजिट की रसीद, एलआईसी पॉलिसी जब्त की गई है। उन्होंने बताया कि छिंदवाड़ा में जनजातीय विकास विभाग के इस इंजीनियर से पूछताछ की जा रही है। (एजेंसी)

Saturday, January 7, 2012,17:17

शनिवार, 26 नवम्बर 2011

पहली बार लिखा छिंदवाड़ा का प्रामाणिक इतिहास

सागर के युवा शोद्यार्थी डॉ. तरुण कुमार बड़ोनिया ने छिंदवाड़ावासियों को पहली बार उनके सही इतिहास से वाकिफ कराने का दावा किया है। उनके शोध में यह तथ्‍य उजागर हुआ है कि छिंदवाड़ा जिला सागर सहित पूरे बुंदेलखंड के लिए किसी आरोग्य तीर्थ से कम नहीं था। मध्यकाल से लेकर अंग्रेजी शासन काल के अंतिम वर्षों तक बुंदेलखंड के लोग विभिन्न बीमारियों का इलाज कराने छिंदवाड़ा जाते रहे।

badonia सरकारी गजेटियर में भ्रामक जानकारी
इतिहास विद् प्रो. विवेकदत्त झा और प्रो. रहमान अली का मानना है कि मप्र शासन के गजेटियर में प्रकाशित की जा रही पुरातत्व संबंधी जानकारी पूरी तरह प्रमाणिक नहीं है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि गजेटियर में प्रकाशित है कि छिंदवाड़ा जिले में पाषाण युग के अवशेष नहीं है। जबकि हकीकत यह है कि छिंदवाड़ा में चार पाषाण कालों के अवशेष मिले हैं। तरुण बडोनिया ने भी अपने शोधकार्य के दौरान इन अवशेषों पर अध्ययन किया है। गजेटियर प्रकाशित होने से पहले भी विभिन्न शोध कार्यों के दौरान छिंदवाड़ा में पाषाण युग के अवशेष मिलने का उल्लेख है। उज्जैन में विक्रम विवि के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रहमान अली का मानना है कि शासकीय स्तर पर होने वाले शोधों में पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती जा रही। इससे उन शोध कार्यों का स्तर लगातार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि शोध कार्यों के संबंध में उल्लेखित तथ्यों के बारे में विशेषज्ञों के पास पूर्व से निर्धारित मानक होते हैं। जिनके आधार पर ही वे पूर्व के इतिहास से उन तथ्यों को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा जिले के पाषाण पर तरुण बडोनिया के शोध कार्यों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये हैं। जिन्हें पुराने मानकों के आधार पर इतिहास से जोड़ा जा रहा है। वहां सातवाहन वंश के ताम्र पत्र, मंदिर निर्माण व अभिलेख भी प्राप्त हुए हैं। छिंदवाड़ा के लिखरी, चौरई, नीलकंठी, राजे गांव, आदि क्षेत्रों में पुराने इतिहास से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्‍य मौजूद हैं।

विवि के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति विभाग के पूर्व विभागध्यक्ष डॉ. बीडी झा के मार्गदर्शन में डॉ. बड़ोनिया ने छिंदवाड़ा के 10 वीं शताब्दी से लेकर अंग्रेजी शासन काल तक यहां के सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनैतिक घटनाक्रमों का लेखा जोखा तैयार किया है। यह पहला अवसर है जब इस काम को वास्‍तवकि जांच पड़ताल के बाद तथ्‍यों के आधार पर किया गया।

डॉ बड़ोनिया के मुताबिक छिंदवाड़ा का राजनैतिक इतिहास मौर्य काल से शुरू हुआ। खास बात यह रही कि इस जिले के तत्कालीन सीमा पर बसे अन्य जिलों सिवनी, जबलपुर, नागपुर आदि का राजनैतिक उद्भव उतनी तेजी से नहीं हुआ, जितना छिंदवाड़ा का। शोध में यह निष्कर्ष निकला है कि छिंदवाड़ा का सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव दक्षिण भारतीय प्रदेशों व विदेशों से प्रदेश के बाकी जिलों की अपेक्षा बहुत पहले हो गया था। प्रमाणस्वरूप यहां दक्षिण के हिंदसासानी शासक, प्रवरसेन द्वितीय के जमाने के कई सिक्के, ताम्रपत्र, शिलालेख और हाथी दांत से बने आभूषण और सामग्री के खरीद फरोख्त संबंधी प्रमाण मिले हैं।

मध्यकाल व उससे पहले तक बुंदेलखंड के निवासियों के बीच छिंदवाड़ा आरोग्य स्थल के रूप में पहचाना जाता था। यहां आज भी मौजूद गरम पानी का झरना और उससे पहले यहां की विभिन्न जड़ी-बूटियां लोगों को यहां आने के लिए मजबूर करती थी। जो लोग औषधीय उपचार में विश्वास नहीं रखते थे वे यहां तंत्र-मंत्र से इलाज कराने आते थे। जिले के कई गांवों में इस आशय के शिलालेख मिले हैं। जिले में एक स्थान पर मानसिक रोगियों के लिए अस्पताल मिलने के प्रमाण मिलते हैं। अंग्रेजी शासन काल में तत्कालीन सीपी एंड बरार में क्षेत्र का सबसे पहला मेडिकल कॉलेज इसी परंपरा व विश्वास से जोड़ा जा सकता है।

डॉ बड़ोनिया के शोध में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि यहां के निवासी अपने परिवार के मुखिया से लेकर निकटतम शासक वर्ग के प्रति विशेष श्रद्घा व सम्मान का भाव रखते थे। वे उनकी मृत्यु के बाद आम नागरिकों की तरह जमीन में दफनाने या दाह संस्कार करने की बजाय उनके शव को उनकी प्रिय वस्तुओं के साथ किसी गुफा में रख देते थे। उल्लेखनीय है कि यह परंपरा पश्चिमी देश फ्रांस और उज्वेक उजबेकिस्तान (पूर्व सोवियत संघ का अंग) में भी देखी गई है।

छिंदवाड़ा में चारों तरफ फैली हरियाली के इतिहास को भी बड़ोनिया ने खंगालने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक यहां वृक्षों जंगलों की बहुलता का एक बड़ा कारण स्थानीय निवासियों के पूर्वजों द्वारा उन्हें ईश्वर तुल्य मानना है। बड़ोनिया का कहना है कि क्षेत्र में कृषि के बाद लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन वृक्षों से मिलने वाले विभिन्न उत्पाद फल, फूल, वृक्षों की छाल आदि थे।

साभार - सागर (डेली हिंदी न्‍यूज़)

15 October 2011


सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

दिल्ली से चल पड़ी छिंदवाड़ा की ट्रेन...

दिल्ली से चल पड़ी छिंदवाड़ा की ट्रेन... दिल्ली के रेलवे स्टेशन में भी गूंजने लगा छिंदवाड़ा का नाम .... । नई दिल्ली के सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन से छिंदवाड़ा के लिए दो सीधी ट्रेनें चल रही है। पिछले संडे हम पहली बार इस स्टेशन पर पहुंचे। साथ में थे भाई अमिताभ अरुण दुबे और अनुज राधेश्याम डोंगरे।

स्टेशन पर पहुंचकर बहुत अच्छा लगा। एकदम शांत और भीड़-भाड़ से दूर जगह थी। मयूर विहार फेस - ३ से ऑटो किया था। पहुंचते ही अनाउंसमेंट हुआ छिंदवाड़ा जाने वाली कान्हनवेली एक्सप्रेस प्लेटफार्म नं. ३ पर खड़ी है। सुनकर मन प्रफुल्लित हो गया। प्लेटफार्म भी खाली था। और ट्रेन भी। लोग कह रहे थे रिजर्वेशन कराने की भी जरूरत नहीं है।

एक अच्छी बात यह रही कि छिंदवाड़ा के लोग यहां मिले। एक बंदा उमरानाला का भी था। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से आगे न्यू रोहतक रोड पर यह स्टेशन है। करोलबाग से आगे।

यहां से दो ट्रेन चल रही है। कान्हनवेली एक्सप्रेस और पातालकोट एक्सप्रेस। छिंदवाड़ा, पातालकोट और सतपुड़ा की हरी भरी वादियों में भ्रमण करने वाले पर्यटकों के लिए ये ट्रेनें सौगात ही है। दोपहर १२.२० पर यहां से निकलने वाली ट्रेन छिंदवाड़ा दूसरे दिन सुबह ९.५० बजे पहुंच जाएगी।

तो कीजिए छिंदवाड़ा की सैर...।

और हम सब को हैप्पी दिवाली।

बृहस्पतिवार, 13 अक्तूबर 2011

सड़कें अच्छी नहीं, सो हेलीकाप्टर से छिंदवाड़ा जाएंगे आडवाणी


भोपाल - मध्यप्रदेश में सड़कों की हालत चूंकि ठीक नहीं है, लिहाजा जनचेतना यात्रा पर निकल रहे भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी भोपाल से छिंदवाड़ा की 300 किलोमीटर की दूरी हेलीकाप्टर से तय करेंगे। भाजपा ने अपने वयोवृद्ध नेता की अवस्था को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया है।

आडवाणी की जनचेतना यात्रा मंगलवार से शुरू हो रही है। उनका रथ 13 अक्टूबर को मप्र की सीमा में प्रवेश करेगा। 16 अक्टूबर को भोपाल पहुंचने का कार्यक्रम है। यहां एक जनसभा को संबोधित करने के बाद आडवाणी हेलीकाप्टर से छिंदवाड़ा रवाना हो जाएंगे और वहां से उनकी यात्रा महाराष्ट्र में दाखिल हो जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा उन्हें विदा करने छिंदवाड़ा तक उनके साथ जाएंगे।

सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने भोपाल से छिंदवाड़ा जाने वाले मार्ग की हालत देखकर हेलीकाप्टर का सहारा लेने का फैसला लिया। यदि सड़क की स्थिति अच्छी होती तो आडवाणी निसंदेह सड़क मार्ग से ही छिंदवाड़ा जाते। चूंकि वक्त कम है और सड़क सुधर नहीं सकती, इसलिए हेलीकाप्टर को माध्यम बनाने का निर्णय लिया गया। हालांकि रीवा के हनुमना से लेकर जबलपुर और होशंगाबाद से भोपाल आने वाली सड़कों को दुरुस्त करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। आलम यह है कि राजधानी भोपाल में ही मिसरोद से टीटी नगर दशहरा मैदान तक की सड़क पर 20 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इसी दशहरा मैदान पर 16 अक्टूबर को आडवाणी की सभा है। इसी तरह होशगाबाद से बुधनी होते हुए भोपाल तक की सड़क की मरम्मत पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस काम में पीडब्ल्यूडी और नगरीय निकाय जुटे हुए हैं। इंजीनियरों से कहा गया है कि वह तीन दिन पहले ही सड़कों को ठीक कर लें।

सूत्रों का कहना है कि काम इतनी तेजी से हो रहा है कि होशगाबाद से भोपाल तक के जर्जर नेशनल हाईवे पर गड्ढे भरे जाने के अलावा डामर की पतली परत भी बिछाई जा रही है। यह अलग बात है कि बड़े वाहनों का लोड उठाने वाली यह सड़क दो-चार दिन बाद फिर पुरानी अवस्था में आ जाएगी।

GNN News, Oct 11th, 2011